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RCEP समझौते से बाहर रहने की घोषणा कर PM मोदी ने दिया जबरदस्त भाषण, हो रही तारीफ

News18Hindi
Updated: November 4, 2019, 10:36 PM IST
RCEP समझौते से बाहर रहने की घोषणा कर PM मोदी ने दिया जबरदस्त भाषण, हो रही तारीफ
पीएम मोदी ने मजबूती के साथ रखा भारत का पक्ष, RCEP समझौते पर हस्ताक्षर न करने की हुई तारीफ (फाइल फोटो)

पीएम मोदी (PM Modi) ने RCEP समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए कहा, "न ही 'गांधी जी (Gandhi Ji) का तावीज' और न ही मेरे अंतर्मन की आवाज मुझे RCEP में शामिल होने की अनुमति देता है."

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  • Last Updated: November 4, 2019, 10:36 PM IST
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बैंकॉक. भारत ने RCEP समझौते (Regional Comprehensive Economic Partnership) में शामिल न होने का निर्णय लिया है. प्रधानमंत्री (PM) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भारत की समस्याओं का संतोषजनक निपटारा न होने के चलते अपने पक्ष को लेकर पूरी तरह से मजबूत बने हुए थे, उन्होंने पहले ही कह रखा था कि भारत (India) के केंद्रीय हितों (Core Interest) के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा. इस समझौते में शामिल होने से इनकार करते हुए सोमवार को पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि मेरा अंतर्मन इस समझौते में भारत के शामिल होने की इजाज़त नहीं देता, भारत इसका हिस्सा नहीं होगा.

RCEP समझौते में इसका असली मकसद उभरकर सामने नहीं आता है. न ही इसका निष्कर्ष, निष्पक्ष और संतुलित (Fair or Balanced) है. जो मुद्दे इसमें बाधा बन रहे थे, वे थे-

-आयात वृद्धि के खिलाफ अपर्याप्त सुरक्षा
-चीन के साथ मतभेद

-2014 को बेस ईयर मान जाना
-मार्केट में दखल और गैर-टैरिफ बाधाओं पर कोई विश्वसनीय आश्वासन नहीं

अमित शाह और नड्डा ने बताया गर्व की बात
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जिस तरह से भारतीय हितों की अंतरराष्ट्रीय मंच पर पीएम मोदी ने रक्षा की है, उसकी चौतरफा तारीफ हो रही है. बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने RCEP समझौते पर हस्ताक्षर न करने के फैसले की तारीफ की है. वहीं बीजेपी के अध्यक्ष (कार्यकारी) जेपी नड्डा (JP Nadda) ने भी ट्वीट कर मजबूती से भारतीय हितों के साथ खड़े रहने के लिए पीएम को बधाई दी है.



PM मोदी ने RCEP समिट के दौरान अपने भाषण में कहीं ये बातें-
भारत ज्यादा बड़े क्षेत्रीय एकीकरण के साथ ही मुक्त व्यापार नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पालन के लिए खड़ा है. भारत शुरुआत से ही RCEP वार्ता में सक्रिय, रचनात्मक और सार्थक रूप से लगा हुआ है. भारत इस डील में लेन-देन के मामले में बराबरी लाने के पोषित उद्देश्य से काम कर रहा था.

आज, जब हम RCEP पर पिछले सात सालों में हुई बातचीत को देखते हैं तो बहुत सी बातें, जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार की परिस्थितियां भी शामिल हैं, बदल चुके हैं. हम इन बदलावों को अनदेखा नहीं कर सकते. RCEP समझौते का वर्तमान स्वरूप इस समझौते की मूल भावना और RCEP समझौते के मार्गदर्शक सिद्धांतों को पूरी तरह से प्रदर्शित नहीं करते हैं.

 



यह भारत के अलग मुद्दों और चिंताओं को भी इस स्थिति में संतोषजनक तरीके से नहीं उठाता है, ऐसे में भारत के लिए RCEP समझौते में शामिल होना संभव नहीं है.

हमारे किसान (Farmers), व्यापारी, पेशेवर लोग और उद्योग ऐसे फैसलों में दांव पर लगे हुए हैं. इतने ही महत्वपूर्ण मजदूर और उपभोक्ता भी हैं जो कि भारत में एक बड़े मार्केट का निर्माण करते हैं और खरीदने की क्षमता के हिसाब से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (Economy) का निर्माण करते हैं.

सालों पहले RCEP को भारतीय व्यापारियों, उद्यमियों और साधारण लोगों ने अपनाया था ताकि इस क्षेत्र के साथ अच्छे से संपर्क किया जा सके. शताब्दियों से, इन संपर्कों और संबंधों ने हमारी मिली-जुली समृद्धि में बहुमूल्य योगदान दिया है.

RCEP समझौते को सभी भारतीयों के हितों को ध्यान में रखते हुए समझने के दौरान, मुझे कोई भी सकारात्मक उत्तर नहीं मिला. इसलिए न ही 'गांधी जी का तावीज' ( गांधी जी कहते थे, जो कदम मैं उठाने जा रहा हूँ, वह क्‍या उस गरीब के कोई काम आएगा? क्‍या उसे इस कदम से कोई लाभ होगा?) और न ही मेरे अंतर्मन की आवाज मुझे RCEP में शामिल होने की अनुमति देता है.

 

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First published: November 4, 2019, 9:23 PM IST
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