यूपी और हरियाणा में दो साल के अंदर हो जाता है पुलिस अधिकारियों का तबादला

कॉमनवेल्‍थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनावी वर्षों और राज्‍यों में अधिकारियों के ट्रांसफर की दर में अचानक उछाल आ जाता है. कॉमन कॉज की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी और हरियाणा में देश के अन्‍य सूबों के मुकाबले अधिकारियों के ट्रांसफर ज्‍यादा किए जाते हैं.

News18Hindi
Updated: September 3, 2019, 9:04 PM IST
यूपी और हरियाणा में दो साल के अंदर हो जाता है पुलिस अधिकारियों का तबादला
यूपी में 2007 से 2016 के बीच दो साल से कम समय में ट्रांसफर की दर में जहां 121 फीसदी उछाल दर्ज किया गया है. वहीं, हरियाणा में यह आंकड़ा 125 फीसदी है.
News18Hindi
Updated: September 3, 2019, 9:04 PM IST
मुंबई. यूपी (UP) और हरियाणा (Haryana) में एसएसपी (SSP) व डीआईजी (DIG) रैंक के अधिकारियों का दो साल से भी कम समय में ट्रांसफर कर दिया जाता है. यूपी में 2007 से 2016 के बीच दो साल से कम समय में ट्रांसफर की दर में जहां 121 फीसदी उछाल दर्ज किया गया है. वहीं, हरियाणा में यह आंकड़ा 125 फीसदी है. इसका सीधा मतलब है कि एक अधिकारी हर दो साल में कई बार ट्रांसफर किया गया. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, चुनावी साल में ट्रांसफर का प्रतिशत काफी बढ़ जाता है. कॉमन कॉज की रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों राज्‍यों में देश के अन्‍य सूबों के मुकाबले अधिकारियों के ज्‍यादा ट्रांसफर किए गए हैं.

हालांकि, पूरे देश में डीआईजी (Deputy inspector general) और एसएसपी (Senior Superintendents of police) रैंक के अधिकारियों के ट्रांसफर की दर 2007 के 37 फीसदी के मुकाबले 2016 तक घटकर 13 फीसदी रह गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव और ट्रांसफर्स के बीच सीधा संबंध है. चुनाव के साल में राजनीतिक हस्‍तक्षेप के कारण अधिकारियों के ट्रांसफर का प्रतिशत एकदम बढ़ जाता है. देश के 22 राज्‍यों में 2007 से 2016 के बीच 25 फीसदी एसएसपी और डीआईजी का ट्रांसफर दो साल से कम समय में ही कर दिया गया.

चुनावी वर्ष में अधिकारियों के ट्रांसफर में आता है सबसे ज्‍यादा उछाल
कॉमनवेल्‍थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनावी वर्षों और राज्‍यों में ट्रांसफर की दर में अचानक उछाल आ जाता है. साल 2013 में राजस्‍थान में 98 फीसदी एसएसपी और डीआईजी का ट्रांसफर किया गया. वहीं, इसी साल हरियाणा में 32 फीसदी, झारखंड में 53 फीसदी अधिकारियों का चुनावी साल में ट्रांसफर किया गया. जिन राज्‍यों में सत्‍ता में मौजूद राजनीतिक दलों की वापसी हुई, वहां भी अधिकारियों के औसत से ज्‍यादा ट्रांसफर हुए. गुजरात में चुनावी वर्ष 2012 में 80.60 फीसदी डीआईजी और एसएसपी के ट्रांसफर हुए, जबकि 2008 में राज्‍य में यह प्रतिशत 23.7 रहा था.

