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अमेरिकी लॉबिंग के बीच रूस संग रक्षा संबंधों पर मुहर लगाएगा भारत, जानें कितना खास है पुतिन का यह दौरा

अमेरिकी लॉबिंग के बीच रूस संग रक्षा संबंधों पर मुहर लगाएगा भारत, जानें कितना खास है पुतिन का यह दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (फाइल फोटो)

India Russia Defence Ties: भारत और रूस के प्रौद्योगिक और विज्ञान पर संयुक्त आयोग की घोषणा करने के अलाव शिखर वार्ता में सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए अगले दशक की रूपरेखा तय करने की भी संभावना है. दोनों पक्ष भारतीय सशस्त्र सेनाओं के लिए 200 दोहरे इंजन वाले कामोव-226टी हल्के हेलीकॉप्टर के संयुक्त उत्पादन के लिए लंबित परियोजना पर विचार विमर्श करने के अलावा कई रक्षा खरीद प्रस्तावों पर भी बातचीत कर सकते हैं. व्लादिमीर पुतिन सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे, जबकि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगू रविवार रात को पहुंच रहे हैं.

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    नई दिल्ली/महा सिद्दीकी. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) की सोमवार की यात्रा से पहले भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि मॉस्को उसका करीबी रक्षा साझेदार बना रहेगा. सरकारी सूत्रों ने बताया है कि पुतिन की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, संस्कृति, रक्षा, अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई अहम समझौतों पर दस्तखत होंगे. इनमें से सबसे महत्वपूर्ण रक्षा क्षेत्र गोहा, जैसे एके-203 असॉल्ट राइफल (AK-203 Assault Rifles) का विनिर्माण.

    रिसीप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट (आरईएलओएस) पर भी सोमवार को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. इस तरह के समझौते ईंधन और अन्य प्रावधानों तक आपसी आधार पर पहुंच को सुविधाजनक बनाने में सेना के लिए काफी मददगार साबित होते हैं, जब वे अपने देश से दूर काम कर रहे होते हैं.

    रक्षा खरीद में भारत अपनी स्वायत्तता जारी रखेगा
    यहां तक ​​​​कि जब संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) भारत से और अधिक रक्षा खरीद के लिए दबाव बनाता है और रूस से एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली (S-400 Air Defence Missile System) की खरीद की वजह से सीएएटीएसए प्रतिबंध (CAATSA Sanction) का खतरा बना रहता है, सरकारी सूत्रों ने कहा कि रक्षा खरीद में भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता जारी रखेगा. उन्होंने बताया कि S-400 की पहली डिलीवरी शुरू हो चुकी है.

    रूस के साथ पहली बार भारत की 2+2 वार्ता
    लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को दूसरा बढ़ावा दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच पहली 2+2 वार्ता के रूप में मिलेगा. रूस चौथा देश बन जाएगा जिसके साथ भारत यह वार्ता करेगा. इससे पहले भारत अन्य तीन क्वाड पार्टनर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ इस तरह की वार्ता कर चुका है.

    2+2 वार्ता में लश्कर और जैश जैसे समूहों समेत आतंकवाद पर चर्चा की संभावना
    पहली ‘टू प्लस टू’ रक्षा और विदेश मंत्री स्तरीय वार्ता में दोनों पक्षों के अफगानिस्तान में स्थिति और लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों समेत आतंकवाद के बढ़ते खतरे पर भी बातचीत करने की संभावना है. ऐसा बताया जा रहा है कि शिखर वार्ता के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में सीमा पार आतंकवाद और अफगान संकट के कारण सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर भारत की चिंताओं को व्यक्त किया जा सकता है.

    क्वाड पर रूस की चिंताओं को लेकर भारत ने क्या कहा
    यह पूछे जाने पर कि क्या रूस के साथ 2+2 वार्ता शुरू करना एक संतुलन बनाने की कोशिश है क्योंकि मॉस्को ने क्वाड और इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) की वर्तमान अवधारणा पर आपत्ति व्यक्त की है, सरकारी सूत्रों ने कहा कि नई दिल्ली किसी भी गुट का नहीं है. उन्होंने कहा कि, इसके उलट रूस 2+2 वार्ता के लिए सबसे “स्वाभाविक भागीदार” है, जो वर्षों से राजनीतिक और रक्षा संबंधों की पहुंच को देखता है. क्वाड पर रूस की चिंताओं के मद्देनजर सरकारी सूत्रों ने कहा कि नई दिल्ली ने मास्को को बताया है कि क्वाड चार देशों के बीच एक मुद्दा आधारित सहयोग है.

