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महामारी के दौर में विकसित देश छोड़ें अपनी जिद: ओमिक्रॉन के खतरे के बीच वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार में छूट की जरुरत

महामारी के दौर में विकसित देश छोड़ें अपनी जिद: ओमिक्रॉन के खतरे के बीच वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार में छूट की जरुरत

महामारी के दौर में विकसित देश छोड़ें अपनी जिद: ओमिक्रॉन के खतरे के बीच वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार में छूट की जरुरत (Pic- AP)

महामारी के दौर में विकसित देश छोड़ें अपनी जिद: ओमिक्रॉन के खतरे के बीच वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार में छूट की जरुरत (Pic- AP)

India and South Africa demands TRIPS Waiver Amid Omicron Threat: ओमिक्रॉन वेरिएंट के बढ़ते खतरे के बीच भारत और दक्षिण अफ्रीका वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकारों में छूट दिए जाने के प्रस्ताव को लेकर लगातार वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के संपर्क में है. दरअसल कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए कोविड-19 वैक्सीन सामान्य रूप से सभी देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध हो इसके लिए जरूरी है कि ट्रिप्स एग्रीमेंट में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और पेंटेंट कानून को लेकर छूट मिले. ताकि वैक्सीन जैसे जीवनरक्षक उत्पादों से बौद्धिक संपदा अधिकार को हटाया जा सके.

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    वॉशिंगटन, नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) के बढ़ते खतरे के बीच कोविड-19 केसों में बढ़ोतरी व ट्रैवल बैन के चलते विश्व व्यापार संगठन ने अपनी बैठक को रद्द कर दिया है. लेकिन भारत (India) और दक्षिण अफ्रीका (South Africa) वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकारों में छूट दिए जाने के प्रस्ताव को लेकर लगातार वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (World Trade Organization) के संपर्क में है. एक रिपोर्ट से इस बात की जानकारी मिली है. दरअसल कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) सामान्य रूप से सभी देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध हो इसके लिए जरूरी है कि ट्रिप्स एग्रीमेंट (TRIPS Agreement) में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और पेंटेंट कानून को लेकर छूट मिले. ताकि वैक्सीन जैसे जीवनरक्षक उत्पादों से बौद्धिक संपदा अधिकार को हटाया जा सके. इसका परिणाम यह होगा कि पेटेंट और लाइसेंस की अनिवार्यता के बगैर छोटे और कम आय वाले देशों कोरोना वैक्सीन के निर्माण में तेजी आ सके.

    भारत, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया ने व्यापार से संबंधित मामलों में बौद्धिक संपदा अधिकार को लेकर विश्व व्यापार संगठन से एग्रीमेंट के कुछ प्रावधानों में छूट देने की मांग की है. ताकि महामारी के इस दौर में सभी नागरिकों को किफायती दर पर आसानी से वैक्सीन मिल सके. हालांकि दिग्गज फॉर्मा कंपनी और यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन और स्विटजरलैंड जैसे उच्च आय वाले देश इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं जिसकी वजह से यह प्रस्ताव पिछले एक साल से अटका हुआ है और इस कारण से महामारी से मुकाबला बड़ी चुनौती बन गया है. इसलिए वैश्विक टीकाकरण और कोविड इंफ्रास्ट्रक्चर की जरुरतों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ताकि इस महामारी पर नियंत्रण पाया जा सके.

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    रिपोर्ट के अनुसार, इस नए प्रस्ताव में बौद्धिक संपदा अधिकार समझौते को लेकर ट्रीप्स एग्रीमेंट के सेक्शन 1, 4, 5 और 7 के पार्ट 2 में छूट की मांग की गई है. इसमें कॉपी राइट, इंडस्ट्रियल डिजाइन, पेटेंट्स औ गोपनीय सूचनाएं (ट्रेड सीक्रेट) शामिल हैं. इस प्रपोजल में शामिल मांगों पर छूट मिलने से वैक्सीन निर्माण को लेकर विकासशील देशों की राह आसान होगी. घरेलू दवा निर्माता पेटेंट प्रॉडक्ट्स का निर्माण करके उन्हें बेच सकेंगे. इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडने ने

    कोविड-19 वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकारों में छूट देने के भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का समर्थन करने पर सहमति जताई थी.

    ट्रिप्स एग्रीमेंट के तहत मांगी गई यह छूट हेल्थ प्रॉडक्ट्स और टेक्नोलॉजी पर भी लागू होगी, जिससे कोविड-19 की रोकथाम, ट्रीटमेंट और इलाज में मदद मिलेगी. वैक्सीन समेत अन्य मेडिकल प्रॉडक्ट्स और प्रकरण का निर्माण आसान होगा. यह प्रस्तावित रियायत 3 साल के लिए प्रभावी होगी और विश्व व्यापार संगठन परिषद हर साल इसकी समीक्षा करेगा और 3 वर्ष बाद अंतिम समीक्षा के दौरान यह तय किया जाएगा कि विषम परिस्थितियों में क्या इसे और आगे बढ़ाना चाहिए.

    इन रियायतों का विरोध क्यों?

    विश्व की दिग्गज फॉर्मा कंपनियां और कुछ छोटे व संपन्न देश इन रियायतों को दिए जाने का विरोध कर रहे हैं. उनका दावा है कि इस कदम से उनकी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन प्रभावित होंगे. यूरोपियन कमीशन के अनुसार, इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) वैक्सीन या अन्य हेल्थ प्रॉडक्ट्स का निर्माण बढ़ाने में कोई रूकावट नहीं डालता है और ऐसा भी नहीं है कि आईपी साझा करने से उत्पादन तुरंत तेजी आएगी.

    इन तर्कों में कितना दम, आगे की राह क्या होगी?

    ट्रिप्स एग्रीमेंट में छूट दिए जाने को लेकर यूरोपियन यूनियन के जवाब में, ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि, बांग्लादेश, कनाडा, डेनमार्क और इजरायल के पास पर्याप्त कोविड-19 वैक्सीन और अन्य हेल्थ प्रॉडक्ट्स के निर्माण करने की क्षमता है लेकिन जरूरी लाइसेंस के अभाव में ये देश ऐसा करने में असमर्थ हैं. इसके लिए जरूरी है कि वैक्सीन और स्वास्थ्य उत्पादों से बौद्धिक संपदा अधिकार के कुछ प्रावधानों में छूट दी जाए ताकि इन देशों में वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग तेज गति से हो सके.

    Tags: Corona, Covid-19 Case, Omicron variant

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