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भारत ने दूसरे देशों को कोरोना वैक्सीन की सप्लाई पर लगाया 'ब्रेक', जानें कारण

सूत्रों के मुताबिक भारत से करीब 100 मिलियन कोरोना वैक्सीन की मांग है (PTI)

सूत्रों के मुताबिक भारत से करीब 100 मिलियन कोरोना वैक्सीन की मांग है (PTI)

Covid Vaccination: जिस तरह से हाल के दिनों में भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़ी है वैसी स्थिति में दूसरे देशों को कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति कराना भारत के लिए फिलहाल मुश्किल है.

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नई दिल्ली. देश में बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों (Coronavirus Cases) के चलते भारत से दूसरे देशों को सप्लाई होने वाली कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) पर भी ब्रेक लगा दिया गया है. विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक भारत की तरफ से ग्रांट के तौर पर अंतिम सप्लाई 2 अप्रैल को 2 लाख कोरोना वैक्सीन की सप्लाई बांग्लादेश (Bangladesh) को की गई है, जबकि कमर्शियल तौर पर अंतिम सप्लाई 29 मार्च को 25 हज़ार वैक्सीन की फिलिस्तीन को की गई है. जबकी 29 मार्च को ही यमन को कोवैक्स यानी गावी अलायंस (Gavi Alliance) के तहत 3.60 लाख कोरोना वैक्सीन भेजी गई हैं.

सूत्रों के मुताबिक भारत से करीब 100 मिलियन कोरोना वैक्सीन की मांग है. सूत्र ने यह भी बताया कि ऐसे देशों की संख्या 50 से भी अधिक है जो भारत से कोरोना वैक्सीन चाहते हैं. ब्राजील से 20 मिलियन की मांग है जबकि अर्जेंटीना भी 20 मिलियन वैक्सीन डोज भारत से चाहता है. भारत से अब तक कुल करीब 65 मिलियन वैक्सीन दूसरे देशों को सप्लाई की गई है. इसमें करीब 11 मिलियन ग्रांट के तौर पर, 38 मिलियन कॉमर्शियल तौर पर और लगभग 18 मिलियन कोवैक्स के तहत भारत ने आपूर्ति की है.

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अब तक 84 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति कर चुका है भारत
भारत की तरफ से अब तक कुल 84 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की गई है. 84 देशों को विभिन्न तरह से वैक्सीन की सप्लाई की गई है एक ग्रांट के तौर पर, दूसरा कमर्शियल तौर पर और तीसरा कोवैक्स यानी गावी अलायंस के तहत.

दरअसल सरकार का बार-बार कहना है कि भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद ही दूसरे देशों को कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति कर पाएगा. ऐसे में जिस तरह से हाल के दिनों में भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़ी है वैसी स्थिति में दूसरे देशों को कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति कराना भारत के लिए फिलहाल मुश्किल है. हालांकि अगले कुछ महीने में भारत अपने निर्यात को लेकर समीक्षा भी करेगा. हालांकि निर्यात पर कोई आधिकारिक तौर पर पाबंदी नहीं है लेकिन रफ्तार बिल्कुल धीमी यानी ना के बराबर हो गई है.
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