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निगरानी के लिए भारत इजराइल से खरीदेगा 4 हेरोन टीपी ड्रोन, मिसाइल चलाने के लिए भी आएगा काम

प्रोजेक्ट चीता के तहत सटीक हमलों के लिए इसे मिसाइल से लैस किया जाएगा. . (AP)

प्रोजेक्ट चीता के तहत सटीक हमलों के लिए इसे मिसाइल से लैस किया जाएगा. . (AP)

India-Israel Business Ties: पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनरल एटोमिक्स के सीईओ विवेक लाल से मुलाकात की, जिनकी कंपनी सशस्त्र शिकारी ड्रोन का निर्माण करती है. सूत्रों का कहना है कि सौदे को अंतिम रूप देने से पहले अमेरिका के साथ तकनीक के हस्तांतरण पर चर्चा होगी.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. भारत ने इज़राइल से 4 नए हेरोन टीपी ड्रोन खरीदने के सौदे को अंतिम रूप दे दिया है. न्यूज 18को मिली जानकारी के अनुसार, शुरूआती में इनका इस्तेमाल निगरानी और मिशन की टोह लेने में किया जाएगा, लेकिन आगे चलकर प्रोजेक्ट चीता के तहत सटीक हमलों के लिए इसे मिसाइल से लैस किया जाएगा. रक्षा सूत्रों का कहना है कि ड्रोन को लेकर सौदा तय हो चुका है और वे साल के अंत तक आ जाएंगे. सूत्रों ने बताया कि शुरुआत में इसे इज़राइल से लीज पर लेने की योजना थी, लेकिन बाद में भारत ने इसे खरीदने का फैसला लिया.

    जब प्रोजेक्ट चीता को अंतिम रूप दिया गया तो मीडियम एल्टिट्यूड लॉंन्ग एंड्यूरेंस ( मेल) यानि मध्यम ऊंचाई लंबी स्थिरता वाला हेरोन टीपी यूएवी थल, जल और वायु सेना के शस्त्रागार का हिस्सा बन गया, जो ना सिर्फ आधुनिक सेटेलाइट संचार और लंबी दूरी की निगरानी वाले सेंसर और टोही मिशन से उन्नत किया जा सकेगा बल्कि हवा से ज़मीन पर मारने वाली मिसाइल और सटीक हमलों के लिए लेजर निर्देशित शस्त्रों से सुसज्जित होगा.

    कुछ हेरोन टीपी यूएवी तो करीब 24 घंटे तक चलने और 1000 किमी तक संचार करने की क्षमता तक उन्नत किया जा सकता है.

    भारत, अमेरिका से हाई एल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्युरेंश (हेल) यानि ज्यादा ऊंचाई लंबी स्थिरता वाले सशस्त्र ड्रोन 30 MQ-9B खरीदने का मन बना रहा है. जो तीनो रक्षा सेवाओं को 10-10 प्रदान किए जाएंगे. इनकी लागत करीब 300 करोड़ डॉलर आएगी.

    पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनरल एटोमिक्स के सीईओ विवेक लाल से मुलाकात की, जिनकी कंपनी सशस्त्र शिकारी ड्रोन का निर्माण करती है. सूत्रों का कहना है कि सौदे को अंतिम रूप देने से पहले अमेरिका के साथ तकनीक के हस्तांतरण पर चर्चा होगी.

    उधर जलसेना हिंद महासागर की निगरानी के लिए जनरल एटोमिक्स से पहले ही दो MQ-9B समुद्री संरक्षक ड्रोन को लीज पर ले चुकी है.

    भारत लेगा ड्रोन की व्यापक श्रंखला
    ये खरीद की बात तब सामने आई है जब भारतीय सेना अपनी ड्रोन के जखीरे को बढ़ाने पर काम कर रही है. तीनों सेवाएं विभिन्न श्रेणी के बगैर हथियार के ड्रोन की खरीद कर रही है, साथ ही काउंटर ड्रोन सिस्टम पर भी काम चल रहा है.

    मसलन थल सेना अकेले ही बगैर हथियार वाले 100 ड्रोन खरीद रही है. विभिन्न श्रेणी के यह ड्रोन निगरानी के उद्देश्य से लिय़े जा रहे हैं. इनमें से ज्यादातर स्वदेशी कंपनियों में तैयार हुए हैं. दो भारतीय कंपनियों राफे एफिब्र और न्यू स्पेस टेक्नोलॉजी से कई सारे सूक्ष्म और लघु यूएवी स्वेदेशी ड्रोन खरीदे जा रहे है जिनमें 200 स्वार्म ड्रोन भी शामिल हैं. रक्षा सूत्रों के मुताबिक इसके साथ ही कंपनी मालवाहक ड्रोन भी मुहैया करवा रही है जो ज्यादा ऊंचाई पर एक तरफ 10 किमी तक 20 किलो वजन ले जा सकता है.

    इस महीने की शुरुआता में सेना ने 100 विस्फोटक ले जाने वाले ड्रोन स्कायस्ट्राइकर की खरीद के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, ये ड्रोन बंगलुरू स्थित इजराइल की एलबिट सिस्टम और भारत की अल्फा डिजाइन के संयुक्त उद्यम से तैयार किया जाएगा.

    सेना ने इस साल की शुरूआत में अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में ऑपरेशन की निगरानी के लिए स्विच यूएवी के लिए आईडिया फोर्ज के साथ 2 करोड़ डॉलर का सौदा तय किया था. रक्षा सूत्रों के मुताबिक जल सेना घरेलू कंपनियों से करीब एक दर्जन जहाज पर तैनात होने वाले ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है. वहीं वायु सेना भी स्वार्म ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया में लगी हुई है.

    रक्षा सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि तीनों सेवाएं आपातकालीन कोष से 500 से ज्यादा ड्रोन खरीदने जा रही है. इनमें से 300 से ज्यादा ड्रोन अकेले थल सेना खरीदने वाली है.

    रक्षा सूत्र की विभिन्न कमान भी सीमित निगरानी मिशन में इस्तेमाल होने वाले माइक्रो ड्रोन को स्थानीय फंड की मदद से खरीदने की प्रक्रिया कर रही है. मसलन थल सेना की उत्तरी कमान ने निगरानी रखने वाली यूएवी की जानकारी के लिए आवेदन प्रकाशित किया है.

    काउंटर ड्रोन सिस्टम भी सूची में
    अपनी आपातकालीन खरीद के हिस्से के रूप में सेना करीब घरेलू कंपनियों से 100 मेनपोर्टेबल काउंटर ड्रोन सिस्टम, इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन और इंटरडिक्शन सिस्टम भी खरीद रही है. सेना बंगलुरू स्थित डेफसिस सॉल्यूशन से काउंटर ड्रोन सिस्टम भी खरीदने जा रही है.

    रक्षा मंत्रालय के मुताबिक जल सेना ने एक स्वदेशी व्यापक नेवल एंटी ड्रोन सिस्टम (एनएडीएस) जिसमें हार्ड किल और सॉफ्ट किल दोनों विशेषताएं हैं, उसके लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं. वहीं वायु सेना ने भी हैदराबाद की ज़ेन टेक्नोलॉजी को एंटी ड्रोन सिस्टम की आपूर्ती के लिए 155 करोड़ का ऑर्डर दिया है.

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