चीन को सबक सिखाने के लिए भारत ने उठाया ये बड़ा कदम

चीन को सबक सिखाने के लिए भारत ने उठाया ये बड़ा कदम
चीन को साधने के लिए भारत ने पड़ोसियों के साथ संबंधों को दी तेजी (फाइल फोटो)

भारत (India) की नई कोशिश के पीछे एक बड़ी वजह है. इन देशों में चीन (China) के दखल को साधने और LAC विवाद के बीच पाकिस्तान को छोड़कर बाकी पड़ोसियों से रिश्ते बेहतर करना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 6:45 PM IST
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नई दिल्ली. चीन (China) से सीमा विवाद के बीच भारत ने अपने पड़ोसी देशों से संम्बंधों को नई दिशा देने का काम शुरू कर दिया है. भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला का दो दिवसीय बांग्लादेश दौरा, मालदीव के प्रोजेक्ट में भारतीय मदद, भारतीय प्रधानमंत्री मोदी (PM Narendra Modi) की श्रीलंका और नेपाल के प्रधानमंत्री से बातचीत इसी का नतीजा है. पड़ोसियों को लेकर भारत की गंभीरता अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोरोना काल में भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला को पीएम मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के पास संदेश के साथ भेजा. शेख हसीना और भारतीय विदेश सचिव के बीच तमाम प्रोजेक्ट और मसलों पर बातचीत हुई जो दोनों देशों के रिश्तों की बेहतरी के लिए ज़रूरी है. विदेश सचिव का दौरा ऐसे वक्त में हुआ जब बांगलदेश कि मीडिया में ऐसी खबर आई कि तीस्ता प्रोजेक्ट के लिए चीन एक बिलियन डॉलर मदद करने वाला है.

उधर, नेपाल (Nepal) में चीन के बढ़ते दखल और लिपुलेख सीमा विवाद के बीच पिछले कुछ महीनों से ठंडे पड़े रिश्ते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद गति दी. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नेपाली प्रधानमंत्री ओली की तरफ से फोन आने के बाद दोनों नेताओं ने लगभग 10 मिनट बात की. इसके बाद 17 अगस्त को 9 महीने बाद दोनों देशों के राजनायिकों की बैठक हुई. जिसमें भारत की मदद से चल रहे तमाम प्रोजेक्ट पर चर्चा के साथ-साथ इन्हें गति देने पर भी दोनों देश सहमत हुए.

श्रीलंका
भारत-चीन सीमा विवाद के बीच श्रीलंका का झुकाव भारत की तरफ रहे और चीन का दबदबा सीमित हो, इसके लिए खुद पीएम मोदी ने सबसे पहले महिंदा राजपक्षे को फोन कर बधाई दी. कर्ज़ भुगतान से जुड़ी श्रीलंका की मांग को भारत मान चुका है और सामरिक सुरक्षा के मसले पर श्रीलंका कह चुका है कि भारत फर्स्ट है. बतौर राष्ट्रपति पद पर रहते हुए महिंदा राजपक्षे का रूख चीन की तरफ ज्यादा दिखा था, लेकिन आर्थिक और निवेश के मोर्चे पर श्रीलंका भारत और चीन के लिए खुला हुआ है. ऐसे में चुनावी जीत पर प्रधानमंत्री के महिंदा राजपक्षे को किए फोन से ये साफ हो गया कि चीन से मौजूदा विवाद में भारत के लिए पड़ोसी पहले हैं सिर्फ पाकिस्तान और खुद चीन को छोड़कर.
भूटान


चीन से मौजूदा हालात में भारत ने भूटान से भी संबधों को तेज करने की कोशिश की है. भारत ने भूटान से रेलवे कनेक्टिविटी की कोशिश को तेज किया है ताकि आने वाले समय में व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके. भारत ने कोरोना काल में कुछ ट्रेड रूट को खोलने का भूटान का अनुरोध भी मान लिया है.

म्यांमार
इस बीच चीन से म्यांमार की नाराजगी को देखते हुए भारत म्यांमार से भी संम्बंधों को नया आयाम दे सकता है. विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला म्यांमार का दौरा कर सकते हैं. म्यांमार कई प्रोजेक्ट में चीन के रवैये से नाराज है और चाहता है कि कई प्रोजेक्ट में भारत की भूमिका बढ़े.

मालदीव
13 अगस्त को भारत और मालदीव के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारत ने मालदीव के ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर मदद की घोषणा की है और 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण के तौर पर देने की घोषणा की साथ ही साथ मालदीव ऐसा पहला पड़ोसी देश था जिसके साथ भारत ने एयर ट्रैवल बब्बल के लिये राजी हुआ है. मालदीव में चीन के निवेश के मद्देनजर भारत की हाल की कई घोषणाएं महत्वपूर्ण है. हालांकि बाकी पड़ोसी देशों से अलग मालदीव का झुकाव भारत की ओर ही रहा है.

भारत की नई कोशिश के पीछे एक बड़ी वजह है. इन देशों में चीन के दखल को साधने और LAC विवाद के बीच पाकिस्तान को छोड़कर बाकी पड़ोसियों से रिश्ते बेहतर करना है.
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