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LAC पर तैनात ITBP के जवानों के लिए चीनी भाषा के कोर्स को बनाया जाएगा और एडवांस

ITBP के जवानों को चीनी भाषा सिखाने के लिए अब कदम उठाए जाएंगे
ITBP के जवानों को चीनी भाषा सिखाने के लिए अब कदम उठाए जाएंगे

India China Face off: चीन से गतिरोध के बाद भारत-चीन सीमा पर तैनात इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) को चाइनीज लैंग्वेज कोर्स को और आधुनिक बनाया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 16, 2020, 12:22 PM IST
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नई दिल्ली. चीन से गतिरोध (India China Face off) के बाद भारत चीन सीमा पर तैनात इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के लिए चाइनीज लैंग्वेज कोर्स को और आधुनिक बनाया जाएगा. इसका मकसद है कि सीमा पार तैनात चीनी सैनिकों से भारतीय सुरक्षाबल बेहतर तरीके से संवाद कर सके. इस योजना में कोर्स की संख्या बढ़ाना और सारे जवानों के लिए उनकी जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग प्लान तैयार करना शामिल है.

बताया गया कि जल्द ही भारत सरकार इस योजना पर अमल करने वाली है कि भारत-चीन सीमा पर तैनात करीब 90 हजार जवानों की फोर्स ITBP के हर जवान को बेसिक चाइनीज लैंग्वेज की ट्रेनिंग मिले. इससे पहले भी जवानों के लिए चाइनीज लैंग्वेज का कार्यक्रम लागू था, लेकिन अब और ज्यादा योजनाबद्ध तरीके से हर एक जवान को इस पाठ्यक्रम से जुड़े कोर्स को पूरा करना होगा. इस पाठ्यक्रम में बेसिक ट्रेनिंग कोर्स और रिफ्रेशर कोर्स शामिल है. जवानों को मैंडेरिन भाषा भी सिखाई जाएगी.

फोर्स के जवानों को चीनी भाषा सिखाने की जिम्मेदारी आईटीबीपी के चाइनीज लैंग्वेज डिपार्टमेंट की होती है, जहां इससे जुड़े पाठ्यक्रम को नया रूप देने की योजना पर काम चल रहा है. योजना के मुताबिक, 1 से 2 साल तक चलने वाले बेसिक ट्रेनिंग कोर्स में सीखने वाले आईटीबीपी कर्मियों की तादाद बढ़ाई जाएगी. समय-समय पर 3 से 4 महीने के जो रिफ्रेशर कोर्स होते रहते हैं. अब उनकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी. इसके साथ ही पाठ्यक्रम में ऑडियो और वीडियो ट्रेनिंग पर खास जोर दिया जाएगा.



भारत-चीन के बीच हुए समझौतों की भी जानकारी दी जाएगी 
इसके अलावा जवानों को समय-समय पर भारत-चीन के बीच हुए समझौतों की भी जानकारी दी जाएगी, ताकि पेट्रोलिंग के दौरान इसकी जानकारी चीनी सैनिकों को दे सकें. मैंडेरिन भाषा में लिखे गए बैनर को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने को कहा गया है जिसमें सुरक्षा बल अपने देश का संदेश लिए सीमा पर गश्त करते हैं.

सीमा पर किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए चीनी सैनिकों के लिए अनाउंसमेंट करने वाले सुरक्षाबलों के गश्ती दल को भी और बेहतर बनाया जा रहा है. चीनी भाषा के पाठ्यक्रम में जेएनयू के अलावा अन्य संस्थानों की सेवाएं लेने पर भी विचार चल रहा है ताकि जवानों को भाषा का बेहतर ज्ञान मिल सके. भारत-चीन सीमा पर तैनात हर जवान और अधिकारी को नियमित अंतराल पर जरूरत के अनुसार रिफ्रेशर कोर्स की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि भाषा के प्रवाह की जानकारी उनको बराबर मिल सके.
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