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    लद्दाख के फुंसुक ने सैनिकों की बहादुरी पर सुनाई कविता- 'खाके सौंगध मिट्टी की, पीके पानी सिंध के...

    स्थानीय कवि फुंसुक लद्दाखी
    स्थानीय कवि फुंसुक लद्दाखी

    India China Standoff: फुंसुक लद्दाखी ने इस कविता के जरिए गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों को याद किया है. एक मिनट 19 सकेंड के इस कविता को आप बार-बार सुनना चाहेंगे

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    लेह. 15 जून 2020 को इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए याद रखा जाएगा. ये वो दिन है जब सीमा की रक्षा करते हुए 20 बहादुर सैनिक देश के लिए शहीद हो गए. लद्दाख में गलवान घाटी (Galwan Valley) की इस घटना पर वहां के एक स्थानीय कवि फुंसुक लद्दाखी ने कविता सुनाई है. ये वो कविता है जिसे सुन कर आपका जोश सातवें आसमान पर पहुंच जाएगा. उनकी इस कविता को लद्दाख में काफी लोकप्रिता मिली है.

    क्या खास है इस कविता में
    फुंसुक लद्दाखी ने इस कविता के जरिए गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों को याद किया है. एक मिनट 19 सकेंड के इस कविता को आप बार-बार सुनना चाहेंगे. उन्होंने लिखा है...
    खाके, खाके हां खाके सौगंध मिट्टी की
    पीके, पीके हां पीके पानी सिंध का
    खाके सौगंध मिट्टी की, पीके पानी सिंध का


    शोला बनके बरसा, अरे शोला बनके बरसा



    लद्दाख में तनाव
    बता दें कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर इन दिनों तनाव का माहौल है. पिछले महीने गलवान घाटी में हुई झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे. कहा जा रहा है कि दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारत ने चीन के भी 45 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद से सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत हो रही है. लेकिन अभी तक इन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है.

    लेह में मोदी
    दो दिन पहले पीएम मोदी भी घायल सैनिकों और सीमा के हालात का जाएजा लेने के लिए लद्दाख गए थे. यहां उन्होंने गलवान घाटी में घायल हुए सैनिकों से मुलाकात की. इसके अलवा उन्होंने सैनिकों को संबोधित भी किया. पीएम ने यहां चीन का नाम लिए बिना उऩकी आलोचना की.
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