    रूस ने किया इंडो-पैसिफिक की जगह एशिया-पैसिफिक का इस्तेमाल
    दिलचस्प बात यह है कि रूसी दूतावास ने अपने पहले 2+2 संवाद की घोषणा करते हुए कहा कि एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) पर चर्चा होगी. भारत-प्रशांत (Indo-Pacific) के बजाय इस्तेमाल किए जा रहे ‘एशिया-पैसिफिक’ शब्द ने एक बार फिर व्यापक असहमति को उजागर किया कि दोनों के बीच इंडो-पैसिफिक की अवधारणा और अवधारणा जारी है. दरअसल, इंडो-पैसिफिक को रूसियों द्वारा एक अमेरिकी अवधारणा के रूप में देखा जाता है.

    चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग भारत-रूस सहयोग का उदाहरण
    हालांकि दोनों देशों में मतभेद बने हुए हैं, फिर भी सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत-प्रशांत में चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग भारतीय-रूसी सहयोग का एक उदाहरण है. 2019 में व्लादिवोस्तोक की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समुद्री मार्ग में कनेक्टिविटी के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जो लगभग 10,300 किमी तक फैला है और जहाजों की आवाजाही के समय को 40 दिनों से लगभग 24 दिनों तक कम करता है.

    वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के लिए रूस के 11 गवर्नर्स को निमंत्रण
    रूस के सुदूर पूर्व में भी भारत निवेश कर रहा है, जो कि एक बार फिर हिंद-प्रशांत में सहयोग के दायरे में आ रहा है. खास बात यह है कि भारत ने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के लिए रूस के सुदूर पूर्व के 11 गवर्नर्स को निमंत्रण दिया है. रूस के कुछ सुदूर पूर्व क्षेत्रों ने तेल और गैस परियोजनाओं में भारतीय निवेश में रुचि व्यक्त की है. वर्ष 2025 तक दोनों पक्षों की ओर से 30 अरब डॉलर के कुल निवेश लक्ष्य को पहले ही पूरा कर लिया गया है और अब इसे संशोधित कर 50 अरब डॉलर कर दिया गया है. यह निवेश बड़े पैमाने पर ऊर्जा क्षेत्र में किया गया है.

    पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बारे में रूस को बता सकता है भारत
    सूत्रों के अनुसार, भारत, रूस को विभिन्न क्षेत्रीय घटनाक्रम पर अपनी चिंताओं के साथ ही पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद पर अपना रुख भी बता सकता है. विवाद को हल करने में रूस की संभावित भूमिका के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने बताया कि भारत का हमेशा से मानना है कि मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से हल करना चाहिए. उन्होंने बताया कि रूस में कोविड-19 के मौजूदा हालात के बावजूद राष्ट्रपति पुतिन का भारत की यात्रा करने का फैसला यह दिखाता है कि वह भारत के साथ संबंध को कितनी महत्ता देते हैं.

    सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे व्लादिमीर पुतिन
    पुतिन सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे, जबकि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगू रविवार रात को पहुंच रहे हैं. भारत और रूस के प्रौद्योगिक और विज्ञान पर संयुक्त आयोग की घोषणा करने के अलाव शिखर वार्ता में सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए अगले दशक की रूपरेखा तय करने की भी संभावना है. दोनों पक्ष भारतीय सशस्त्र सेनाओं के लिए 200 दोहरे इंजन वाले कामोव-226टी हल्के हेलीकॉप्टर के संयुक्त उत्पादन के लिए लंबित परियोजना पर विचार विमर्श करने के अलावा कई रक्षा खरीद प्रस्तावों पर भी बातचीत कर सकते हैं.

    Tags: India, Narendra modi, Russia, Vladimir Putin

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