सीमा पर तनाव: चीन के राजदूत बोले- गलवान में हुई झड़पें दुर्भाग्यपूर्ण थीं, तनाव कम करना जरूरी

सीमा पर तनाव: चीन के राजदूत बोले- गलवान में हुई झड़पें दुर्भाग्यपूर्ण थीं, तनाव कम करना जरूरी
चीन के राजदूत सून वेडॉन्ग

India-China Standoff: सून वेडॉन्ग ने ये बातें भारत-चीन यूथ फॉरम में कही. इसका आयोजन 18 अगस्त को राजधानी दिल्ली में हुआ था. राजदूत के इन बातों को चीन के दूतावास ने मंगलवार को छापा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 26, 2020, 7:12 AM IST
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नई दिल्ली. लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुए हिंसक झड़प को अब दो महीने से ज्यादा वक्त हो गए है. इस घटना में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे. तब से लेकर अब तक भारत और चीन के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. इस बीच भारत में चीन के राजदूत सून वेडॉन्ग ( Sun Weidong) ने कहा है कि गलवान घाटी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी. साथ ही उन्होंने इस घटना को इतिहास के संदर्भ से संक्षिप्त लम्हा कहा है. वेडॉन्ग ने ये भी कहा कि बातचीत के जरिए इस तनाव को कम करने की कोशिशें की जा रही है.

'विचारधारा की पुरानी बातों को भुलाने का वक्त'
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सून वेडॉन्ग ने ये बातें भारत-चीन यूथ फॉरम में कही. इसका आयोजन 18 अगस्त को हुआ था. राजदूत के इन बातों को चीन के दूतावास ने मंगलवार को छापा है. इस वेबिनार में सून वेडॉन्ग ने कहा, ' दो उभरते हुए प्रमुख पड़ोसियों के रूप में चीन और भारत को विचारधारा की लाइनों की पुरानी मानसिकता को छोड़ देना चाहिए, और 'एक का लाभ दूसरे के नुकसान' के पुराने खेल से छुटकारा पाना चाहिए. ऐसे में आप भटक जाएंगे और गलत रास्ते पर चले जाएंगे.'

'संघर्ष से बचना चाहिए'
सून वेडॉन्ग ने आगे कहा, 'बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब सीमा पर एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी जिसे न तो चीन और न ही भारत देखना पसंद करेगा. अब हम इसे ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं. ये घटना इतिहास के संदर्भ में संक्षिप्त लम्हे थे'. सून ने कहा कि विकास के लक्ष्यों को पाने के लिए, दोनों देशों को एक 'शांतिपूर्ण और अनुकूल' बाहरी वातावरण की जरूरत है. चीन और भारत, पड़ोसी देशों को शांति से रहना चाहिए और संघर्ष से बचना चाहिए.



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'सामाजिक व्यवस्थाओं का सम्मान करने की आवश्यकता'
जून में गालवान में गतिरोध के बाद आर्थिक संबंधों पर चीन के राजदूत ने कहा, 'मुझे लगता है कि दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे को चुंबक की तरह आकर्षित करना चाहिए, बजाय इसके कि इसे जबरदस्ती अलग करने की कोशिश की जाए.  उन्होंने ये भी कहा कि हमें अपने सामाजिक व्यवस्थाओं का सम्मान करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, ' मेरा मानना ​​है कि हर देश की सामाजिक प्रणाली अपने संबंधित लोगों द्वारा बनाई गई एक स्वतंत्र चीज है और इसमें किसी दूसरे को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. चीन और भारत की अलग-अलग सामाजिक प्रणालियां और सांस्कृतिक परंपराएं हैं, लेकिन हम सभी का लक्ष्य ऐसे विकास पथ पर चलना है जो हमारी अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल हो.'
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