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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा: भारत-बांग्लादेश रेलवे लाइन का काम 2021 तक होगा पूरा

News18Hindi
Updated: February 10, 2020, 10:24 AM IST
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा: भारत-बांग्लादेश रेलवे लाइन का काम 2021 तक होगा पूरा
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) ने कहा कि 15.6 किमी लंबी रेलवे लिंक बांग्लादेश में गंगासागर को भारत के निश्चिन्तपुर (10.6 किमी) और निश्चिन्तपुर से अगरतला रेलवे स्टेशन (5.46 किलोमीटर) को जोड़ेगी. जिसका काम 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है.

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  • Last Updated: February 10, 2020, 10:24 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) ने रविवार को कहा कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से बांग्लादेश (Bangladesh) को जोड़ने वाली रेलवे लाइन का काम वर्ष 2021 के अंत तक पूरा हो जाएगा. सिंह ने कहा कि जब त्रिपुरा में अगरतला (Agartala) और बांग्लादेश में अखौरा (Akhaura) के बीच रेलवे लाइन का निर्माण पूरा हो जाएगा तो 2022 में पूर्वोत्तर से बांग्लादेश तक पहली ट्रेन चलाने का मार्ग भी खुल जाएगा.

दो हिस्से में होगा काम
पूर्वोत्तर में कुछ आगामी परियोजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि 15.6 किमी लंबी रेलवे लिंक बांग्लादेश में गंगासागर को भारत के निश्चिन्तपुर (10.6 किमी) और निश्चिन्तपुर से अगरतला रेलवे स्टेशन (5.46 किलोमीटर) को जोड़ेगी. भारतीय हिस्से में 5.46 किमी रेलवे लाइन बिछाने का खर्च उनका मंत्रालय वहन करेगा जबकि बांग्लादेश में 10.6 किमी रेलवे लाइन बिछाने का खर्च विदेश मंत्रालय वहन करेगा.

भारत में चल रहा काम तेजी से

सिंह ने कहा, भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है और यह जमीन इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के उप मुख्य अभियंता रमन सिंगला को सौंप दी गई है. भारतीय पक्ष में काम तेजी से चल रहा है और हम इसे सितंबर 2021 से पहले पूरा करने की उम्मीद करते हैं. भारतीय पक्ष में भारत-बांग्ला रेलवे कार्य के लिए 580 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.

नई टेक्नोलॉजी का कर रहे उपयोग
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट महात्मे एन संदीप ने पुष्टि की कि मंत्रालय ने सितंबर, 2021 तक रेलवे परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा है. उन्होंने बताया कि भारतीय पक्ष में मिट्टी की स्थिति नरम है इसलिए नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. इरकॉन के अधिकारियों ने कहा कि इरकॉन के 30 इंजीनियरों की देखरेख में लगभग 600 कुशल श्रमिकों को पूरा करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं.ये भी पढ़ें: कोलकाता पुस्तक मेले में पुलिस ने वीएचपी को 'हनुमान चालीसा' बांटने से रोका

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First published: February 10, 2020, 9:05 AM IST
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