इंडिया क्लब जकार्ता से भारत को मिले 40 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर्स, ग्रामीण इलाकों को होगा फायदा

मेडिस्कोप इंडिया को जकार्ता के इंडिया क्लब जकार्ता की तरफ से 40 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की मदद मिली है.

मेडिस्कोप इंडिया को जकार्ता के इंडिया क्लब जकार्ता की तरफ से 40 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की मदद मिली है.

India Club Jakarata: डॉक्टर दुबे के प्रयासों के चलते मेडिस्कोप इंडिया को जकार्ता के इंडिया क्लब जकार्ता की तरफ से 40 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की मदद मिली है. इसके चलते अब मेडिकल ऑक्सीजन (Medical Oxygen) के अभाव का सामना कर रहे इलाकों में भी आपूर्ति की जा सकेगी.

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मुंबई. भारत अब कोरोना वायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर से उबर रहा है. मार्च के बाद से मई के मध्य तक देश ने ऐसा दौर भी देखा जहां, मरीज बुनियादी चिकित्सा भी हासिल नहीं कर पा रहे थे. ऑक्सीजन (Oxygen) और दवाओं की कमी के चलते कई मरीजों की जान जाने की खबरें सामने आईं. हालात तब और बिगड़ते नजर आए, जब कोरोना वायरस की दस्तक ग्रामीण इलाकों में हुई. हालांकि, डॉक्टर सुनीता दुबे की सक्रियता के चलते ऑक्सीजन की कमी इन क्षेत्रों को खास प्रभावित नहीं कर सकी.

डॉक्टर दुबे के प्रयासों के चलते मेडिस्कोप इंडिया को जकार्ता के इंडिया क्लब जकार्ता की तरफ से 40 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर की मदद मिली है. इसके चलते अब मेडिकल ऑक्सीजन के अभाव का सामना कर रहे इलाकों में भी आपूर्ति की जा सकेगी. डॉक्टर दुबे मेडिस्कोप इंडिया और व्ही डॉक्टर संस्था की अध्यक्ष भी हैं.

वो कहती हैं कि ग्रामीण और दूर दराज इलाको में कोविड के मरीजों की जान बचाने के लिए एंबुलेंस और घर घर मेडिसिन किट पहुंचना बहुत जरूरी है क्योंकि ग्रामीण इलाके में होने वाली मौतें ज्यादातर पैसे की कमी के चलते हास्पिटल तक ना जाना और जांच और ट्रीटमेंट ना होने की वजह से हो रही है जो दुखद है और इसके लिए और प्रयास जरूरी हैं.


एनजीओ ने जुटाए एक लाख डॉलर

भाषा के अनुसार, भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर से प्रभावित दिव्यांगजनों के लिए एक भारतीय-अमेरिकी गैर सरकारी संगठन ने 1,00,000 डॉलर इकट्ठे किए हैं. लॉस एंजिलिस के ‘वॉइस ऑफ स्पेशली एबल्ड पीपुल’ (वीओएसएपी) ने सोमवार को बताया कि उसने भारत में दिव्यांग लोगों के लिए 1,00,000 डॉलर जुटाए हैं, जिससे उन्हें वैश्विक महामारी के दौरान राशन, पीपीई किट और अन्य सामान मुहैया कराया जाएगा. एनजीओ ने एक बयान में कहा कि दिव्यांगजन (बच्चे या वरिष्ठ नागरिक या वयस्क) इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, इनमें अधिक लोग मारे गए हैं,उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है और वे जीवन के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं.

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