सीमा विवाद के बावजूद भारत-चीन के बीच 4 दशकों में नहीं चली एक भी गोलीः पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, "एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग परसेप्शन की वजह से सीमा पर छिटपुट घटनाएं हो जाती हैं. हालांकि दोनों देश ऐसी समस्याओं को बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लेते हैं."

News18Hindi
Updated: August 12, 2018, 6:35 PM IST
सीमा विवाद के बावजूद भारत-चीन के बीच 4 दशकों में नहीं चली एक भी गोलीः पीएम मोदी
पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फाइल फोटो
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Updated: August 12, 2018, 6:35 PM IST
'भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चल रहा है. लेकिन दोनों देशों के बीच 40 सालों में गोलीबारी की एक भी घटना नहीं हुई है.' अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को ईमेल के जरिए दिए एक इंटरव्यू में डोकलाम अवरोध पर बात करते हुए पीएम मोदी ने यह बात कही.

बता दें कि पिछले साल जून में चीन ने भूटान के डोकलाम इलाके में सड़क निर्माण कार्य के शुरू कर दिया था. यह इलाका भारत के चिकन नेक (पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला क्षेत्र) के बेहद करीब है, इस वजह से यह समसामरिक रूप से भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

भारतीय सेना ने चीनी निर्माण कार्य रुकवा दिया था और दोनों देशों के जवानों के बीच डोकलाम पर अवरोध शुरू हो चुका था जिसका दो महीने से भी अधिक वक्त के बाद अगस्त 2017 में समाधान निकाला गया था.

पीएम मोदी ने कहा, "एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग परसेप्शन की वजह से सीमा पर छिटपुट घटनाएं हो जाती हैं. हालांकि दोनों देश ऐसी समस्याओं को बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लेते हैं. यह गौर करने वाली बात है कि पिछले 40 सालों में भारत-चीन सीमा पर एक भी गोली नहीं चली है और सीमा पर शांति बरकरार रखी गई है. इससे पता चलता है कि दोनों ही देश परिपक्व हैं और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करने में सक्षम हैं."


वहीं इस साल अप्रैल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ वुहान में अपनी अनौपचारिक मुलाकात पर पीएम ने कहा कि यह दोंनों देशों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने की की एक कोशिश थी. डोकलाम गतिरोध के बाद यह दोनों राष्ट्राध्यक्षों की दूसरी बड़ी मुलाकात थी. इससे पहले दोनों शियामेन में 2017 में आयोजित ब्रिक्स समिट में मिले थे.

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प्रधानमंत्री ने कहा, “पिछले चार सालों में मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कई बार मिला हूं. पिछले कुछ महीनों में हमने वुहान अनौपचारिक समिट की मदद से अपने संबंधों में एक नया आयाम भी जोड़ा है. इससे हमें एक स्वतंत्र वातावरण में बातचीत का मौका मिला और एक दूसरे की चिंताओं को समझने में मदद भी मिली."
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पीएम ने आग कहा, “बहुपक्षीय समिट्स के माध्यम से भी हम नियमित रूप से मिल रहे हैं. इससे दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को बढ़ाने में सफलता मिली है. हम राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अगले साल होने वाले अनौपचारिक भारत दौरे के लिए उत्साहित हैं.”

चीन का पाकिस्तान को समर्थन, दक्षिण एशिया में बढ़ता दबदबा, नदी के पानी को लेकर विवाद, व्यापार और सीमा विवाद के बावजूद पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि दोनों देश एक दूसरे का सहयोग जारी रखेंगे. उन्होंने कहा, "वैश्विक महत्व के कई मुद्दे हैं जिन्हें लेकर भारत और चीन लंबे समय से एक दूसरे का सहयोग करते आए हैं."
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