विवाद के बीच बातचीत की मेज़ पर भारत और नेपाल, सुधरेंगे संबंध!

विवाद के बीच बातचीत की मेज़ पर भारत और नेपाल, सुधरेंगे संबंध!
भारत और नेपाल के बीच सोमवार को हुई बातचीत (फाइल फोटो)

भारत और नेपाल के बीच मई से ही सीमा विवाद (India Nepal Border Dispute) जारी है. नेपाल ने मई में नया राजनीतिक नक्शा जारी कर भारत के तीन हिस्सों, लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 17, 2020, 4:43 PM IST
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नई दिल्ली. काठमांडू (Kathmandu) द्वारा मई में नया राजनीतिक मानचित्र जारी करने के बाद रिश्तों में आई तल्खी के बीच सोमवार को भारत-नेपाल (India-Nepal) के बीच पहली बड़ी बैठक हुई. भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा Vinay Mohan Kwatra) और नेपाल के विदेश सचिव शंकर दास बैरागी (Shankar Das Bairagi) के बीच यह बैठक नेपाल में भारत के सहयोग से बन रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है. हालांकि दो से अधिक घंटों तक चली इस बैठक में सीमा विवाद या नक्शे को लेकर चर्चा नहीं हुई. सूत्रों ने न्यूज़18 से कहा कि यह बैठक सामान्य संवाद प्रक्रिया का हिस्सा है और ऐसी बैठकें 2016 से चल रही हैं, जिनमें द्विपक्षीय आर्थिक और विकास परियोजनाओं की दोनों देश समीक्षा करते हैं.

बैठक के बाद भारतीय दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि बैठक में आर्थिक और विकास परियोजनाओं की समीक्षा की गई और इन्हें लागू करने में तेज़ी लाने पर दोनों देशों ने सहमति जताई. बैठक में पिछले एक साल में विकास कार्यों की समीक्षा की गई जिसमें गोरखा और नुवाकोट में 46,301 भूकंप प्रभावित घरों के पुननिर्माण, मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम पदार्थ पाइपलाइन के संचालन, बिराटनगर पर ICP के निर्माण और हाई इम्पैक्ट कम्यूनिटी डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई. नेपाल ने कोविड संबंधित राहत सामग्री की सप्लाई के लिए भारत की सहायता का धन्यवाद किया.

पीएम मोदी और केपी ओली की फोन पर हुई थी बात
इस बैठक से ठीक 2 दिन पहले दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने स्वतंत्रता दिवस (Independece Day) के मौके पर द्विपक्षीय संबंधों पर बात की. बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और नेपाल की साझा सभ्यता और सांस्कृतिक संबंधों को याद किया. केपी ओली ने पीएम मोदी को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी और सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के लिए पीएम मोदी को शुभकामनाएं दीं. वहीं प्रधानमंत्री ने कोरोना को लेकर नेपाल को भारत के निरंतर समर्थन की पेशकश की.
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नेपाल पीएम ओली के बिगड़े बोल
नेपाल और भारत के संबंधों में तल्खी उस दिन शुरू हुई जब नेपाल ने मई में अपने नए राजनीतिक नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाया. उसके बाद नेपाल पीएम केपी ओली ने बार-बार भारत विरोधी बयान दिए. पहले मई में उन्होंने नेपाल का नया नक्‍शा जारी करने के बाद भारत पर 'सिंहमेव जयते' का तंज कसा. जून में उन्होंने अपने देश में कोरोना के प्रसार के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया. फिर जून के अंत में उन्होंने इशारों में उन्हें सत्ता से हटाने के लिए भारत पर साज़िश का आरोप लगाया.

लेकिन जुलाई में उन्होंने दुनियाभर में रह रहे हिंदुओं की भावनाओं को यह कह कर चोट पहुंचाई कि भगवान राम नेपाल से हैं. ओली ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश में नकली अयोध्या बना कर भारत ने नेपाल की सांस्कृतिक धरोहर पर अतिक्रमण किया है. हाल ही में उन्होंने नेपाल की अयोध्यापुरी में भव्य राम मंदिर निर्माण की शुरुआत करने को कहा. लेकिन भारत ने नेपाल पीएम के इन बयानों पर कोई प्रतिक्रिया न देकर साफ कर दिया कि भारत संबंधों को महत्व देता हैं, नेपाल पीएम के बयानों को नहीं.

भारत से रिश्ते सुधारने की कोशिश के पीछे भी चीन?
भारत के साथ नेपाल के संबंधों को हाल के दिनों में चीन ने काफी प्रभावित किया है. राजशाही के खत्म होने के दौर से ही नेपाल में संभावनाएं तलाश रहे चीन को नेपाल के आंतरिक मसौदों में सीधी दखल का मौका तब मिला जब 25 अप्रैल 2015 के भीषण भूकंप ने नेपाल को बुरी तरह प्रभावित किया. राहत और मदद के बहाने से चीन अगले ही दिन नेपाल पहुंच गया.

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चीन को अपने One Belt One Road की मुहिम के लिए नेपाल के सहयोग को पुख्ता करना था और भूकंप ने इस कार्य के लिए उसे बेहतरीन मौका दिया. रेस्क्यू टीम के साथ साथ मेडिकल टीम और फौजी दस्तों ने नेपाल में भूकंप राहत का कार्य करने के बहाने नेपालियों का दिल जीतने में कसर नहीं छोड़ी. इस प्रयास का एक मक़सद भारत को राहत कार्य में पीछे छोड़ना भी था और चीन को नेपाल का बेहतर खैरख्वाह साबित करना था. नेपाल की आंतरिक राजनीति में आर्थिक ब्लॉकेड का वहम भी खड़ा किया गया ताकि नेपाल भारत से दूर हो जाये और चीन हितैषी नज़र आये.

कालांतर में जब नेपाल के सभी वामदल 2018 में एक हो गए और ओली सरकार की स्थापना की गयी तो चीन का पूरा खेल ज़ाहिर हो गया. आज चीन के दबाव के अनुसार नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी काम कर रही है और ओली का कायम रहना नेपाल में चीन की दखल का सीधा प्रमाण है.

भारत-नेपाल के सांस्कृतिक रिश्तों की जड़े काफी मज़बूत हैं. भारत और नेपाल के रिश्तों को ओली के ज़रिए विवादों में धकेलने की चीनी कोशिश को अब नेपाली जनता समझने लगी है. चीन की नेपाल में राजदूत की कारस्तानियों का विरोध भी शुरू हो गया है. ऐसे में ओली द्वारा भारत के प्रति नरम रुख भी 'स्पॉटलाइट' अपने ऊपर से हटाने की चीनी कोशिश के तौर पर ही देख जा रहा है.
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