जब पापा ने पूछा- बेटा कैसे हैं सीमा के हालात, कर्नल संतोष बाबू ने दिया यह जवाब, पढ़कर गर्व करेंगे आप

जब पापा ने पूछा- बेटा कैसे हैं सीमा के हालात, कर्नल संतोष बाबू ने दिया यह जवाब, पढ़कर गर्व करेंगे आप
शहीद कर्नल संतोष बाबू (फाइल फोटो)

लद्दाख सीमा (Ladakh Border) पर चीनी सैनिकों से साथ भारतीय सैनिकों की हिंसक झड़प पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प क्षेत्र में 'यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के चीनी पक्ष के प्रयास’ के कारण हुई.

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नई दिल्ली. लद्दाख सीमा (Ladakh Border) पर चीन के साथ भारतीय सैनिकों की हिंसक झड़प (India China Rift) में शहादत देने वाले कर्नल संतोष बाबू (Colonel Santosh Babu) की मां को अपने बेटे पर गर्व तो है लेकिन एक दुख भी है. तेलंगाना (Telangana) के नालागोंडा (Nalagonda) जिला निवासी संतोष बाबू, 15/ 16 जून की रात लद्दाख सीमा पर हुई हिंसक झड़प में चीनी सैनिकों के चंगुल में आ गए.

16वीं बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अधिकारी कर्नल संतोष बाबू की मां मंजुला ने कहा- 'अब मेरा बेटा कभी वापस नहीं आएगा. उसकी शहादत पर मुझे गर्व है लेकिन एक मां के रूप में मैं काफी दुखी हूं.' उन्होंने कहा, 'मेरी बहू को शहादत की जानकारी सवेरे ही मिल गई लेकिन मुझे लोगों ने दोपहर में बताया.'

मां ने बताया कि संतोष बचपन से ही सेना में जाना चाहते थे. साल 1993 से 2000 के दौरान संतोष ने विशाखापट्टनम के सैनिक स्कूल में पढ़ाई की और फिर सेना में भर्ती हो गए. संतोष के पिता ने कहा कि वह जब भी आता था हम सबके साथ वक्त गुजारता था. वह हमारे लिए आदर्श बेटा था. संतोष बाबू का आज उनके गृह जनपद में अंतिम संस्कार किया जाएगा.



जब संतोष बाबू के पिता ने सीमा के हालात पर पूछे सवाल 
सीमा के हालत पर जब बाबू के पिता ने कर्नल से पूछा तो उन्होंने कहा, 'आपने मुझे सेना में भेजा, अब मुझे मेरी ड्यूटी करने दीजिए.' सीमा के हालात पर सवाल पर उन्होंने कहा, 'आप मुझसे यह नहीं पूछ सकते और मैं आपको कुछ नहीं बता सकता. सब कुछ ठीक है.'

बाबू के 62 वर्षीय पिता उपेंद्र ने कहा, 'कुपवाड़ा में उनके साथियों ने उसकी हमेशा तारीफ की. कुपवाड़ा में उनके कार्यकाल के दौरान घुसपैठियों को खत्म करने में मदद मिली. सेवानिवृत बैंक मैनेजर उपेंद्र को उम्मीद थी कि बेटे की पोस्टिंग हैदराबाद हो जाएगी लेकिन लॉकडाउन के कारण देरी हो गई थी.

बता दें पूर्वी लद्दाख में सोमवार रात गलवान घाटी (Galwan Valley) में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 सैनिक शहीद हो गए .

सेना ने क्या कहा?
सेना ने शुरू में मंगलवार को कहा कि एक अधिकारी और दो सैनिक शहीद हुए लेकिन देर शाम कहा गया, '17 अन्य सैनिक जो अत्यधिक ऊंचाई पर शून्य से नीचे तापमान में गतिरोध के स्थान पर ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उन्होंने दम तोड़ दिया है. इससे शहीद हुए सैनिकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है.'

सरकारी सूत्रों ने कहा है कि चीनी पक्ष के सैनिक भी 'उसी अनुपात में' हताहत हुए हैं. वर्ष 1967 में नाथू ला में झड़प के बाद दोनों सेनाओं के बीच यह सबसे बड़ा टकराव है. उस वक्त टकराव में भारत के 80 सैनिक शहीद हुए थे और 300 से ज्यादा चीनी सैन्यकर्मी मारे गए थे. इस क्षेत्र में दोनों तरफ नुकसान ऐसे वक्त हुआ है जब सरकार का ध्यान कोविड-19 संकट से निपटने पर लगा हुआ है. सेना के एक बयान में कहा गया, 'भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गलवान क्षेत्र में जिस स्थान पर 15/16 जून की रात झड़प हुई, वहां से दोनों तरफ के सैनिक हट गए हैं.'

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