आज से शुरू होगा सिग्नेचर ब्रिज, AAP सरकार ने पूरी दिल्ली को दिया न्योता

सिग्नेचर ब्रिज (सोर्सः ट्विटर/ मनीष सिसोदिया)

सिग्नेचर ब्रिज (सोर्सः ट्विटर/ मनीष सिसोदिया)

675 मीटर लंबे इस ब्रिज की नींव 2004 में रखी गई थी.अभी तक भजनपुरा से गाज़ियाबाद जाने वाले सारे ट्रैफिक का भार वज़ीराबाद के पुराने पुल के ऊपर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2018, 11:59 AM IST
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दिल्ली में रविवार को सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन किया जाएगा. इस मौके पर अरविंद केजरीवाल अपनी पूरी कैबिनेट के साथ मौके पर मौजूद रहेंगे. यमुना पर बन रहा यह ब्रिज दिल्ली के वज़ीराबाद से गाज़ियाबाद की ओर जाने वाले लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा. अभी तक ट्रैफिक अधिक होने के नाते यहां काफी जाम लग जाता था जिससे लोगों को निजात मिलेगी.



ब्रिज के उद्घाटन समारोह का दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को न्योता नहीं दिया गया है जबकि इस ब्रिज के निर्माण की योजना उनके कार्यकाल में ही बनी थी. इस पर दिल्ली की आप सरकार का कहना है कि उद्घाटन के लिए विशेष न्योते की जरूरत नहीं. दिल्ली सबकी है. गौरतलब है कि आईटीओ पर बने स्काईवॉक के उद्घाटन पर मुख्यमंत्री केजरीवाल को भी नहीं बुलाया गया था.



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लेकिन इस मामले में सियासत तेज़ हो गई है. इस कार्यक्रम में बीजेपी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को भी नहीं बुलाया गया है. लेकिन उन्होंने घोषणा कर दी है कि वह बिना निमंत्रण के ही केजरीवाल से पहले मौके पर पहुंच जाएंगे. तिवारी ने कहा कि 2014 में उत्तर पूर्व क्षेत्र से सांसद निर्वाचित होने पर उन्होंने सिग्नेचर ब्रिज पर पहली मीटिंग बुलाई थी. इमसें बताया गया कि गैमन नाम की कंपनी प्रोजेक्ट छोड़कर भाग चुकी है. ब्रिज का बजट बढ़कर 1100 करोड़ रुपये का हो गया है. तिवारी ने कहा कि अक्तूबर माह में प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए 33 करोड़ रुपये उन्होंने केंद्र से आवंटित करवाए थे.
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, सिग्नेचर ब्रिज को लेकर मैंने दिन-रात संघर्ष किया था. खजूरी खास पर अनशन भी किया. उसी के उद्घाटन समारोह में क्षेत्र के सांसद को निमंत्रण न देकर कहीं न कहीं मुख्यमंत्री द्वारा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया है.

हालांकि, सिग्नेचर ब्रिज के अंतिम निरीक्षण को पहुंचे दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से जब उद्घाटन समारोह में शीला दीक्षित को बुलाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दिल्ली के हर नागरिक को इस समारोह में आने का न्योता दिया गया है. जिसका मन चाहे, वह आ सकता है. दिल्ली सबकी है.मनीष सिसोदिया ने भी पुल के काम को रुकवाने का बीजेपी पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "बीजेपी ने सिग्नेचर ब्रिज का काम रुकवाने की पुरजोर कोशिश की. नाकारा अफसरों को इंचार्ज बनाकर एक साल फाइलें नहीं हिलने दीं. अफसरों को डराया धमकाया. हमने लड़ लड़कर फाइलें क्लियर करवाईं. हर हफ्ते निरीक्षण किया....आखिर सपना पूरा हुआ."





पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि मुझे उद्घाटन का न्योता नहीं मिला है. वैसे भी सिग्नेचर ब्रिज बनने से दिल्ली के लोगों को जो सुविधा मिलेगी, वही सबसे जरूरी है. बीते दिनों मैं सिग्नेचर ब्रिज के पास से गुजरी थी, तो अपने सपने को साकार होता देख अच्छा लगा था.



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बता दें  कि 675 मीटर लंबे इस ब्रिज चार लिफ्ट लगाए गए हैं जिनकी कुल क्षमता 50 लोगों को ले जाने की है. इस क्षेत्र के विधायक कपिल मिश्रा ने बताया की यह ब्रिज एक पर्यटक स्थल होगा. सिग्नेचर ब्रिज का प्रस्ताव 2004 में प्रस्तुत किया गया था जिसे 2007 में दिल्ली मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली थी. शुरुआत में अक्टूबर 2010 में दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के पहले 1131 करोड़ रुपये की संशोधित लागत में बृज का निर्माण पूरा होना था. इसकी लागत 2015 में बढ़कर 1,594 करोड़ रुपये हो गयी. यह ब्रिज 2018 में 1650 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुई है.



(रचना उपाध्याय के इनपुट के साथ)
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