'राजनीतिक दल नौकरशाही को चुनाव में हावी नहीं होने देना चाहता'
छत्‍तीसगढ़ में 2013 में विधानसभा चुनाव हुए. राज्‍य में 2012 में जहां 36 फीसदी अधिकारियों का ट्रांसफर हुआ था. वहीं, 2013 में यह प्रतिशत बढ़कर 63.5 फीसदी पहुंच गया. सीएचआरआई में पुलिस सुधार कार्यक्रम की समन्‍वयक देविका प्रसाद ने इंडिया स्‍पेंड से कहा, आंकड़ों से स्‍पष्‍ट है कि कोई भी राजनीतिक दल चुनावों में नौकरशाही को हावी नहीं होने देना चाहता है. उन्‍होंने कहा कि सत्‍ता में बैठे लोग पुलिस सुधार को लेकर उत्‍साहित नहीं हैं, जो सही नहीं है.

कॉमनवेल्‍थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनावी वर्षों और राज्‍यों में ट्रांसफर की दर में अचानक उछाल आ जाता है.

Loading...

सिर्फ नगालैंड में तय की गई डीजीपी के ट्रांसफर की अवधि दो साल
नगालैंड इकलौता ऐसा राज्‍य है, जहां संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) द्वारा तीन वरिष्‍ठ अधिकारियों में से चयनित डीजीपी की एक जगह पर कम से कम दो साल के लिए पोस्टिंग की व्‍यवस्‍था की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने भी अनिवार्य किया है कि डीजीपी को कुछ खास आधारों पर ही हटाया जा सकता है. मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्‍त एमएन सिंह का कहना है कि ट्रांसफर के लिए न्‍यूनतम अवधि तय करना अच्‍छा है क्‍योंकि इससे अधिकारी को एक जगह पर बेहतर काम करने का पूरा मौका मिलता है.

कई राज्‍यों में अधिकारियों को हटाने का कोई आधार तय नहीं
सिंह ने कहा कि किसी अधिकारी को एक जगह पर सिर्फ छह महीने काम करने देने वैसा ही है, जैसे कोई एक ट्रेन से उतरा और दूसरी ट्रेन का फिर प्‍लेटफॉर्म पर इंतजार करने लगा हो. बेवजह ट्रांसफर, पोस्टिंग पुलिस का राजनीतिकरण कर देंगे. नगालैंड के अलावा आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मध्‍य प्रदेश और ओडिशा में आईजीपी के ट्रांसफर के लिए न्‍यूनतम अवधि दो साल तय की गई है. वहीं पांच राज्‍यों ने आईजीपी रैंक के अधिकारी के ट्रांसफर के लिए न्‍यूनतम एक साल की अवधि तय की है. गोवा, केरल, जम्‍मू-कश्‍मीर, मध्‍य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्‍ली समेत सभी केंद्रशासित राज्‍यों में अधिकारियों को हटाने का कोई आधार तय नहीं किया है.

यूपी में राजनीतिक हस्‍तक्षेप से तनाव महसूस करते हैं पुलिसकर्मी
2015 में किए गए एक अध्‍ययन के मुताबिक, उत्‍तर प्रदेश में 10 में 9 पुलिसकर्मी उनके कामकाज में राजनीतिक हस्‍तक्षेप से तनाव महसूस करते हैं. वहीं, 2014 के एक अध्‍ययन के मुताबिक, किसी भी समय निलंबित किए जाने के डर के कारण नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना बने रहना उनके तनाव की बड़ी वजह है. इन सभी कारणों से तंग आकर उत्‍तर प्रदेश में पुलिसकर्मी नौकरी छोड़कर दूसरे व्‍यवसायों का रुख कर रहे हैं. सीएचआरआई के मुताबिक, पुलिस सुधार को लेकर किसी भी राज्‍य या केंद्रशासित प्रदेश में छह में एक भी निर्देश को लागू नहीं किया गया.

ये भी पढ़ें: 

असम में स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजन भी NRC की अंतिम सूची से बाहर

शोर करने से रोका तो छह नाबालिगों ने बुजुर्ग पब मालिक की पीट-पीटकर हत्‍या कर दी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 3, 2019, 7:32 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...