India-China Faceoff: लद्दाख में बना 4 KM का बफर जोन, विशेषज्ञ बोले- चीन की 'सलामी स्लाइसिंग' न भूले भारत

India-China Faceoff: लद्दाख में बना 4 KM का बफर जोन, विशेषज्ञ बोले- चीन की 'सलामी स्लाइसिंग' न भूले भारत
तस्वीर Maxar की ट्विटर वॉल से साभार.

India-China Faceoff: पूर्वी लद्दाख में भारत चीन के सैनिक अपनी-अपनी जगह से पीछे हट रहे हैं. दोनों देशों के बीच 4 किलोमीटर का बफर जोन बनने के बाद क्षेत्र में दोनों सेनाओं की गश्त गतिविधियों पर अस्थायी रूप से रोक लगेगी.

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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना की वापसी पर निगरानी के लिए भारतीय सेना कड़ी नजर बनाए हुए है. पूरे घटनाक्रम से परिचित चार अधिकारियों ने बताया कि दोनों सेनाएं 24 घंटे के भीतर सैनिकों के बीच 4 किलोमीटर का बफर जोन बनाने का काम कर रही हैं. चीनी सेना PLA ने पैट्रोलिंग पॉइंट 15 (हॉट स्प्रिंग्स) से 2 किलोमीटर तक पीछे हटा है और बुधवार शाम तक पीपी -17 (गोगरा) से भी पीछे हट जाएगा. इसी अनुपात में भारतीय सेना के सैनिक भी पीछे हटे हैं. सेना के ही एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि दोनों सेनाओं ने पहले ही गलवान घाटी में 4 किमी के बफर जोन बना लिया है. बता दें गलवान में ही 15-16 जून को हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे.

बफर जोन बनने के बाद क्षेत्र में दोनों सेनाओं की गश्त गतिविधियों पर अस्थायी रूप से रोक लगेगी. हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने इसे एक आवश्यक कदम माना. वहीं अन्य ने चेताया कि गश्त अधिकारों पर अस्थायी रोक के बाद लंबे समय तक वहां भारतीय सेना की मौजूदगी और नियंत्रण ना कम होने पाए. एक अन्य अधिकारी ने नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि सेना पीएलए की वापसी पर कड़ी नजर रख रही है. भविष्य में किसी भी अचरज से बचने के लिए डिसएंगेजमेंट की हर प्रक्रिया को वेरिफाई करना जरूरी है.'

ऐसे डिसएंगेजमेंट को वेरिफाई कर रही है सेना

एक तीसरे अधिकारी ने कहा सेना द्वारा शुरू की गई सत्यापन प्रक्रिया में UAV, निगरानी के अन्य हवाई साधन और क्षेत्रों की सैटेलाइट इमेजरी शामिल हैं. भारतीय वायु सेना (IAF) पहले ही दिन-रात, लद्दाख में सभी मौसम से निपटने के अभियानों को अंजाम देने की अपनी क्षमता का अनुमान लगा रही है, जिसमें फ्रंट-लाइन फाइटर जेट्स, अटैक हेलीकॉप्टर और मल्टी-मिशन हेलिकॉप्टर शामिल है.



बफ़र बनने और गश्त लगाने की प्रक्रिया पर विशेषज्ञों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी. उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा कि ' यह प्रक्रिया भविष्य में किसी हिंसक झड़प की संभावना को खत्म कर देंगे. दोनों देशों के सैनिकों के बीच किसी भी प्रकार के संपर्क से बचना सबसे अच्छा है. जब तक चीजें स्थिर नहीं हो जातीं, तब तक दोनों तरफ के इलाकों में गश्त करने की मोहलत होनी चाहिए.'

नियंत्रण ना खोने पाए भारत
वहीं अन्य विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत तय समयावधि के बाद अपने क्षेत्र में गश्त लगा सके. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत धीरे-धीरे क्षेत्र को हथियाने के लिए चीन की 'सलामी स्लाइसिंग' रणनीति को ना भूले. उन्होंने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बफर जोन एक नई स्थिति न बने. ये केवल यथास्थिति बहाल करने के लिए डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए एक अस्थायी उपाय हो सकता है. सेना इस क्षेत्र में सब कुछ होने के बाद अपने अधिकारों का पूरा इस्तेमाल करेगी.'

चौथे अधिकारी ने कहा सेना डेपसांग क्षेत्र में सीमा पर भी कड़ी निगरानी रख रही है, जहां 2013 के चीनी घुसपैठ ने कई गश्त वाले मार्गों पर भारतीय सैनिकों की पहुंच को रोक दिया था, जिनमें पैट्रोल पॉइंट्स 10, 11, 11 ए, 12 और 13 शामिल थे.
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