गलवान घाटी झड़प: चीन के साथ चली मैराथन बैठक पर सेना का आया पहला बयान

गलवान घाटी झड़प: चीन के साथ चली मैराथन बैठक पर सेना का आया पहला बयान
भारत की ओर से साफ कह दिया गया है कि एलएसी में जैसी स्थिति 5 मई के पहले थी वैसे ही होनी चाहिए.

India-China Tension: भारत-चीन के अधिकारियों के बीच हुई इस बातचीत में पूर्वी लद्दाख (Ladakh Galwan Valley) से सैनिकों के हटाने के लिए तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया गया. बातचीत के दौरान भारत की ओर से साफ कह दिया गया है कि LAC में जैसी स्थिति 5 मई के पहले थी वैसे ही होनी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 23, 2020, 11:50 AM IST
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नई दिल्ली. भारत और चीन (India-China Border Tension) के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव के बीच सोमवार को लेफ्टिनेंट जनरल लेवल (Lt General-Level Talks) की बातचीत हुई. एलएसी के दूसरी ओर चीन के हिस्से में मोल्डो इलाके में दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच करीब 12 घंटे चली इस बैठक के नतीजे सकारात्मक लग रहे हैं. इस मीटिंग के बाद सेना का बयान आया है. मामले के जानकारों के मुताबिक, भारत की ओर से साफ-साफ शब्दों में कह दिया गया है कि चीन अपनी सीमा पर वापस लौटे.

घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय सेना की ओर से कहा गया है कि मीटिंग में कुछ खास प्रभावी नतीजा नहीं निकल सका है, लेकिन ये बैठक सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण रही है. इस बातचीत में पूर्वी लद्दाख से सैनिकों को हटाने के लिए तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया गया. बातचीत के दौरान भारत की ओर से साफ कह दिया गया है कि एलएसी में जैसी स्थिति 5 मई के पहले थी वैसे ही होनी चाहिए.

कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया नेतृत्व
पूर्वी लद्दाख में चुशुल सेक्टर के चीनी हिस्से में स्थित मोल्डो में सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे ये बैठक शुरू हुई थी. इसमें देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने पूर्वी लद्दाख में स्थिति की विस्तृत समीक्षा की. मोल्डो में हुई बातचीत में भारतीय पक्ष का नेतृत्व 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कमांडर कर रहे थे.
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6 जून को हुई थी पहले दौर की बातचीत
दोनों पक्षों के बीच उसी जगह पर 6 जून को लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की पहले दौर की बातचीत हुई थी. इस दौरान दोनों पक्षों ने गतिरोध दूर करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया था. हालांकि, 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद सीमा पर स्थिति बिगड़ गई. इसके बाद भारत-चीन ने 3500-किलोमीटर की वास्तविक सीमा के पास अधिकांश क्षेत्रों में अपनी सैन्य तैनाती को काफी तेज कर दिया है.

थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे आज लेह के दौरे पर
इस बीच थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे मंगलवार को लेह के दौरे पर हैं. जनरल नरवणे यहां जमीनी स्तर पर सीमा सुरक्षा का जायजा लेंगे. साथ ही सेना की 14 कोर के अफसरों के साथ हुई मीटिंग की प्रगति को लेकर चर्चा करेंगे. इससे पहले उन्होंने सोमवार को दिल्ली में सेना के कमांडरों के साथ बैठक में लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सीमा विवाद की पूरी जानकारी ली. सेना की कमांडर कॉन्फ्रेंस मंगलवार को भी जारी रहेगी.

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सेना को दे दी गई है पूरी छूट
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक की. इसमें पूर्वी लद्दाख में हालात पर चर्चा हुई. हिंसक झड़प के बाद सरकार ने चीन के साथ लगने वाली 3500 किलोमीटर की सीमा पर चीन के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सशस्त्र बलों को 'पूरी छूट' दे दी है.

 
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