चीन से तनाव के बीच लद्दाख में भारतीय सेना की सुरक्षा करेंगी सुरंगें, सर्दी से भी करेंगी बचाव

एलएसी पर PLA के सामने डटकर खड़े हैं भारतीय जवान.
एलएसी पर PLA के सामने डटकर खड़े हैं भारतीय जवान.

India China Standoff: वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के किसी भी दुस्साहस से निपटने के लिए भारतीय सेना सुरंग से अपना बचाव करते हुए आगे की कार्रवाई को अंजाम देगी. लद्दाख में ये खास तरह की सुरंगें तैनात की गई हैं जो कि जवानों को दुश्मन की गोली के साथ-साथ सर्दी और बर्फीले तूफान से भी बचाएंगीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 22, 2020, 4:24 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (Northern Ladakh) में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद (India-China Border Dispute) मई से जारी है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (People's Liberation Army) की प्रोपेगेंडा मशीन ने 29 अगस्त को फ्यूचरिस्टिक ऊर्जा हथियारों के जरिए 29 अगस्त को पूर्वी लद्दाख में भारतीय सैनिकों को निशाना बनाए जाने की सूचना दी थी. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सेना ने भविष्य की किसी भी विरोधी कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए चीनी युद्ध मैनुअल में खुदाई कर सुरंगों के बचाव के उपकरण तैनात कर दिए.

29-30 अगस्त को, भारतीय सेना के जवानों ने स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) के साथ 1962 के बाद पहली बार कैलाश रेंज की सीमा पर पैंगोंग त्सो झील के दक्षिण में नियंत्रण रेखा पर कब्जा कर लिया. भारतीय सेना पहले ही पीएलए के ऊर्जा हथियार की रिपोर्टों को फर्जी करार दे चुकी है. चीन ने दूसरे चीन-जापानी युद्ध में जापानियों के खिलाफ सफलतापूर्वक सुरंग बचाव का इस्तेमाल किया, विएतकोंग ने 1960 के दशक में गुरिल्ला युद्ध में अमेरिकियों के खिलाफ और कोरियन युद्ध में उत्तर कोरिया के खिलाफ उसी रणनीति का इस्तेमाल किया था.

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पीएलए ने ल्हासा एयर बेस पर हाउस एयरक्राफ्ट और साउथ चाइना सी में हैनान द्वीपों में न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन के लिए अंडरग्राउंड पेन के लिए टनल शेल्टर बनाए हैं.
दुश्मन के साथ-साथ सर्दी से भी बचाएगी ये सुरंग
रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के अनुसार, भारतीय सेना ने दुश्मन के हमले से सैनिकों को आश्रय देने के लिए सुरंगों में खोदे गए बड़े व्यास ह्यूम के रीइंफोर्स्ड कंक्रीट पाइपों को तैनात किया है और सबसे खराब स्थिति के मामले में विरोधी को आश्चर्यचकित किया है. रीइंफोर्स्ड कंक्रीट पाइप में छह से आठ फीट तक व्यास होता है जिससे कि सैनिक दुश्मन की गोली के संपर्क में आए बिना आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भूमिगत स्थानांतरित हो सकते हैं. सुरंगों का अन्य फायदा यह भी है कि उन्हें गर्म किया जा सकता है और तापमान काफी कम हो जाने और बर्फ के बर्फीले तूफान से सैनिकों को आश्रय दिया जा सकता है.

घर्षण बिंदुओं से सैनिकों को अलग-थलग और पीछे करने के लिए भारत और चीन के बीच नवें दौर की सैन्य वार्ता जल्द होने की उम्मीद है. इस बीच भारतीय सेना भी एलएसी पर पीएलए की किसी अन्य प्रकार की गतिविधि से रक्षा में लगी हुई है. भारतीय सुरक्षा नियोजक इस बात पर पूरी तरह से स्पष्ट हैं कि यथास्थिति की बहाली की शुरुआत पीएलए से होनी है, जिसने कि मई 2020 से पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर स्थानांरित कर पूरे बिल्ड-अप की शुरुआत की थी. पीएलए ने पैंगोंग त्सो जैसी आक्रामकता का प्रदर्शन गलवान नदी घाटी और कोंगका ला के पास गोगरा हॉट स्प्रिंग्स में भी दिखाई.

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एलएसी पर भारतीय सेना कर रही बचाव
भारतीय सेना न केवल लद्दाख एलएसी का बचाव कर रही है, बल्कि वह मध्य, सिक्किम और पूर्वी क्षेत्रों में पीएलए की चाल पर भी पैनी निगाह रखे हुए है, वहीं चीनी सेना का तिब्बत में सैन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण जारी है.

भारतीय कूटनीति भी पूर्व लद्दाख से पीएलए की जल्द वापसी के लिए बातचीत करने की जल्दी में नहीं है. वह मानती है कि यथास्थिति बहाल करना लंबे समय में पूरा होने वाला एकमात्र समाधान है. एक अधिकारी ने कहा कि पीएलए हमेशा पलक झपकने की प्रतीक्षा में एक घूरने वाले मैच की तरह होता है. लेकिन यह आक्रामक रणनीति भारत के साथ सफल नहीं होगी.
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