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India-China Standoff: 11 घंटे चली 9वें दौर की बैठक, भारत ने चीन से फिर दोटूक कहा- पूरी तरह से पीछे हटना ही पड़ेगा

पूर्वी लद्दाख में पहली बार पिछले साल 5 मई को दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराव हुआ था. (PTI)
पूर्वी लद्दाख में पहली बार पिछले साल 5 मई को दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराव हुआ था. (PTI)

India-China Standoff: यह बैठक पूर्वी लद्दाख में चीन की ओर मोल्डो सीमावर्ती क्षेत्र (Chushul-Moldo Border Personnel Meeting) में रविवार सुबह 10 बजे शुरू हुई. इसमें भारतीय का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया. सूत्रों ने बताया कि भारत ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि एलएसी पर टकराव के सभी बिंदुओं से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया दोनों तरफ से एक साथ शुरू होनी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2021, 4:43 PM IST
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लद्दाख/नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा को लेकर गतिरोध (India-China Faceoff) जारी है. इस बीच करीब ढाई महीने के बाद दोनों सेनाओं में रविवार को नौवें दौर की बातचीत हुई. 11 घंटे से ज्यादा समय तक चली मीटिंग में भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया कि चीन को पूरी तरह से पीछे हटना ही पड़ेगा और यहां पर तनाव कम करने की पूरी जिम्मेदारी चीन पर ही है. कोर कमांडर स्तर की इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य पूर्वी लद्दाख (Ladakh Border Issue) में टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ना था. बता दें कि गतिरोध के हल के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की मीटिंग में कोई ठोस नतीजा हाथ नहीं लगा है.

जानकारी के मुताबिक, यह बैठक पूर्वी लद्दाख में चीन की ओर मोल्डो सीमावर्ती क्षेत्र (Chushul-Moldo Border Personnel Meeting) में रविवार सुबह 10 बजे शुरू हुई. इसमें भारतीय का नेतृत्व लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया. सूत्रों ने बताया कि भारत ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि एलएसी पर टकराव के सभी बिंदुओं से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया दोनों तरफ से एक साथ शुरू होनी चाहिए. कोई भी एकतरफा दृष्टिकोण उसे स्वीकार नहीं है. मीटिंग में भारत की ओर से यह भी कहा गया है कि एलएसी पर अप्रैल, 2020 से पहले की स्थिति बहाल हो.

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6 नवंबर को हुई आठवें दौर की वार्ता
इससे पहले, 6 नवंबर को हुई आठवें दौर की वार्ता में दोनों पक्षों ने टकराव वाले खास स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने पर व्यापक चर्चा की थी. आठवें दौर की बैठक में दोनों पक्ष दोनों देशों के नेताओं द्वारा संपन्न महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने, सेना के संयम बनाए रखने और गलतफहमी से बचने पर सहमत हुए थे. इसके साथ दोनों पक्ष इस बार की वार्ता के आधार पर सैन्य और राजनयिक संपर्क रखकर अन्य समस्याओं का समाधान करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर भी सहमत हुए थे.

पिछले साल 5 मई से जारी है तनाव
पूर्वी लद्दाख में पहली बार पिछले साल 5 मई को दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराव हुआ था. उसके बाद से भारी ठंड के इस मौसम में पूर्वी लद्दाख में भारत ने सभी अहम बिंदुओं पर 50 हजार से अधिक जवानों को तैनात कर रखा है. ये जवान किसी भी हालात का सामना करने के लिए हर वक्त तैयार हैं. चीन ने भी अपनी तरफ इतने ही सैनिकों की तैनाती की है.

30 अगस्त को भारत ने मजबूत कर ली थी अपनी पोजिशन
30 अगस्त को भारत ने रेचन ला, रेजांग ला, मुकर्पी और टेबलटॉप जैसे पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर महत्वपूर्ण पहाड़ी ऊंचाइयों पर अपनी पहुंच सुनिश्चित कर ली थी, जो तब तक मानव रहित जगह होती थी. भारत ने ब्लैकटॉप के पास भी कुछ तैनाती की है. चीन द्वारा भड़काऊ सैन्य कदम उठाने की कोशिश के बाद भारत की ओर से यह कदम उठाए गए हैं.

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WMCC का भी नहीं निकला था नतीजा
पूर्वी लद्दाख में विभिन्न पवर्तीय क्षेत्रों में भारतीय थल सेना के कम से कम 50,000 जवान युद्ध की तैयारियों के साथ अभी तैनात हैं. अधिकारियों के अनुसार चीन ने भी इतनी ही संख्या में अपने सैनिकों को तैनात किया है. पिछले महीने, भारत और चीन ने भारत-चीन सीमा मामलों पर ‘परामर्श व समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र’ (डब्ल्यूएमसीसी) ढांचा के तहत एक और दौर की राजनयिक वार्ता की थी, लेकिन इस वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था.
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