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शांति की संस्कृति पर हुई चर्चा में भारत ने UN को बताया 'असफल', पाकिस्तान पर साधा निशाना

संयुक्त राष्ट्र का हेडक्वार्टर (फोटो: News18 English)
संयुक्त राष्ट्र का हेडक्वार्टर (फोटो: News18 English)

भारत (India) ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ऐसी संस्था नहीं जिसे किसी एक धर्म का पक्ष लेना चाहिए. भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आह्वान किया है कि संयुक्त राष्ट्र सबके लिए बोले न कि सिर्फ कुछ चयनित धर्म के लिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 10:16 PM IST
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नई दिल्ली. भारत ने बौद्ध, हिंदू और सिख धर्म के खिलाफ हिंसा (Violence against religion) और नफरत को नजरअंदाज करने के लिए संयुक्त राष्ट्र को कटघरे में खड़ा किया है. भारत ने शांति की संस्कृति (Culture of Peace) मसले पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा के दौरान दुनिया की सबसे बड़ी संस्था को बौद्ध, हिंदू और सिख धर्म के खिलाफ नफरत और हिंसा के मसले पर असफल करार दिया है.

भारत का पक्ष रखते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत की तरफ से फर्स्ट सेक्रटरी आशीष शर्मा (Ashish Sharma) ने कहा कि आखिर ऐसा क्यों है? भारत ने साफ कहा कि अगर ऐसा होता रहा तो दुनिया में शांति की संस्कृति मुश्किल है. भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ऐसी संस्था नहीं जिसे किसी एक धर्म का पक्ष लेना चाहिए.

भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आह्वान किया है कि संयुक्त राष्ट्र सबके लिए बोले न कि सिर्फ कुछ चयनित धर्म के लिए. भारत ने कहा कि बामयान में बुद्ध प्रतिमा को तोड़ना, अफगानिस्तान में सिख गुरुद्वारा में आतंकी हमला और हिंदू और बौद्ध मंदिरों में विध्वंस भर्त्सना के लायक है, लेकिन मौजूदा सदस्य देशों की तरफ से ऐसे मसलों पर उस तरह से नहीं बोला जाता जैसा कि तीन 'Abrahmic' धर्मों के लिए बोल जाता है.



पाकिस्तान पर भी भारत निशाना
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान (Pakistan) पर भी भारत ने निशाना साधा. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में करतारपुर कॉरिडोर (Kartarpur Corridor) के प्रबंधन में बदलाव को लेकर हमला किया. भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान शांति की संस्कृति से जुड़े प्रस्ताव का उल्लंघन कर चुका है. पिछले महीने पाकिस्तान ने सिखों के करतारपुर गुरुद्वारा साहिब प्रबंधन में बदलाव किया है और इसका प्रबंधन एक गैर सिख संस्था को दे दिया है और पाकिस्तान का ये कृत्य सिख धर्म के खिलाफ है.

भारत ने कहा कि अगर पाकिस्तान भारत के धर्मो के खिलाफ अपनी नफरत की संस्कृति में बदलाव लाता है और सीमा पार आतंकवाद (Terrorism) को समर्थन करना बंद करता है तभी असल में शांति की संस्कृति के लिए दक्षिण एशिया और बाहर में इसकी कोशिश हो सकती है, तब तक पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हत्या, धमकी और धर्म परिवर्तन के खिलाफ मूकदर्शक बने रहेंगे.
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