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भारत-पाकिस्तान के सरकारी अधिकारियों के साथ 20 देशों की सेना के Whatsapp से हुई जासूसी: रिपोर्ट

News18Hindi
Updated: November 1, 2019, 9:31 AM IST
भारत-पाकिस्तान के सरकारी अधिकारियों के साथ 20 देशों की सेना के Whatsapp से हुई जासूसी: रिपोर्ट
व्हाट्सएप पर स्पाईवेयर: पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी

मैसेजिंग कंपनी की जांच से जुड़े लोगों का कहना है कि यूज़र के फोन को हैक करने के लिए Facebook Inc's WhatsApp का प्रयोग किया गया था.

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  • Last Updated: November 1, 2019, 9:31 AM IST
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नई दिल्ली.फेसबुक के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (WhatsApp) के खुलासे से प्राइवेसी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. वॉट्सऐप के जरिए दुनियाभर के देशों में की जा रही जासूसी की जांच कर रहे अधिकारियों ने दावा किया है कि इस साल की शुरुआत में ही हैकिंग सॉफ्टवेयर की मदद से अमेरिका से संबद्ध देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की जासूसी की जा रही थी. मैसेजिंग कंपनी की जांच से जुड़े लोगों का कहना है कि यूज़र के फोन को हैक करने के लिए Facebook Inc's WhatsApp का प्रयोग किया गया था.

वॉट्सऐप की आंतरिक जांच से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि हैकर्स के निशाने पर हाई-प्रोफाइल सरकार और पांच महाद्वीपों में बैठे देशों के सैन्य अधिकारी शामिल थे. उन्होंने कहा कि इसमें अमेरिका से जुड़े कुछ सहयोग देश भी शामिल हैं. गौरतलब है कि मंगलवार को ही वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी फेसबुक की ओर से इजरायल की साइबर सिक्योरिटी कंपनी एनएसओ पर हैकिंग का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया गया है.

जासूसी पर सरकार ने मांगा जवाब
वॉट्सऐप पर स्पाइवेयर (spyware on WhatsApp) के बढ़ते विवाद के बीच सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 2011 और 2013 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और जनरल वीके सिंह के खिलाफ जासूसी करने के कथित मामले पर व्हाट्सएप (Whatsapp) से जवाब मांगा है. व्हॉट्सएप से अपना जवाब 4 नवंबर तक देने को कहा गया है.

समझें पूरा मामला
कंपनी पर आरोप है कि हैकर्स ने वॉट्सऐप के सर्वर का इस्तेमाल कर 29 अप्रैल, 2019 से 10 मई, 2019 के बीच 1400 वॉट्सऐप यूजर के मोबाइल फोन पर मालवेयर से हमला किया गया है. इसके जरिए ही ये जासूसी की गई है. इनमें 20 देशों के पत्रकार, सरकार के उच्चाधिकारी, मानवाधिकार एक्टिविस्ट शामिल हैं.

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1400 व्हाट्सएप यूजर के मोबाइल फोन पर मालवेयर से हमला किया गया है.

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हैक किए गए वॉट्सऐप उपयोगकर्ताओं की संख्या और अधिक हो सकती है. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अधिकारियों के फोन को हैक करने के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किसने किया. एनएसओ ने कहा कि वह अपने स्पाईवेयर को विशेष रूप से सरकारी कंपनियों को बेचता है.

इन देशों में हुई जासूसी
जांच में पता चला है कि जिन लोगों के फोन की जासूसी की गई है, उनमें कुछ पीड़ित संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मैक्सिको, पाकिस्तान और भारत के शामिल हैं. न्यूज एजेंसी रायटरने कहा है कि अभी हम ये नहीं कह सकते हैं कि ये सभी सरकारी अधिकारी इन्हीं देशों के हैं या फिर कहीं और के.

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यह साइबर हमले इस साल मई में हुए.


भारत में कम से कम 10 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हुई जासूसी
भारत में कम से कम 10 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने व्‍हाट्सएप के जरिये उनकी जासूसी किए जाने की बात मानी है. 'हफिंगटन पोस्‍ट' और 'स्‍क्रॉल डॉट' इन की खबरों के मुताबिक, इनमें से भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार दो मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के वकील भी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनके अलावा महाराष्‍ट्र और छत्‍तीसगढ़ के कुछ दलित मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इस जासूसी के शिकार हुए है.

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29 अप्रैल, 2019 से 10 मई, 2019 के बीच हैकर्स ने व्हाट्सएप के सर्वर पर मालवेयर का हमला किया था.


प्रशासन ने किया इनकार
वॉट्सऐप ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि किसके आदेश पर पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मोबाइलों को टार्गेट किया गया. हालांकि, एनएसओ ग्रुप पेगासस सॉफ्टवेयर का रखरखाव करता है और इसे सिर्फ विश्‍व की विभिन्‍न सरकारी एजेंसियों को बेचता है. 'इंडियन एक्‍सप्रेस' के अनुसार 20 से अधिक भारतीय व्‍यक्तियों को लोकसभा चुनाव के पहले दो हफ्ते तक सर्विलांस के शिकंजे में रहने को लेकर अलर्ट किया गया था. सूत्रों ने इस बात से इनकार किया था कि इसमें प्रशासन का कोई हाथ है.

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First published: November 1, 2019, 8:56 AM IST
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