India-China Standoff: भारत-चीन के बीच आज 7वीं बार कमांडर लेवल की बैठक, क्या LAC विवाद का निकलेगा हल?

दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर की सातवीं बैठक एलएसी पर भारत की तरफ चुशूल में होगी. (PTI)

India-China Standoff: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत की ओर चुशूल में ये मीटिंग दोपहर 12 बजे शुरू होगी. इस मीटिंग में पहली बार चीन के विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं.

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    नई दिल्ली/लद्दाख. भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 5 महीने से चल रही तनातनी (India-China Standoff) खत्म करने के लिए आज कोर कमांडर्स एक बार फिर मिलने जा रहे हैं. दोनों देशों के कोर कमांडर्स के बीच ये सातवीं बैठक है. पिछली मीटिंग में दोनों देश एलएसी पर और अधिक सैनिकों की तैनाती (India-China LAC Rift) ना करने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन इसके बावजूद टकराव की स्थिति अब भी बनी हुई है. दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर की सातवीं बैठक एलएसी पर भारत की तरफ चुशूल में होगी. इस मीटिंग में पहली बार चीन के विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं. वहीं, भारत ने भी सीनियर डेप्लोमेट जॉइंट सेक्रेटरी (ईस्ट एशिया) नवीन श्रीवास्तव को लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह के साथ रहने को कहा है.

    भारत सोमवार को चीन के साथ होने वाली उच्च-स्तरीय सैन्य वार्ता के सातवें दौर में पूर्वी लद्दाख में टकराव के बिंदुओं से चीन द्वारा सैनिकों की पूरी तरह से जल्द वापसी पर जोर देगा. सूत्रों ने बताया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत की ओर चुशूल में ये मीटिंग दोपहर 12 बजे शुरू होगी. इसका एजेंडा पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी बिंदुओं से सैनिकों की वापसी के लिए एक रूपरेखा तैयार करना होगा.

    भारतीय सेना के एक टॉप अधिकारी के मुताबिक, चीन के साथ इस बातचीत का भी कोई हल नहीं निकलने वाला, क्योंकि पेंगोंग इलाके की अहम चोटियों पर भारतीय जवानों की मजबूत पकड़ के बाद चीनी सेना बौखलाई हुई है और वो चुप नहीं बैठेगी.

    क्या इस मीटिंग का कुछ होगा फायदा?
    सेना के टॉप अधिकारी के मुताबिक, इस सातवें राउंड की बातचीत से भी किसी भी तरह की सफलता की उम्मीद नहीं है, क्योंकि चीन LAC पर अपनी मौजूदा एक्टिविटी को लेकर अड़े हुए है. वहीं,अमेरिकी एनएसए रॉबर्ट ओ' ब्रायन भी ऐसा मानते हैं कि LAC के मौजूदा हालात के मद्देनजर चीन के साथ इस बातचीत से कोई मदद नहीं मिलेगी.

    सेना के टॉप अधिकारी के मुताबिक, 'हम बात करना जारी रख सकते हैं, लेकिन एलएसी विवाद का इससे कोई हल नहीं निकलेगा. चीनी सैनिक पीछे नहीं हटेंगे. 1959 में हुई संधि को तोड़कर चीन अपने इरादे साफ जाहिर कर चुका है.'

    अधिकारी ने आगे कहा, 'यह कहना मुश्किल है कि चीनी आगे क्या करेगा? मगर एक बात तो साफ है कि वो लद्दाख के पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) में चुप नहीं बैठेगा. भारतीय सैनिकों द्वारा सात रणनीतिक ऊंचाइयों पर पकड़ मजबूत करने के बाद चीनी सैनिक और उग्र हो गए हैं. क्योंकि, पीएलए ने इसकी उम्मीद नहीं की थी. ऐसे में कोर कमांडर की इस मीटिंग में पीएलए की पूरी कोशिश भारतीय जवानों को इन ऊंचाइयों से वापस उतारने की होगी.'


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    लेफ्टिनेंट जनरल मेनन भी रहेंगे मौजूद
    जानकारी के मुताबिक, भारत की तरफ से इस मीटिंग में लेह स्थित 14वीं कोर ('फायर एंड फ्यूरी') के कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह की ये आखिरी मीटिंग होगी. 14 अक्टूबर से उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ले रहे हैं. हरिंदर सिंह का अपना कोर कमांडर स्तर का कार्यकाल खत्म हो गया है और अब वे देहरादून स्थित‌ आईएमए यानी इंडियन मिलिट्री एकेडमी के कमांडेंट नियुक्त कर दिए गए हैं. सोमवार को होनी वाली मीटिंग में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में लेफ्टिनेंट जनरल मेनन भी मौजूद रहेंगे.

    पिछली बार कब हुई थी मीटिंग?
    इससे पहले दोनों देशों के बीच मोल्डो में चीनी क्षेत्र में 21 सितंबर को छठे दौर की कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी. यह बैठक लगभग 14 घंटे तक चली थी. इसमें विदेश मंत्रालय के अफसर भी शामिल हुए थे. बैठक में तनाव कम करने के तरीकों पर चर्चा की गई. भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई भारतीय सेना की लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने की. सैन्य वार्ता के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में पहली बार विदेश मंत्रालय के किसी वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया गया था.

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    पूरी एलएसी पर होगा डिसइंगेजमेंट
    भारत ने साफ कर दिया कि डिसइंगेजमेंट होगा तो पूरी एलएसी पर होगा. ऐसी स्थिति में चीनी सेना को पैंगोंग-त्सो लेक से सटी फिंगर 4-8 के पीछे चली जाए, लेकिन चीनी सेना इसके लिए तैयार नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि टकराव और तनातनी की स्थिति अभी लंबी खिंच सकती है.



    बता दें कि भारत और चीन के बीच पांच मई से लद्दाख में टकराव जारी है. चार महीने बाद भी इसका कोई नतीजा नहीं निकला है और 15 जून को गलवान घाटी में टकराव ने हिंसक मोड़ ले लिया था. हैंड-टू-हैंड बैटल में भारतीय सेना के 20 सैनिक शहीद हो गए थे. इस झड़प में चीन के भी 35 से 40 सैनिक मारे की बात कही जाती रही है.

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