देश में कोरोना के बेलगाम होने के पीछे कहीं वायरस का डबल म्यूटेंट तो नहीं, जानें सबकुछ

वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में मिले कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट्स ने सबको चिंतित किया है. फाइल फोटो

वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में मिले कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट्स ने सबको चिंतित किया है. फाइल फोटो

Coronavirus Double Mutant: हावर्ड मेडिकल स्कूल के पूर्व प्रोफेसर विलियम ए. हसेलटाइन ने 12 अप्रैल को लिखा था कि कोरोना के B.1.617 वैरिएंट के बहुत खतरनाक होने के पूरे लक्षण हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 18, 2021, 5:31 AM IST
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नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के रोजाना 2 लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. विशेषज्ञ बढ़ते संक्रमण के लिए वायरस के डबल म्यूटेशन को जिम्मेदार मान रहे हैं, जिसकी वजह से संक्रमण के मामले भारत, ब्राजील को पीछे छोड़ते हुए दूसरे नंबर पहुंच गया है. भारत में कोरोना के 1 करोड़ 40 लाख से ज्यादा मामले हैं और 1 लाख 75 हजार से ज्यादा संक्रमण के चलते काल के गाल में समा गए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की मारिया वान करखोवे ने शुक्रवार को कहा कि इस तरह का म्यूटेशन दुनिया के अन्य देशों में भी देखने को मिला है, और ये चिंता का विषय है.

डबल म्यूटेशन को जानिए

कोरोना का नया वैरिएंट B.1.617 भारत में शुरू में दो म्यूटेशन E484Q और L452R के रूप में पहचाना गया था. इसकी पहचान पिछले साल एक भारतीय वैज्ञानिक ने की थी, बीते सोमवार को इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन को जानकारी दी गई. दरअसल वायरस लगातार स्वरूप बदलता रहता है और म्यूटेशन के बाद वायरस कभी खतरनाक हो जाता है, कभी कमजोर पड़ जाता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च के अंत में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के डबल म्यूटेशन को स्वीकार किया था, लेकिन इसके प्रभाव को कमजोर आंकते रहे.

ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, जर्मनी, आयरलैंड, नामीबिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, ब्रिटेन और अमेरिका में वायरस का डबल म्यूटेशन देखने को मिला है. हालांकि 16 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया था कि वायरस के डबल म्यूटेशन के चलते संक्रमण में वृद्धि का कोई सबूत नहीं है.
नया वैरिएंट ज्यादा खतरनाक?

शोधकर्ता इस बारे में अभी जांच कर रहे हैं. हालांकि L452R म्यूटेशन को लेकर अमेरिकी अध्ययनों में काफी कुछ कहा गया है. विशेषज्ञों के मुताबिक इस म्यूटेशन से संक्रमण की दर में 20 प्रतिशत का इजाफा हो जाता है और एंडी बॉडी के प्रभाव को 50 प्रतिशत से ज्यादा कम कर देता है.

वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में मिले कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट्स ने सबको चिंतित किया है. अध्ययन में इन वैरिएंट्स को काफी संक्रामक बताया गया है. कुछ अध्ययन में इन्हें जानलेवा करार दिया गया है, तो कुछ में इन्हें ज्यादा तेजी से संक्रमण फैलाने वाला कहा गया है. भारत में मिले डबल म्यूटेशन वैरिएंट ने वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है.



हावर्ड मेडिकल स्कूल के पूर्व प्रोफेसर विलियम ए. हसेलटाइन ने 12 अप्रैल को लिखा था कि कोरोना के B.1.617 वैरिएंट के बहुत खतरनाक होने के पूरे लक्षण हैं. हमें इसकी पहचान करने के साथ इसके संक्रमण को रोकने का हरसंभव प्रयास करना होगा.

B.1.617 के खिलाफ वैक्सीन कारगर?

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च में वैज्ञानिक अपर्णा मुखर्जी ने कहा कि B.1.617 वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कितनी कारगर यह कहना बहुत मुश्किल है. नए वैरिएंट्स को लेकर भारत में रिसर्च चल रही है कि कहीं B.1.617 इम्युन सिस्टम को चकमा तो नहीं दे रहा. मतलब कहीं वायरस का वैरिएंट शरीर में मौजूद एंटी बॉडी से बच निकलने में कामयाब तो नहीं हो रहा.



विश्व स्वास्थ्य संगठन की डॉक्टर मारिया वान करखोवे ने कहा, "ये हमारी रडार पर है और हम इस बारे में जांच कर रहे हैं. कहने का मतलब है कि इसे लेकर दुनिया भर में जांच चल रही है."
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