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    हमारे सोते हुए निहत्‍थे जवानों पर किया था हमला, सर्जिकल स्ट्राइक से दिया था जवाब

     प्रतीकात्मक फोटो
    प्रतीकात्मक फोटो

    28-29 सितंबर 2016 को की गई सर्जिकल स्ट्राइक में 70 आतंकियों को उन्हीं के कैंप में किया था भारतीय सेना ने ढेर

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    साल 2016  में 17 सितंबर का दिऩ था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. जम्मू-कश्मीर के उरी इलाके में सेना ब्रिगेड के हेडक्वार्टर पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया. वे भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहन कर घुसे और सुबह 5.30 बजे सोते हुए निहत्‍थे हमारे जवानों पर बम और गोलियां बरसाईं. इस दौरान 19 जवान शहीद हो गए, वहीं 17 गंभीर रूप से घायल हुए. इस घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया, साथ ही केंद्र सरकार पर कार्रवाई का बड़ा दबाव बना. देश ने इसका जवाब देने की सोची और तैयारी शुरू हुई सर्जिकल स्ट्राइक की.

    24 सितंबर को शुरू हुई प्लानिंग
    सरकार के आदेश के बाद सेना ने 24 सितंबर को ही सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी शुरू कर दी. इसके लिए 30 स्पेशल कमांडोज का चयन किया गया. टेवोर 47, एके 47, अन्य असॉल्ट राइफल, रॉकेट ग्रेनेड, नाइट विजन ग्लासेज, शोल्डर फायर्ड मिसाइल्स और अन्य हथियारों से लैस इन जवानों को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को खत्म करना था. इस दौरान इन सभी जवानों को एक ट्रेनिंग से गुजरना था, इसके लिए उनके पास केवल सात दिन का समय था.

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    और फिर आया वह दिन जब दिया करारा जवाब


    उरी में हुए हमले का जवाब देने का मौका भारतीय सेना को 11 दिन बाद मिला. 28-29 सितंबर की रात को 35 हजार फीट की ऊंचाई पर हेलिकॉप्टरों में बैठे ये जवान इतनी शांति से पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में उतरे कि किसी को कानों कान खबर नहीं हुई. इसके बाद वे टीमों में बंटकर आतंकियों के ठिकानों पर पहुंचे और हमला कर दिया. इस दौरान भारतीय सेना के जवानों ने इन आतंकी कैंपों को पूरी तरह से खत्म कर दिया. इस हमले में लगभग 70 आतंकियों को मौत के घाट उतारा गया. हालांकि इस संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी.

    सभी जवान वापस लौटे
    इस मिशन में सबसे बड़ा खतरा था कि यदि कोई भी जवान शहीद होता है तो उसे वापस नहीं लाया जा सकेगा. साथ ही किसी भी ऐसी स्थिति में जब जवान पीओके में फंस जाते हैं तो उनको कोई मदद नहीं मिलने वाली थी. लेकिन इन सभी कमांडोज ने जांबाजी दिखाई और मिशन पूरा कर सभी सकुशल वापस लौटे.

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    27 जून को की घोषणा
    सरकार ने इस सर्जिकल स्ट्राइक को सुरक्षा कारणों के चलते सार्वजनिक नहीं किया. बाद में 27 जून को केंद्र ने इसकी घोषणा की और मीडिया में इस स्ट्राइक से संबंधित वीडियो फुटेज भी उपलब्‍ध करवाए.

    बौखलाया पाक
    इस घोषणा के बाद पाकिस्तान बौखला गया और कहा कि भारत झूठ बोल रहा है. पीओके में कोई आतंकी कैंप नहीं थे. न ही कोई सर्जिकल स्ट्राइक की गई. पाकिस्तान ने कहा कि इस दौरान केवल सीमा पर दोनों तरफ से गोलीबारी होती रही, लेकिन जैसा भारत कह रहा है वैसा कुछ भी नहीं हुआ.

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