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ब्रिटेन ने भारत को जी-7 देशों की बैठक में शामिल होने का दिया न्यौता, जून में होगी बैठक

जून में कॉर्नवल में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भी शामिल होने की उम्मीद है.

जून में कॉर्नवल में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भी शामिल होने की उम्मीद है.

G7 Meeting: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन जून में जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 12:03 AM IST
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नई दिल्ली. ब्रिटेन ने जी-7 देशों की बैठक में भारत को गेस्ट के तौर पर शामिल होने का न्यौता दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची (Arindam Bagchi) ने बताया कि भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को भी बुलाया दिया गया है. जी-7 देशों के समूह में ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा है. जी-7 देशों के शेरपा और अतिथियों देशों की बैठक मंगलवार को हुई. बागची ने कहा, "भारत की ओर से इस बैठक में सुरेश प्रभु शामिल हुए, जोकि भारत के जी-7 शेरपा हैं. इसके साथ ही ब्रिटेन की अध्यक्षता में कई मुद्दों पर चर्चा हुई. जैसे वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में साझेदारी के साथ यूनाइटेड नेशंस क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस की तैयारियों को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई."

बता दें कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन जून में जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. जून में कॉर्नवल में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भी शामिल होने की उम्मीद है. ब्रिटेन ने इस सम्मेलन में भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को अतिथि राष्ट्र के रूप में आमंत्रित किया है.

इससे पहले ब्रिटेन ने फरवरी महीने में सशक्त अर्थव्यवस्था वाले समूह-7 देशों के नेताओं के साथ जारी बैठक के दौरान दुनिया के गरीब देशों को कोविड-19 टीका उपलब्ध कराने का संकल्प जताया. हालांकि, कितनी जल्दी एवं कितनी मात्रा में ये टीका उपलब्ध कराया जाएगा, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई.



इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा कि यूरोप और अमेरिका को अपनी वर्तमान कोविड-19 आपूर्ति का पांच फीसदी तक गरीब देशों को जल्द से जल्द मुहैया कराना चाहिए ताकि जमीनी स्तर पर लोगों को ये कार्य नजर आए.

उन्होंने कहा कि अमीर देशों में लाखों लोगों को कोविड-19 टीका लगाया जा चुका है, जबकि गरीब देशों में टीकाकरण अभियान बमुश्किल शुरू हो सका है.
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