कोरोना की दूसरी लहर, कितने सुरक्षित हैं हम?

कोरोना की दूसरी लहर के बाद शहरों से लोग गांव लौटने लगे हैं. (AP)

कोरोना की दूसरी लहर के बाद शहरों से लोग गांव लौटने लगे हैं. (AP)

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने पहले ही इस विषय में लोगों को जागरुक किया था कि कोरोना एक बार में नहीं धीरे-धीरे खत्म होगा. कई तथ्यों के आधार पर हर्ड इम्युनिटी की भी बात कही गई थी, पर सभी कयास वक़्त के साथ बदलते गए. आज भारतवर्ष कोरोना की दूसरी लहर यानी सेकेंड वेव से जूझ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 10:19 AM IST
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नई दिल्ली. पिछले कुछ महीने कोरोना मामलों की कमी के थे. कोरोना के केस रोज घट रहे थे और जिंदगी पटरी पर लौट रही थी. सब कुछ वापस सामान्य हो रहा था. लेकिन महज हफ्ते-दस दिन के आंकड़ों ने सब कुछ अव्यवस्थित कर दिया है. कोरोना मामलों में अचानक वृद्धि के कारण सार्वजनिक जीवन में फिर से मुश्किल स्थिति बन गई है. हालात है कि पिछले 4 दिन से रोजाना एक लाख से अधिक कोरोना केस सामने आ रहे हैं.

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने पहले ही इस विषय में लोगों को जागरुक किया था कि कोरोना एक बार में नहीं धीरे-धीरे खत्म होगा. कई तथ्यों के आधार पर हर्ड इम्युनिटी की भी बात कही गई थी, पर सभी कयास वक़्त के साथ बदलते गए. आज भारतवर्ष कोरोना की दूसरी लहर यानी सेकेंड वेव से जूझ रहा है. पिछले एक हफ्ते में कोरोना मामलों में भारी उछाल आया है. अब तक का सर्वाधिक, एक ही दिन में 1 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं. मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. गुलेरिया के मुताबिक स्तिथि अभी भी हमारे ही नियंत्रण में है. महाराष्ट्र, दिल्ली, केरल, पंजाब, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और मध्य प्रदेश उन राज्यों में से हैं, जहां से 80 प्रतिशत कोरोना मामले सामने आ रहे हैं. भारत अपनी बनाई गई वैक्सीन से दूसरे देशों की मदद कर रहा है, मगर हाल ही में महाराष्ट्र में वैक्सीन की कमी का मामला सामने आया है. आशा है भारत सरकार देशवासियों को प्राथमिकता देते हुए उचित कदम उठाएगी.

राजधानी दिल्ली में कोविड केयर हॉस्पिटल्स में फिर से बेड की किल्लत होनी शुरू हो गई है. सभी प्राइवेट हॉस्पिटल्स में 30% कैपेसिटी सिर्फ और सिर्फ कोविड मरीजों के लिए निरक्षित किए जाने का प्रबंध किया गया है. सरकार द्वारा 1 जनवरी 2021 से भारत में बनी वैक्सीन, कोविशील्ड और कोवैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई थी और तब से अब तक करीबन करोड़ों लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है. यह आंकड़ा अपने आप में ही एक नई मिसाल है और भारत ऐसा देश बन गया है जहां वैक्सीनेशन बाकी देशों की तुलना में सबसे अधिक तेज़ चल रहा है.

कोरोना वायरस ने पिछले साल इस वक़्त सारी दुनिया में कोहराम मचाया हुआ था. तब और अब में एक बहुत बड़ा अंतर यह है कि पिछले एक साल से इस बीमारी से लड़ते हुए हमने इस से निपटने के तरीकों को भली-भांति सीख लिया है और साथ ही सही समय पर सही कदम उठाने का महत्व भी हम जानते है. पिछले साल तक ये बीमारी भी नई थी और इसके प्रभावों से भी हम पूर्णतः अनभिज्ञ थे. जिसके कारण सामान्य जनता में इस बीमारी का खौफ और इस से जुड़ी कई उलटी-सीधी अफवाह पैर पसार रही थी.
मगर इस बार ऐसा नहीं है, इस बार हम पहले से काफी अधिक जागरूक हैं और इस बीमारी से बचने के सभी तरीकों से अवगत हैं. पिछले साल, इस बीमारी और लॉकडाउन के कारण, हमने परिवार, स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, बचत, पोषक तत्व, संतुलित भोजन, सैयमित जीवन और व्यायाम के महत्व के बारे में बहुत कुछ सीखा है. हमने जीवन की अनिश्चितता और प्रियजनों की निकटता का जायजा लिया. कोरोना की सेकेंड वेव कितनी भी तीव्र क्यों न हो, पर हमने इस से लड़ना और बचाव करना सीख लिया है. हम सबको जागरूक बने रहना है. सब सतर्क रहें, वैक्सीनेशन कराएं और हाँ सामाजिक दूरी बनाए रखें. क्योंकि दो गज दूरी और मास्क, रहेगा जरूरी. (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)
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