भारत में मार्च के बाद पहली बार बढ़ा ट्रांसमिशन रेट, जुलाई आखिर तक 6 लाख तक पहुंच सकते हैं एक्टिव केस: स्टडी

भारत में मार्च के बाद पहली बार बढ़ा ट्रांसमिशन रेट, जुलाई आखिर तक 6 लाख तक पहुंच सकते हैं एक्टिव केस: स्टडी
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में ट्रांसमिशन रेट गिरता गया और यह 26 जून तक 1.11 तक पहुंच गया.

स्टडी के मुताबिक महीने के अंत तक कुल सक्रिय कोविड -19 मामले (Active Covid-19 Cases) 6 लाख तक पहुंच सकते हैं. जबकि महाराष्ट्र (Maharashtra) में 21 जुलाई तक 1.5 लाख से अधिक सक्रिय मामले हो सकते हैं, तमिलनाडु (Tamilnadu) में भी एक्टिव केस की संख्या 1 लाख तक पहुंच सकती है

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नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार की दर में मार्च के बाद से पहली बार इजाफा हुआ है, इंस्टीट्यूट ऑफ मेथेमेटिकल साइंसेस, चेन्नई (Institute of Mathematical Sciences, Chennai )mकी एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोनोवायरस रिप्रोडक्शन नंबर या आर पहले से संक्रमित व्यक्ति द्वारा संक्रमित हुए लोगों की संख्या का अनुमान लगाता है. भारत में, आर 4 मार्च के बाद से महीनों के लिए 1.83 से कम हो रहा था, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में इसमें बढ़ोतरी होती दिख रही है, जो दूसरे अनलॉकिंग चरण को चिह्नित करता है.

संस्थान की डॉ सिताभ्रा सिन्हा ने कहा प्रशासन चाहता है कि रिप्रोडक्शन नंबर 1 पर पहुंच जाए, क्योंकि ये कोविड-19 के कर्व के फ्लैट होने के संकेत देता है. आर नंबर फिलहाल 1.19 पर है जो कि दिखाता है कि औसतन एक संक्रमित व्यक्ति से 1.19 लोगों में संक्रमण फैल रहा है. सिन्हा के अनुसार, मामले की संख्या बढ़ने या कम होने में किसी भी प्रभाव को दिखने में लगभग 10 दिन से दो सप्ताह तक का समय लगता है. यही कारण है कि वह मानती हैं कि अब जो वृद्धि देखी जा रही है, उसका उद्गम उन घटनाओं में हुआ है, जो जून के मध्य में या उसके बाद हुईं.

उन्होंने रिपोर्ट के हवाले से कहा कि लब्बोलुआब यह है कि भारत अब इस स्थिति में था जैसा कि वह मई और जून की शुरुआत में था, और जून के अंत में देखी गई कमी न तो निरंतर है और न ही इसमें सुधार ही हुआ है.



कुछ राज्य कर रहे बेहतर प्रदर्शन
सिन्हा ने कहा हालांकि कुछ राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्ली में 13 से 16 जून के बीच आर नंबर 1.25 था जो कि अब कम होकर 1 हो गया है. राजधानी में 21 जून से कुछ दिन तक आर नंबर 1 से कुछ ज्यादा था. सिन्हा ने कहा कि कर्व "उप-घातीय" था जिसका अर्थ है कि यह कुछ समय के लिए तेजी से नहीं बढ़ रहा है. हरियाणा भी इसी तरह का पैटर्न दिखा रहा है.

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जब तमिलनाडु ने पर्याप्त रूप से कर्व को फ्लैट कर लिया था तो ये केवल दूसरी बार ऐसा था कि राज्य में कई मामलों में इस तरह के सकारात्मक रुझान दिखाई दिये.

मार्च से जून तक ऐसा रहा भारत का आंकड़ा
मार्च में, भारत में कोरोनोवायरस आर संख्या 1.83 थी, जबकि ये दर वुहान में 2.14 और इटली में 2.73 थी. 6 अप्रैल से 11 अप्रैल के बीच भारत का आर नंबर गिरकर 1.55 पर आ गया और बाद में 1.49 तक गिरा और जून की शुरुआत में लॉकडाउन छूट के बीच 1.2 तक पहुंच गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में ट्रांसमिशन रेट गिरता गया और यह 26 जून तक 1.11 तक पहुंच गया. अनलॉक का एक महीना होने के बाद ट्रांसमिशन रेट अब 2 से 5 जुलाई के बीच बढ़कर 1.19 हो गया है.

कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक आर नंबर हैं जे कि क्रमशः 1.66, 1.65 और 1.32 हैं.

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गुजरात और बंगाल की स्थिति में हो रहा सुधार
जो राज्य पहले मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज कर रहे थे, वहां ये गति धीमी हो गई है; गुजरात 1.15 ट्रांसमिशन नंबर पर है जबकि पश्चिम बंगाल 1.1 पर. सिन्हा ने कहा कि आर में मौजूदा वृद्धि का श्रेय कुछ दक्षिणी राज्यों में उच्च आर नंबर को दिया जा सकता है.

सिन्हा ने कहा कि असम और राजस्थान जैसे राज्य अनुमानित संख्या के हिसाब से आर नंबर के लिए पर्याप्त नहीं हैं. उनके मॉडलिंग के अनुसार, महीने के अंत तक कुल सक्रिय कोविड -19 मामले 6 लाख तक पहुंच सकते हैं. जबकि महाराष्ट्र में 21 जुलाई तक 1.5 लाख से अधिक सक्रिय मामले हो सकते हैं, तमिलनाडु में भी एक्टिव केस की संख्या 1 लाख तक पहुंच सकती है.
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