Exclusive: सिक्किम पुलिस बनीं भारतीय सेना का सपोर्ट सिस्टम, हर मूमेंट पर है नजर

जरूरत का सामान जल्द नाथुला पास या अन्य इलाकों तक पहुंचे ये सिक्किम पुलिस की प्राथमिकता होती है.
जरूरत का सामान जल्द नाथुला पास या अन्य इलाकों तक पहुंचे ये सिक्किम पुलिस की प्राथमिकता होती है.

India-China border tension: सिक्किम पुलिस में तैनात पेमा ने न्यूज18 इंडिया से खास बातचीत में कहा, भारत-चीन विवाद सामने आने के बाद हम बहुत ज्यादा सतर्क हो गए हैं और मैं भी देश की सरहद पर जाना चाहती हूं और ड्यूटी देना चाहती हूं, मैं चाहती हूं कि जल्द से जल्द मेरी वहां पर तैनाती हो और सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने देश की रक्षा कर सकूं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2020, 10:32 PM IST
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नार्थ सिक्कि (North Sikkim)म का युंगचांग, गुरुधर्मा, लाचुम या फिर ईस्ट सिक्किम का छांगू लेक, नाथुला पास का इलाका है. इन तक पहुंचने के जो दुर्गम रास्ते हैं उसका सफर न्यूज18 इंडिया ने सिक्किम पुलिस (Sikkim Police) के साथ किया. जिन रास्तों से सेना के वाहनों की आवाजाही होती है उन्हें तीन जोन में बांटा गया है सड़क,चौराहा और पुल. भारत चीन सीमा के रास्तों में ये मौजूद रहते हैं वहां कैसे भारतीय सेना का बेरोकटोक आवाजाही करे इसका एक पुख्ता प्लान तैयार किया गया है.

सिक्किम पुलिस की महिला पुलिसकर्मी पेमा ने न्यूज18 इंडिया से बातचीत में कहा कि भारत-चीन विवाद के बाद वह भी सीमा पर तैनात होना चाहती है. पेमा शेरपा सिक्किम पुलिस में तैनात है और मौजूदा समय में वो सिक्किम के सिंग्टम इलाके में तैनात है. इसी जगह से सीमा के नार्थ सिक्किम गुरुधर्मा, लाचुंग और ईस्ट सिक्किम नाथुला पास छांगू लेक को रास्ता जाता है.

सेना का सफर आसान बनाते है सिक्किम पुलिस
यहीं से सेना और सुरक्षाबल और उनके वाहन भारत-चीन सीमा पर जाते हैं. भारत-चीन विवाद सामने आने के बाद रास्ते पर सेना और अन्य सुरक्षा बलों वाहनों की आवाजाही बहुत ज्यादा बढ़ गई है. पेमा की पैनी नजर हमेशा ऐसे वाहनों को फ्री मूवमेंट देने की रहती है. पेमा और और उनकी टीम के लोग जी जान लगा देते हैं कि सेना के वाहन और सेना के लोगों को को इन रास्तों से गुजरने में किसी तरह की कोई परेशानी न हो. न्यूज18 इंडिया की टीम ने पेमा के साथ पैदल कठिन रास्तों का सफर किया और समझा किन परिस्थितियों में सेना का सफर इनकी मदद से आसान होता है.
कैसे होती है सेना की गाड़ियों की पहचान?


पेमा का कहना है कि इस वक्त कोरोना वायरस के कारण ऑड ईवन की व्यवस्था है. गाड़ियों की सघन चेकिंग करनी पड़ती, लेकिन जैसे ही हमें सेना की गाड़ी मिलती है हम उसको तुरंत रास्ता दे देते हैं. उन्होंने बताया कि सेना की गाड़ियों के पास एक खास तरह की परमिट होता है, जिसे देखते ही पहले रास्ता दिया जाता है. इसके अलावा जब कभी भी सेना के वाहनों में कुछ तकनीकी खराबी आ जाती है इस रास्ते पर तो तुरंत हमारी टीम आती है और इस खामी को दूर करती है.

