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पहले चरण में किसी पार्टी के साथ नहीं मुसलमान, पश्चिमी यूपी में वोट बंटने के आसार

News18Hindi
Updated: April 6, 2019, 1:14 PM IST
पहले चरण में किसी पार्टी के साथ नहीं मुसलमान, पश्चिमी यूपी में वोट बंटने के आसार
11 अप्रैल को वेस्ट यूपी की मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, कैराना और बुलंदशहर में उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा.

ऐसे में पहले ही चरण से सूबे के सियासी तापमान और सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन के राजनीतिक भविष्य का अंदाजा भी हो जाएगा. इतना ही नहीं इस सवाल का भी जवाब मिल जाएगा कि क्या मुजफ्फरनगर दंगे की आंच में झुलसा जाट और मुस्लिम साथ आकर बीजेपी का समीकरण बिगाड़ेगा या फिर मोदी लहर पर सवार ही करेगा?

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(सुमित पांडेय)

कहते हैं दिल्ली सरकार का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है. उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 8 सीटों पर पहले चरण में 11 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. इन सीटों पर जीत बहुसंख्यक वोटर्स नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक वोटर्स (मुस्लिम मतदाता) तय करते हैं.

ऐसे में पहले ही चरण से सूबे के सियासी तापमान और सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन के राजनीतिक भविष्य का अंदाजा भी हो जाएगा. इतना ही नहीं इस सवाल का भी जवाब मिल जाएगा कि क्या मुजफ्फरनगर दंगे की आंच में झुलसा जाट और मुस्लिम साथ आकर बीजेपी का समीकरण बिगाड़ेगा या फिर मोदी लहर पर सवार ही करेगा?

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11 अप्रैल को वेस्ट यूपी की मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, कैराना और बुलंदशहर में उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा. सभी विरोध के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पुराने सांसदों को मैदान में उतारा है. कैराना में पार्टी ने विधायक प्रदीप चौधरी को टिकट दिया है. कार्यकर्ताओं की नाराजगी की वजह से शुरू में वेस्ट यूपी की कई सीटों पर प्रत्याशी बदलने की बात चल रही थी. इसके साथ ही ऐसा न होने पर पार्टी के भीतर समय-समय पर नाराजगी दिखती रही है. वहीं, कांग्रेस भी इन सीटों पर जाने-माने चेहरों को उतारा है. दोनों पार्टियां इन 8 सीटों पर जीतने का दावा भी कर रही हैं.

कांग्रेस ने यूपी की संवेदनशील कैराना सीट पर हरिंदर मलिक को उतारा है. अपनी जीत को लेकर आश्वस्त मलिक कहते हैं, 'मैं जानता हूं कि मुझे ब्राह्मण, कश्यप और जाट समेत करीब 2.5 लाख हिंदू वोट मिल रहे हैं.' कांग्रेस प्रत्याशी मेरठ-शामली हाइवे के नजदीक बुटराडा गांव में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे.

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मलिक आगे कहते हैं, 'सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद दिया है. ऐसे में मैं जानता हूं कि चुनाव में मेरी बीजेपी के साथ कड़ी टक्कर होने जा रही है.' बता दें कि संसद के बजट सत्र के आखिरी दिन मुलायम सिंह यादव ने सदन में बोलते हुए पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी और कहा था कि वह चाहते हैं कि मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनें.

वेस्ट यूपी में दूसरे प्रत्याशियों की तरह हरिंदर मलिक ने भी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जीवन से राजनीति की प्रेरणा लेते हैं. बुटराडा में मलिक का भाषण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर सपा-बसपा-रालोद गठबंधन और कांग्रेस के बीच मुस्लिम वोटों के समीकरण का प्रतिबिंब है. यहां अल्पसंख्यक वोट के जरिए जीत संभावना एक कारक पर निर्भर करती है.

कैराना सीट इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं. बीजेपी ने इस सीट पर मलिक के सामने मौजूदा विधायक प्रदीप चौधरी पर भरोसा जताया है. जबकि ओपोजिनशन की ज्वॉइंट उम्मीदवार तब्बसुम हसन आरएलडी की टिकट पर मैदान में हैं. हसन ने यहां पिछला उपचुनाव जीता था.


2014 में मोदी लहर के बीच इस सीट पर बीजेपी के हुकुम सिंह ने जीत दर्ज की थी, लेकिन उनके निधन के बाद 2018 में हुए उपचुनाव में संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार ने बीजेपी को करारी मात दी. राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की उम्मीदवार तबस्सुम हसन को समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस ने समर्थन दिया था. 2017 में प्रचंड बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने वाली बीजेपी के लिए इस हार को बड़े झटके के तौर पर देखा गया. अब 2019 के चुनाव में यहां बड़े उलटफेर की उम्मीद की जा रही है.

तब्बसुम हसन के बेटे नाहिद अपनी मां के लिए कैंपेनिंग कर रहे हैं. उन्होंने शामली से करीब पांच किलोमीटर दूर जाट बहुल गांव बैसवाल में भी कैंपेनिंग की है. नाहिद इन गांवों में धर्म का मुद्दा नहीं उठा रहे, बल्कि विकास कार्यों और मोदी-योगी सरकार की नाकामियों को उठा रहे हैं.

बता दें कि कैराना लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. पांच में से चार विधानसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं. इनमें नकुड़ BJP, गंगोह BJP, कैराना SP, थाना भवन BJP, शामली BJP के खाते में ही गई थीं.

कैराना से सटी सहारनपुर सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प होने वाला है. कांग्रेस ने इस सीट पर इमरान मसूद पर एक बार फिर से भरोसा जताया है. मसूद इस सीट पर करीब 70 हजार वोट से पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे. सहारनपुर में दलित और मुस्लिम वोटर्स कुल मतदाताओं का लगभग आधा हिस्सा हैं. इस सीट पर इमरान मसूद के खिलाफ विपक्ष ने बीएसपी के फजलउर रहमान को संयुक्त उम्मीदवार बनाया है.

ऐसे में आगामी चुनाव को लेकर बीजेपी को भी वोट के विभाजन का डर सता रहा है. यहां बीजेपी नंबर एक के लिए लड़ रही है, जबकि कांग्रेस और बसपा दूसरे और तीसरे स्थान के लिए मैदान में है. हालांकि, ऐसा लगता है कि सहारनपुर में हमारी लड़ाई कांग्रेस के मसूद के साथ है, न कि बसपा-सपा-रालोद के संयुक्त कैंडिडेट के साथ.

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First published: April 6, 2019, 9:41 AM IST
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