भारत-चीन विवाद: पैंगाग-देपसांग से चीनी सेना की पूरी तरह वापसी अब बातचीत का सबसे बडा मुद्दा

भारत-चीन विवाद: पैंगाग-देपसांग से चीनी सेना की पूरी तरह वापसी अब बातचीत का सबसे बडा मुद्दा
सूत्रों की मानें तो चीन डिस्एंगेजमेंट को तो राज़ी है, लेकिन डीएस्किलेशन के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है.

बताया जा रहा है कि चीन ने देपसांग इलाके में अपनी टैंक की तीन रेजिमेंट तैनात की हुई है, जबकि कुल 150 से ज़्यादा आर्टेलरी तोपों की तैनाती की गई है, जो 15 अलग-अलग जगह पर तैनात है. हर जगह 8 से 15 तोपें है और सहमति के तहत उन्हें भी चीन को उन इलाकों से हटाना था, लेकिन वो अभी तक नहीं हटाई गई.

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श्रीनगर. भारत-चीन (India-China Border Tension) के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर फिलहाल तनाव कम है. 6 जून की बैठक में जो दोनों देशों के बीच बनी सहमति बनी, उसका पहला चरण पूरा हो गया. दोनों देशों की सेना एलएसी के उन इलाकों से पीछे हो गई, जहां तकरीबन ढाई महीने से आमने-सामने थी. गलवान गोगरा हॉट स्प्रिंग से चीनी सेना एक से दो किलोमीटर पीछे गई, तो लंबे अर्से से विवादों का कारण रही पैंगॉन्ग लेक से भी चीन ने अपनी सेना को पीछे कर लिया. अब चौथी बैठक में अगले चरण पर बात होगी.

भारत की तरफ से ये साफ किया जा चुका है कि चीन को अप्रैल की स्थिति पर लौटना होगा. माना ये जा रहा है कि चीन ने इन विवाद वाले इलाकों के पीछे जो सेना, टैंक, आर्टेलरी गन, बख्तरबंद गाड़ियां और एयर डिफ़ेंस मिसाइल सिस्टम तैनात की है, उसे भी अब हटाना होगा. सूत्रों की मानें तो चीन ने पिछले 3 महीनों में इस्टर्न लद्दाख इलाके में फिलहाल 6 बेस हैं, जिनमें से चार नए सैन्य बेस तैयार किए हैं. इनमें एक PP-14 के ठीक पीछे वाले इलाके में है. एक पैंन्गॉग में, एक डेमचॉक और 2 देपसांग और एक खुरनाख फ़ोर्ट के पास है.

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बताया जा रहा है कि चीन ने देपसांग इलाके में अपनी टैंक की तीन रेजिमेंट तैनात की हुई है, जबकि कुल 150 से ज़्यादा आर्टेलरी तोपों की तैनाती की गई है, जो 15 अलग-अलग जगह पर तैनात है. हर जगह 8 से 15 तोपें है और सहमति के तहत उन्हें भी चीन को उन इलाकों से हटाना था, लेकिन वो अभी तक नहीं हटाई गई.
सूत्रों की मानें तो चीन डिस्एंगेजमेंट को तो राज़ी है, लेकिन डीएस्किलेशन के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है. वो अपने सेना साजो-सामान की तैनाती को फिलहाल कम न करने पर अड़ा हुआ है. इस बैठक में दो मुद्दों पर सबसे ज़्यादा चर्चा होगी कि एक तो सीमा पर तनाव न हो और आपसी सहमति से सेना को पीछे करने की कार्रवाई जारी रहे. दूसरा पैंगॉन्ग लेक पर चीन को वापस फ़िंगर 8 के पीछे जाने के लिए दबाव बनाया जाएगा.

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दरअसल, पहले जो चीनी पीएलए फ़िंगर 8 के पीछे होती थी मई के शुरुआती हफ्ते में वो भारतीय इलाके में फ़िंगर 4 पर आ डटी थी. तीन बार कोर कमांडर स्तर के बाद चीनी सेना ने अपने सैनिकों को फ़िंगर चार से फ़िंगर 5 पर हटा दिया. जानकारों की मानें, तो वो फ़िंगर पांच के पीछे जाने को क़तई तैयार नहीं हो रहा है. भारतीय सेना को भी फ़िंगर 4 से पीछे हटकर फ़िंगर 3 तक आना पड़ा.
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