भारत, अमेरिका वैश्विक एजेंडे को आकार देने में सक्षम: एस. जयशंकर

भारत, अमेरिका वैश्विक एजेंडे को आकार देने में सक्षम: एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इंडिया आइडियाज सम्मेलन को संबोधित किया. (PTI)

इंडिया आइडियाज सम्मेलन (India Ideas Summit) में ऑनलाइन संवाद सत्र के दौरान भारती के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar)ने कहा कि दोनों देशों में वृहद वैश्विक एजेंडा को आकार देने की क्षमता है.

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  • Last Updated: July 22, 2020, 11:11 PM IST
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नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका को वाणिज्य संबंधों में लंबित समस्याओं का समाधान करने और बड़े परिदृश्य की ओर आगे बढ़ने की जरूरत है. इंडिया आइडियाज सम्मेलन (India Ideas Summit)  में ऑनलाइन संवाद सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों में वृहद वैश्विक एजेंडा को आकार देने की क्षमता है.

उन्होंने कहा, ‘मैं आर्थिक संबंधों की प्रमुखता को समझता हूं. ये अति आवश्यक मुद्दे हैं. ये वास्तव में देशों को एक-दूसरे से समझौते के प्रमुख आधार हैं। लेकिन मेरा मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच हम जहां वाणिज्य मुद्दों के माध्यम से काम करते हैं, हमें बड़ा सोचने की जरूरत है.’

उन्होंने कहा कि वाणिज्य के इतर भारत और अमेरिका के बीच ज्यादा बड़ा संबंध है. उन्होंने कहा, ‘यह जरूरी है कि बड़े परिदृश्य में हम मजबूती से साथ हों.’ भूराजनीतिक परिदृश्य के बारे में जयशंकर ने कहा कि अमेरिका को वास्तव में एक ज्यादा बहुध्रुवीय विश्व के साथ काम करने की जरूरत है, जिसमें बहुआयामी व्यवस्था हो.



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क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री
इससे पहले इंडिया आयडियाज सम्मेलनमें अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) ने कहा है कि गलवान घाटी (Galwan Valley) में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत पर उन्हें गहरा दुख है. पोम्पियो ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी एक खतरा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन पर अपनी निर्भरता कम करेगा, विशेष तौर पर दवाओं के क्षेत्र में. भारत के पास मौका है कि वह चीन से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अपने यहां आकर्षित करे और चीनी कंपनियों पर अपनी निर्भरता को कम करे. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत की सुरक्षा के मसले पर हमेशा समर्थन दिया है.

 '21वीं सदी के सबसे मजबूत संबंध'
वहीं भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर ने कहा है कि दोनों देशों ने रणनीतिक साझीदारी को ग्लोबल रणनीतिक साझीदारी में बदला है. उन्होंने पीएम मोदी की बात का हवाला देते हुए कि ये साझीदारी 21वीं सदी के सबसे मजबूत संबंधों में है.
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