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जमीन से हवा में मार करने वाले आकाश-1S मिसाइल का सफल परीक्षण

News18Hindi
Updated: May 28, 2019, 5:11 AM IST
जमीन से हवा में मार करने वाले आकाश-1S मिसाइल का सफल परीक्षण
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

यह मिसाइल कई मायनों में खास है. यह मिसाइल ड्रोन, क्रूज मिसाइल और फाइटर जेट्स को जमीन से हवा से ध्‍वस्‍त कर सकती है.

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सोमवार को आकाश-1एम मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. यह मिसाइल सतह से हवा में मार करके दुश्‍मन को खत्‍म कर सकती है. पिछले दो दिनों में आकाश-1एम मिसाइल का दूसरी बार परीक्षण किया गया.

यह मिसाइल कई मायनों में खास है. यह मिसाइल ड्रोन, क्रूज मिसाइल और फाइटर जेट्स को जमीन से हवा से ध्‍वस्‍त कर सकती है. यह सुपरसॉनिक मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 25 किलोमीटर है. इस मिसाइल की अधिकतम रफ्तार 3087 किलोमीटर प्रति घंटा है. हालांकि यह मीडियम रेंज की मिसाइल है.

वहीं अभी कुछ दिन पहले ही भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया. दुनिया की किसी भी वायुसेना के पास यह क्षमता नहीं है. वायुसेना ने परीक्षण के बाद बताया कि इस मिसाइल ने पहले से तय मार्ग पर चलते हुए जमीन पर मौजूद लक्ष्य को भेदने में सफलता हासिल की.

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वायुसेना ने कहा कि ब्रह्मोस किसी भी मौसम में, दिन या रात कभी भी, जमीन या समुद्र कहीं भी सटीक हमला करने में सक्षम है. साथ ही वायुसेना ने बताया कि ब्रह्मोस के सुखोइ्र के साथ जुड़ने पर सेना को नई ताकत और रणनीतिक तौर पर अपेक्षित पहुंच हासिल होगी.

दूसरा सफल परीक्षण
वायुसेना ने बताया कि यह मिसाइल का एयरक्राफ्ट से किया गया दूसरा सफल परीक्षण था. इससे पहले नवंबर 2017 में एक परीक्षण किया गया था. इस दौरान बंगाल की खाड़ी में टार्गेट रखा गया था. गौरतलब है कि ब्रह्मोस 2.5 टन वजनी है और यह 290 किमी की दूरी तय कर सकती है. इसकी गती मैक 3 (1 मैक बराबर होता है आवाज की गति के) है जिसके चलते दुश्मन इसे किसी भी तरह रोकने में नाकाम साबित होंगे.

विमान में किए गए बदलाव
ब्रह्मोस को सफलता पूर्वक विमान से लॉन्च करने के लिए एसयू 30 एमकेआई एयरक्राफ्ट में काफी बदलाव किए गए. यह बदलाव हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने किए और वायुसेना को पहला विमान फरवरी 2015 में सौंपा गया था. ब्रह्मोस इससे पहले तक लड़ाकू जहाजों और जमीन से ही लॉन्च की जा सकती थी.

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First published: May 28, 2019, 5:11 AM IST
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