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चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भारत-जापान की नौसैनाओं का युद्धाभ्यास

चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भारत-जापान की नौसैनाओं का युद्धाभ्यास

दोनों ही सेनाओं की तरफ से इसे रूटीन अभ्यास के तौर पर प्रदर्शित किया जा रहा है.

दोनों ही सेनाओं की तरफ से इसे रूटीन अभ्यास के तौर पर प्रदर्शित किया जा रहा है.

भारत और जापान (India and Japan) के बीच नौसैनिक युद्धाभ्यास (Naval Exercise) कोई नई बात नहीं है लेकिन वर्तमान अभ्यास को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

    नई दिल्ली. चीन के साथ बीते डेढ़ महीने से चल रहे सीमा विवाद (Border Dispute) के बीच भारत और जापान (India and Japan) की नौसैनाओं ने हिंदमहासागर में युद्धाभ्यास किया है. ये युद्धाभ्यास शनिवार को किया गया और दोनों सेनाओं की तरफ से इसकी घोषणा रविवार को की गई. सेनाओं की तरफ से इसे आपसी समझ को बढ़ाने वाला करार दिया गया है.

    युद्धाभ्यास में दोनों ही देशों के दो-दो पोतों ने हिस्सा लिया. भारत की तरफ से नेवी के ट्रेनिंग पोत आईएनएस राणा और आईएनएस कुलीश शामिल हुए तो जापान की तरफ से जेएस काशिमा और जेएस शिमायुकी शामिल हुए. हालांकि दोनों ही सेनाओं की तरफ से इसे रूटीन अभ्यास के तौर पर प्रदर्शित किया जा रहा है लेकिन इसे चीन के साथ सीमा विवाद के नजरिए से भी देखा जा रहा है.

    हिंदुस्तान में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल मैरिटाइम फाउंडेशन के महानिदेशक वाइस एनमिरल प्रदीप चौहान ने कहा है कि हम रणनीतिक संचार के लिए युद्धाभ्यास कर रहे हैं. हमारे नौसैनिक युद्धाभ्यास से ज्यादा रणनीतिक संचार को मजबूत करने लिए अभ्यास कर रहे हैं. चौहान के मुताबिक मित्र देशों के साथ नजदीकी संबंधों की जरूरत होती है. और चीन भी इस बात को जानता है कि उसकी जापान और अमेरिका के साथ पुरानी अनबन है.



    गौरतलब है कि भारत और जापान के बीच नौसैनिक युद्धाभ्यास कोई नई बात नहीं है लेकिन वर्तमान अभ्यास को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस ने सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि चीन के साथ गतिरोध को लेकर हो रही बातचीत में 'टक्कर और लड़ाई' जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. एक बड़े सरकारी अधिकारी जो इन बैठकों में शामिल होते रहे हैं.



    उन्होंने अखबार से बाचतीत में कहा कि हम नहीं चाहते हैं कि जंग हो, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो फिर हमलोग पीछे हटने वाले नहीं हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार इस बात से वाकिफ है कि जंग के क्या नतीजे हो सकते हैं? तो उनका जवाब था कि अगर आप नतीजों के बारे में सोचेंगे तो फिर आप आगे नहीं बढ़ सकते. (Shreya Dhoundial की स्टोरी से इनपुट्स के साथ)

    Tags: Galwan Valley, Indian navy, Indo-China Border Dispute, Japan

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