India China Standoff: सर्दियों से पहले चीन से तनाव कम करने की आखिरी कोशिश, 12 अक्टूबर को होगी कोर कमांडर-स्तर की वार्ता

भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडर स्तर की बैठक 12 अक्टूबर को होगी.
भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडर स्तर की बैठक 12 अक्टूबर को होगी.

21 सितंबर को हुई पिछले दौर की सैन्य स्तर की वार्ता (commander level talks) के बाद भारत (India) और चीन (China) ने कुछ निर्णयों की घोषणा की थी, जिसमें और सैनिकों को अग्रिम मोर्चे पर नहीं भेजने, एकतरफा रूप से जमीनी स्थिति को बदलने से बचने और ऐसे कार्यों को करने से बचने की बात कही गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2020, 7:57 AM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में भारत और चीन के बढ़ते तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच सातवें दौर की कोर कमांडर स्तर की बैठक होने जा रही है. उम्मीद की जा रही है कि सर्दियों से पहले होने वाली इस आखिरी बैठक में चीन (China) की ओर से सीमा (India-China Border Dispute) पर शांति बनाए रखने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे. अभी तक की जानकारी के मुताबिक ये बैठक 12 अक्टूबर को होगी. वार्ता के दौरान दोनों पक्षों द्वारा जमीनी स्तर पर स्थिरता बनाए रखने तथा क्षेत्र में तनाव उत्पन्न करने वाली कार्रवाई से बचने के लिए अन्य कदमों पर गौर किए जाने की उम्मीद है.

सूत्रों ने बताया कि वार्ता के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई भारतीय सेना के लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे और विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि सातवें दौर की सैन्य वार्ता में लेफ्टिनेंट जनरल पी जी के मेनन भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे.

गत 21 सितंबर को हुई सैन्य स्तर की वार्ता के पिछले दौर के बाद दोनों पक्षों ने कुछ निर्णयों की घोषणा की थी, जिसमें और सैनिकों को अग्रिम मोर्चे पर नहीं भेजने, एकतरफा रूप से जमीनी स्थिति को बदलने से बचने और ऐसे कार्यों को करने से बचने की बात कही गई थी जो आगे मामले को जटिल कर सकते हैं.

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इन पांच बिंदुओं पर केंद्रित है दोनों देशों की वार्ता
यह वार्ता सीमा पर लंबे समय से जारी टकराव को दूर करने के लिए पांच सूत्री द्विपक्षीय समझौते के क्रियान्वयन पर केंद्रित रही थी. गत 10 सितंबर को मास्को में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर तथा उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच यह समझौता हुआ था. पांच सूत्री समझौते का लक्ष्य तनावपूर्ण गतिरोध को खत्म करना है जिसके तहत सैनिकों को शीघ्र वापस बुलाना, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से बचना, सीमा प्रबंधन पर सभी समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करना तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बहाली के लिए कदम उठाने जैसे उपाय शामिल हैं.

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भारत को डराने के लिए गोली भी चला चुकी है पीएलए
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने 29 अगस्त से आठ सितंबर के बीच तीन बार पैंगोंग झील के दक्षिणी और उत्तरी तट पर भारतीय सैनिकों को धमकाने की कोशिश की है. यहां तक कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 45 साल में पहली बार हवा में गोलियां चलाई गईं. तनाव बढ़ने पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की 10 सितंबर को मास्को में बैठक हुई थी, जहां वे पूर्वी लद्दाख में स्थिति को शांत करने के लिए पांच सूत्री समझौते पर पहुंचे थे.
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