LAC के हर मोर्चे पर सेना ने कसी कमर, लद्दाख में आर्मी को दी जाएगी 'विंटर डीजल'

LAC के हर मोर्चे पर सेना ने कसी कमर, लद्दाख में आर्मी को दी जाएगी 'विंटर डीजल'
इस बार ठंढ़ के मौसम में सेना को विंटर डीजल की सप्लाई की जाएगी. (फोटो-AP)

India China Standoff: ठंड के मौसम में लद्दाख का तापमान -30° सेल्सियस तक चला जाता है. लद्दाख में तापमान की गिरावट के साथ सर्दियों में सामान्य डीजल जम जाता है.

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नई दिल्ली. लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय सैनिक (Indian Army) पूरी तरह मुस्तैद हैं. कहा जा रहा है कि दुश्मन की घेराबंदी करने के लिए पूरा खाका तैयार है. सीमा पर चीन के साथ तनातनी के बीच भारतीय सेना के लिए अच्छी खबर है. इस बार ठंड के मौसम में सेना को विंटर डीजल (Winter Diesel ) की सप्लाई की जाएगी. वो खास डीज़ल जिसका इस्तेमाल ऐसे इलाकों में किया जाता है, जहां तापमान शून्य से नीचे हो. सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल जल्द ही लद्दाख में सेना को विंटर डीज़ल मुहैया कराएगी.

बेहद खास है ये डीज़ल
ठंड के मौसम में लद्दाख का तापमान -30° सेल्सियस तक चला जाता है. लद्दाख में तापमान की गिरावट के साथ सर्दियों में सामान्य डीजल जम जाता है. ऐसे में गाड़ियों को चलाने में परेशानी होती है. यहां के लोग कई बार इस चुनौती से पार पाने के लिए डीज़ल में केरोसिन मिलाकर इस्तेमाल करते हैं. पिछले साल नवंबर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख क्षेत्र के लिए पहले विंटर ग्रेड डीजल बिक्री केन्‍द्र का शुभारंभ किया था. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अब डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (DGQA) ने सेना को विंटर डीज़ल इस्तेमाल के लिए भी हरी झंडी दे दी है.

अभी कैसे चलता है सेना का काम
इन दिनों IOCL और दूसरी तेल विपणन कंपनियां, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड इन क्षेत्रों में सेना के लिए स्पेशल डीजल सप्लाई करती हैं. इस डीजल में हाई सल्फर पौर पॉइंट (DHPP -W) होता है. ऐसे में इसका इस्तेमाल -30 डिग्री सेल्सियस तक किया जा सकता है. लेकिन अब इस साल ठंड में सेना को विंटर डीजल दी जाएगी. ये पहले से कहीं ज्यादा बेहतर है. सीमा पर मौजूदा हालात को देखते हुए विंटर डीजल की डिमांड भी ज्यादा रह सकती है.



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कैसे तैयार होता है ये डीज़ल
विंटर डीज़ल को कम चिपचिपाहट बनाए रखने के लिए एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है. इस खास डीजल में लगभग पांच प्रतिशत बायोडीजल का मिश्रण भी किया जाता है. साथ ही इसमें सल्फर की मात्रा भी कम रहती है जो इंजनों को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करती है. ऐसे में ये डीजल -33 डिग्री सेल्सियस तापमान पर नहीं जमता है.
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