चीन के राजदूत ने मैगजीन में लिखा- गलवान में हिंसक झड़प के लिए चीन नहीं है ज़िम्मेदार

चीन के राजदूत ने मैगजीन में लिखा- गलवान में हिंसक झड़प के लिए चीन नहीं है ज़िम्मेदार
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव खत्म करने को लेकर बातचीत का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है.

India-china standoff: भारत में चीन के राजदूत ने लिखा है कि इस हिंसक झड़प की जांच हो. उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराए. इसके अलावा भारत सीमा पर अपने सैनिकों को सख्ती से अनुशासित करे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 11:11 AM IST
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नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा  (LAC) पर तनाव को अब सौ दिन पूरे होने वाले हैं. इस मौके पर भारत में चीन के राजदूत सून वेडॉन्ग ( Sun Weidong) ने कहा है कि गलवान घाटी (Galwan Valley) में हिंसक झड़प के लिए भारत जिम्मेदार है न कि चीन. बता दें कि 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे. चीन के राजदूत ने ये बातें दूतावास की मैगजीन में छपे अपने लेख में लिखी हैं, जो दिल्ली से प्रकाशित हुई है.

'भारत ने उकसाया'
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक राजदूत ने लिखा है, 'अगर कोई ध्यान से इस घटना को देखे तो पता चलता है कि इसके लिए चीन ज़िम्मेदार नहीं है बल्कि भारत है. भारतीय पक्ष ने उकसावे के लिए LAC को पार किया और चीन की सेना पर हमला किया. भारतीय सेना ने दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों पर समझौतों का गंभीरता से उल्लंघन किया. इसके अलावा भारत ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी मानदंडों का भी गंभीर उल्लंघन किया.'

'घटना की जांच हो'
भारत में चीन के राजदूत सून वेडॉन्ग ने आगे लिखा है, 'हम भारतीय पक्ष से आग्रह करते हैं कि वो पूरी तरह से जांच करे, उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराए. इसके अलावा वो सीमा पर अपने सैनिकों को सख्ती से अनुशासित करे. साथ ही ऐसी घटनाओं को फिर से न होने देने के लिए जरूरी कदम उठाए. सेना को भड़काने की कोशिश न करें.'



अब तक बातचीत का नहीं निकला है नतीजा
चीन के राजदूत के मुताबिक किसी भी रिश्ते में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं. बता दें कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव खत्म करने को लेकर बातचीत का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है. इस दौरान सैन्य कमांडर-स्तरीय वार्ता के पांच दौर, राजनयिक स्तर की वार्ता के चार दौर हो चुके हैं. इसके अलावा 5 जुलाई के विशेष प्रतिनिधि-स्तर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों के बीच बातचीत का भी कोई नतीजा नहीं निकला है.
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