Covid19: मामलों में वृद्धि के बाद भी भारत में मृत्यु दर क्यों हैं कम?

कोविड -19 (Covid- 19) में मौतों के रोकथाम के लिए जर्मनी  को एक मॉडल के रूप में बताया उसके भारत के समान मामले / मृत्यु अनुपात हैं.
कोविड -19 (Covid- 19) में मौतों के रोकथाम के लिए जर्मनी को एक मॉडल के रूप में बताया उसके भारत के समान मामले / मृत्यु अनुपात हैं.

कोविड -19 (Covid- 19) में मौतों के रोकथाम के लिए जर्मनी को एक मॉडल के रूप में बताया उसके भारत के समान मामले / मृत्यु अनुपात हैं.

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निखिल नरैन
नई दिल्ली. 
भारत में कोविड-19 (Covid-19 India) मामलों में हाल ही में बीते कुछ दिनों के भीतर ज्यादा मामले बढ़े हैं. 10 से 15 मई के बीच के छह दिनों में औसतन 3,829 मामले बढ़े. 16 से 21 मई के बीच पिछले छह दिनों में यह संख्या बढ़कर 5,407 हो गई है. हालांकि यह इजाफा आश्चर्यजनक नहीं है. लॉकडाउन 2.0 के बाद छूट में ढील दी गई. दूसरा लॉकडाउन 3 मई को खत्म हुआ और इसमें भी कुछ छूट दी गई है. 17 मई को लॉकडाउन 3.0 समाप्त होने पर और रियायतें दी गई हैं. इसके अलावा टेस्टिंग में वृद्धि हुई है और भारत अपने पीक पर जा रहा है जिसके जून तक खत्म होने की उम्मीद है.

इन सभी वजहों को ध्यान में रखते हुए कोरोना के मामलों में भारत में हो रही वृद्धि  की दर खतरनाक होने के करीब नहीं है. जैसा कि कुछ विशेषज्ञों द्वारा भविष्यवाणी की गई थी नए संक्रमणों की संख्या में वृद्धि अभी भी लीनियर है और कहीं भी एक्स्पोनेन्शल नहीं है.

लेकिन जो बात हैरान करती है वह यह है कि मामलों में वृद्धि दर्ज किये जाने के बाद भारत में कोविड -19 की मौतों की संख्या कम है. ट्रैकिंग साइट वर्ल्डमीटर के अनुसार भारत में किसी भी दिन 200 मौतें नहीं हुई हैं 4 मई को अधिकतम मौते 175 का आंकड़ा छू पाई थीं.
यहां तक ​कि पिछले चार दिनों में 5,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए और एक भी दिन में मौतों की संख्या 150 से अधिक नहीं थी. मौतों की औसत संख्या में 10 से 15 मई के बीच 109 से 16 मई से 21 मई के बीच मामूली वृद्धि देखी गई.





भारत में प्रति मौत के मामलों की औसत संख्या की तुलना दुनिया के कुछ अन्य गंभीर रूप से प्रभावित देशों से करते हैं जब वहां मामलों में सबसे खराब वृद्धि देखी. इनमें से कुछ देश (पश्चिमी यूरोप और अमेरिका) अपने पीक पर हैं तो वहीं कुछ अन्य जैसे ब्राजील, पेरू और रूस को अभी तक अपने सबसे बुरे दौर में हैं. 16-21 मई के दौरान भारत की मृत्यु के मामले 39.18 है.

भारत और लगभग सभी अन्य देशों के बीच जो विषमता है वह आश्चर्यजनक है. अमेरिका में 6 अप्रैल से 11 के बीच लगातार छह दिनों में 30,000 से अधिक मामल सामने आए. इस अवधि में इसकी औसत संख्या 2,045 थी. अमेरिका में सबसे खराब वृद्धि की अवधि के दौरान लगभग 16 मामले - मृत्यु अनुपात थे. ब्रिटेन और इटली के लिए इसी अनुपात 6.29 और 7.18 है.

जर्मनी-भारत में क्या समानता?
कोविड -19 के मामलों में मृत्यु के रोकथाम के लिए एक मॉडल के रूप में बताए जाने वाले जर्मनी और भारत का अनुपात (37.27%) बराबर है. यह भी दिलचस्प है कि जबकि जर्मनी में 30 मार्च से 4 अप्रैल के बीच मामलों में सबसे ज्यादा मामले आ रहे थे तब मौतों की औसत संख्या केवल 13 से 18 अप्रैल के बीच सबसे अधिक थी. अधिकांश अन्य देशों के विपरीत जहां मामलों और मौतों में वृद्धि के लिए सबसे खराब दर्ज किये गये.

रूस के सबसे बुरे फेज (7-12 मई) के दौरान प्रति मौत के 115 मामले द  आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि देश में होने वाली मौतों की गंभीर जानकारी सामने नहीं आई.

इसने अब तक 3,600 मौत के मामले सामने आए हैं. जिन 14 राष्ट्रों में कम से कम 70,000 मामले दर्ज किए हैं, उनमें 3.01% भारत की मृत्यु दर, रूस, तुर्की और पेरू के बाद चौथी सबसे कम है. हालांकि, मॉस्को और इस्तांबुल से मौतों की जानकारी ना देने विश्वसनीय रिपोर्टें हैं. इसके उलट ब्राजील में मृत्यु दर 6.44%, अमेरिका (5.94%), स्पेन (9.97%), इटली (14.24%), यूके (14.36%) और फ्रांस (15.52%) है.

हमारी मृत्यु दर कम होने के कई कारण हैं...
भारत में प्रति टेस्ट 755 पर मृत्यु रूस के बाद दूसरे स्थान पर है. ब्राजील में हर 37 टेस्टिंग पर 1 मौत हो रही है. यह आंकड़ा फ्रांस में - 49, यूके - 86, इटली - 100, यूएसए- 140, कनाडा - 224 और जर्मनी - 432 है.

हमारी मृत्यु दर कम होने के कई कारण हैं जिसमें युवा और ग्रामीण आबादी का उच्च प्रतिशत, क्षय रोग के लिए बीसीजी वैक्सीन, गर्म तापमान होना शामिल है. लेकिन इनमें से एक निश्चित कारण है - प्रारंभिक और कड़ा लॉकडाउन.

कोविड -19 एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, इसलिए भारत में मामलों की संख्या में वृद्धि देखना आश्चर्यजनक नहीं है. इससे घबराहट पैदा नहीं होनी चाहिए. केवल एक चीज जो अंत में मायने रखती है वह है इस बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या.
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