चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी को आयकर विभाग ने भेजा नोटिस

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (Election Commisioner Ashok Lavasa) की पत्नी को आयकर विभाग (Income Tax Department) ने नोटिस जारी किया है

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (Election Commisioner Ashok Lavasa) की पत्नी को आयकर विभाग (Income Tax Department) ने नोटिस जारी किया है

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    नई दिल्ली. चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (Election Commisioner Ashok Lavasa) की पत्नी को आयकर विभाग (Income Tax Department) ने नोटिस जारी किया है. यह नोटिस कई कंपनियों के स्वतंत्र निदेशक के रूप में हो रही उनकी आय के मामले में भेजा गया है. सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के भारत सरकार में सचिव का पदभार ग्रहण करने के बाद उनकी पत्नी नोवेल लवासा को कई कंपनियों का स्वतंत्र निदेशक बनाया गया था.

    खबर है कि आयकर विभाग ने पिछले हफ्ते नोवेल लवासा से इस मामले में पूछताछ भी की थी. जब अशोक लवासा पर्यावरण सचिव के तौर पर काम कर रहे थे तब नोवेल लवासा वेलस्पन ग्रुप समेत 10 कंपनियों में डायरेक्टर थीं. इन 10 कंपनियों में 6 वेलस्पन ग्रुप ऑफ कंपनीज़, 2 टाटा ग्रुप ऑफ कंपनीज़, 1 बलरामपुर चीनी मिल्स और 1 ओमेक्स ऑटोज़ शामिल थीं. आयकर विभाग ने नोवेल लवासा से इन कंपनीज़ में डायरेक्टर रहते हुए आमदनी को लेकर पूछताछ की थी.

    लोकसभा चुनाव के दौरान सुर्खियों में आए थे लवासा
    इससे पहले अशोक लवासा लोकसभा चुनाव के दौरान सुर्खियों में आ गए थे. तब लवासा ने आचार संहिता के कथित तौर पर उल्लंघन के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ 11 शिकायतों वाले चुनाव आयोग के क्लीन चिट देने के फैसले पर असहमति जताई थी.

    लवासा ने पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से जुड़े पांच मामलों में क्लीन चिट दिए जाने का विरोध किया था. अशोक लवासा इस बात से सहमत नहीं थे कि गुजरात और अन्य पांच मामलों में सेना और एयर स्ट्राइक का ज़िक्र करने के बावजूद पीएम मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट मिलनी चाहिए.

    पत्र लिखकर जताई थी आपत्ति
    4 मई को लिखे एक पत्र में लवासा ने लिखा था कि चुनाव आयोग की बैठक में उनकी भागीदारी अर्थहीन थी क्योंकि उनके असंतोष को तवज्जो नहीं दी गई. लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को यह पत्र लिखा था और कहा था 'जब से मेरे अल्पमत को रिकॉर्ड नहीं किया गया तब से कमीशन में हुए विचार-विमर्श में मेरी भागीदारी का अब कोई मतलब नहीं है.' अशोक लवासा ने लिखा था कि इस मामले में दूसरे कानूनी तरीकों पर भी विचार करेंगे. मेरे कई नोट्स में रिकॉर्डिंग की पारदर्शिता की जरूरत के लिए कहा गया है.

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