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भारत-फ्रांस का सबसे बड़ा नौसैन्य युद्धाभ्यास, चीन को संदेश

News18Hindi
Updated: May 10, 2019, 9:40 PM IST
भारत-फ्रांस का सबसे बड़ा नौसैन्य युद्धाभ्यास, चीन को संदेश
भारत और फ्रांस की नौसेना गोवा तट पर अब तक के सबसे बड़े युद्धाभ्यास में भाग ले रही हैं.

भारत और फ्रांस दक्षिण चीन सागर में तनाव पैदा करने वाले चीन के क्षेत्रीय दावों से चिंतित हैं. इस नौसैन्य युद्धाभ्यास को काफी महत्वपूर्ण और चीन के लिए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.

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भारत और फ्रांस ने शुक्रवार को हिंद महासागर में अपने सबसे बड़े नौसैन्य युद्धाभ्यास में भाग लिया. दरअसल, भारत और फ्रांस चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव तथा दक्षिण चीन सागर में तनाव पैदा करने वाले इसके क्षेत्रीय दावों को लेकर चिंतित हैं. ऐसे में दोनों देशों के इस नौसैन्य युद्धाभ्यास को काफी महत्वपूर्ण और चीन के लिए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.

फ्रांस के बेड़े की कमान संभाल रहे रियर एडमिरल ऑलिवियर लेबास ने कहा, 'हमें लगता है कि हम क्षेत्र में ज्यादा स्थिरता ला सकते हैं. इस क्षेत्र में स्थिरता रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कारोबार को लेकर बहुत कुछ दांव पर लगा है.' बता दें कि एशिया, यूरोप और पश्चिमी एशिया के बीच ज्यादातर कारोबार समुद्र के जरिये होता है.

दोनों देशों के छह-छह युद्धपोत ले रहे हिस्सा 

गोवा के तट पर 17वें सालाना युद्धाभ्यास में भाग लेने वाला करीब 42 हजार टन वजनी 'चार्ल्स डि गॉले' फ्रांस के कुल 12 युद्धपोतों और पनडुब्बियों में एक है. दोनों देशों के छह-छह युद्धपोत और पनडुब्बियां इस नौसैन्य युद्धाभ्यास में भाग ले रहे हैं. फ्रांस के अधिकारियों का कहना है कि यह युद्धाभ्यास 2001 में शुरू हुए इस अभियान का अब तक का सबसे व्यापक अभ्यास है.



हिंद महासागर में बढ़ रहा है चीन का दबदबा 

हिंद महासागर में भारत का पारंपरिक दबदबा चीन के बढते दबाव का सामना कर रहा है. चीन ने इस क्षेत्र में युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती की है. साथ ही 'बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव' (BRI) के जरिये वाणिज्यिक आधारभूत ढांचे के बड़े नेटवर्क का निर्माण भी कर रहा है, जिसका भारत ने बार-बार कड़ा विरोध किया है.

फ्रांस ने अप्रैल में चीन को कर दिया था नाराज 

पिछले महीने फ्रांस ने ताइवान वाटर ट्राएंगल में एक युद्धपोत भेजकर चीन को नाराज कर दिया था. फ्रांस का युद्धपोत चीन की नौसेना की नजर में आ गया. इसके बाद चीन ने आधिकारिक विरोध जताया था. इस पर फ्रांस ने कहा कि वह अपने नौवहन की स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर रहा था. फ्रांसीसी राजनयिकों का कहना है कि इस युद्धाभ्यास का उस घटना से कोई लेना देना नहीं है.

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First published: May 10, 2019, 8:50 PM IST
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