पेमा ने कहा, भारत-चीन विवाद सामने आने के बाद हम बहुत ज्यादा सतर्क हो गए हैं और मैं भी देश की सरहद पर जाना चाहती हूं और ड्यूटी देना चाहती हूं, मैं चाहती हूं कि जल्द से जल्द मेरी वहां पर तैनाती हो और सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने देश की रक्षा कर सकूं.

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हर दौर में भारतीय सेना के साथ मिलाती है कदम
न्यूज़18इंडिया की टीम पहुंची नेशनल हाईवे 10 के दुर्गम इलाकों में जहां पर कुछ दिनों पहले ही लैंडस्लाइड हुआ था. सिक्किम पुलिस के जवान ने हमारे साथ सफर किया कुछ दुर्गम रास्ते और बताए कि कैसे उन रास्तों को क्लियर किया जाता है जहां से सेना के वाहन गुजरते हैं. हमारी टीम में उनके साथ चेकपोस्ट से लेकर मलबे की जगह तक का करीब 4 किलोमीटर तक का सफर तय किया. उनका कहना है, 'इस वक्त कोविड-19 है और हमें सख्त इंस्ट्रक्शन मिले हैं हम हर वाहनों की चेकिंग करें, लेकिन सेना के जब वाहन गुजरते हैं तो उनके साथ हम रियायत बरतते हैं और उन्हें जाने देते हैं.'

उन्होंने कहा, पूर्वी लद्दाख में हुए संघर्ष के बाद भारत-चीन के बीच तनातनी होने की वजह से सेना की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं. जिसके कारण गाड़ियों की आवाजाही भी बढ़ी है. इसलिए हमारी जिम्मेदारी भी ज्यादा हो गई है और हम भारतीय सेना को सहयोग करने के लिए हर तरह से तैयार रहते हैं. उन्होंने कहा, कोविड-19 की ड्यूटी करना और सेना को सहयोग करना जरूरी है, क्योंकि सीधा यह रास्ता नाथुला पास और अन्य इलाकों को जोड़ता है, तो व्यवधान रहित रास्ता हमारे देश की रक्षा करने वाले तय करें यही हम सुनिश्चित करते हैं. कुल मिलाकर कोशिश हमारी यही होती है कि जल्दी से जल्दी सारे मूवमेंट को होने दिया जाए.

पुल पर सेना की मदद को तैयार सिक्किम पुलिस
चौराहों, सड़क और फिर पुलों पर भी सिक्किम पुलिस के जवान तैनात है, ताकि सेना के वाहनों की आवाजाही को कोई भी दिक्कत न हो, पुल की कमान संभाली है. एएसआई टी एस शर्मा ने शर्मा ने कहा, चाहे चौड़ा हो या फिर पतला पुल हो वो इसी तरीके से रास्तों के महत्वपूर्ण पुल पर मार्च करते रहते हैं. सेना और सुरक्षाबल के मूवमेंट और वाहनों को सुचारु तरीके से पास करवाना उन्हीं की जिम्मेदारी है.

-बहुत ही विशेष परिस्थिति हैं ये और पुल से जब सेना के वाहन गुजरेंगे तो उन्हे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए ये उनकी ड्यूटी है.

-उन्हें कोई जानकारी नहीं होती कि वाहन कब आनेवाला है और इसीलिए उनकी और उनके टीम की नजर पिछले चार महीनों से सड़क पर ही रह रही है.

-जरूरत का सामान जल्द नाथुला पास या अन्य इलाकों तक पहुंचे ये उनकी प्राथमिकता होती है.

-कई बार पुल पर पानी भर जाता है तो संबधित एजेंसियों की मदद से तुरंत पानी को पुल से हटाया जाता है.

-चीन के साथ विवाद का ये बहुत ही महत्वपूर्ण वक्त है तो हम भी बैठ नहीं सकते सेना के वाहन जल्द पहुंचे अपने गंतव्य तक इसको पूरा करवाना हमारा ही काम है.
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