कोरोना वायरस से जंग के लिए भारत ने चीन को दी थी बड़ी मदद, लेकिन उसने...!

कोरोना वायरस से जंग के लिए भारत ने चीन को दी थी बड़ी मदद, लेकिन उसने...!
क्या चीन केवल अपने हितों के लिए दूसरे देशों को तरह तरह से ठगता है और उनके साथ विश्वासघात करता है

कोरोना से जंग के लिए मोदी सरकार ने चीन को बड़ी मदद भेजी थी, मुश्किल घड़ी में हमारी सरकार चीनी लोगों की मदद कर रही थी और उसने हमारी पीठ में छुरा घोंप दिया. अब तोड़नी होगी उसकी आर्थिक कमर

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नई दिल्ली. चीन की वजह से इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना महामारी (Coronavirus) झेल रही है. जब चाइना में कोरोना अपने चरम पर था तब भारत अच्छे पड़ोसी का धर्म निभाते हुए संकट के दौरान उसकी मदद करने में जुटा रहा. लेकिन उसने हमारी परवाह कभी नहीं की. आज हम कोरोना से जंग लड़ रहे हैं और वो हमारी पीठ में खंजर घोंप रहा है. उसकी धोखेबाजी का शिकार होकर हमारे 20 सैनिक शहीद हो गए. इसलिए देश में गुस्सा है. आम जनता अब यह कह रही है कि चीन जैसे धूर्त देश पर सरकार को कभी भरोसा नहीं करना चाहिए.

फरवरी में भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) का विमान लगभग 15 टन चिकित्सा सामग्री लेकर वुहान (Wuhan) पहुंचा था. तब विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने कहा था कि इस ‘मुश्किल घड़ी’ में चीन के लोगों के प्रति भारत (India) की एकजुटता जाहिर करने के लिए राहत सामग्री की खेप भेजी गई है.’ जाहिर है हम उसके लिए अच्छा सोच रहे थे और उसने भारत के सैनिकों के साथ धोखा किया.

हमने उसे कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक लाख सर्जिकल मास्क (Mask), 5 लाख जोड़े सर्जिकल दस्ताने, 75 इंफ्यूजन पंप, 30 इंटेरल फीडिंग पंप, 21 डिफाइब्रिलेटर और 4000 एन-95 मास्क आदि भेजे थे. इस मेडिकल सहायता पर 2.11 करोड़ रुपये का खर्च हुआ था. यह पूरी सामग्री हुबेई चैरिटी फेडरेशन को सौंपी गई थी.



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चीनी सैनिकों की झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए हैं

स्वदेशी जागरण मंच (Swadeshi Jagran Manch) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख दीपक शर्मा का कहना है कि चीन ने अपनी धोखेबाजी से एक बार फिर साबित किया है कि वो बदला नहीं है. वो पहले भी धूर्त देश था और आज भी है. इसलिए आगे से हमें उसे हर तरह का असहयोग शुरू कर देना चाहिए. उसने जो कुछ भी किया उसका नुकसान उसे ही ज्यादा होगा. भारत तो उसे हमेशा एक अच्छा पड़ोसी मानता रहा है लेकिन उसने छल करके आगे की सारी संभावनाएं खत्म कर दी हैं. अब हमें उसके सामान का इस्तेमाल छोड़कर उसकी आर्थिक ताकत को ध्वस्त कर देना चाहिए.

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