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लॉस एजेंल्स पहुंचे कचरे के लिए भारत नहीं है जिम्‍मेदार, डोनाल्‍ड ट्रंप के दावे में नहीं है दम

News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 7:13 PM IST
लॉस एजेंल्स पहुंचे कचरे के लिए भारत नहीं है जिम्‍मेदार, डोनाल्‍ड ट्रंप के दावे में नहीं है दम
ट्रंप ने कहा था कि क्‍या ये हैरान करने वाला नहीं है कि भारत और चीन का कचरा लॉस एजेंल्स में आकर इकठ्ठा हो रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के जरिये लॉस एजेंल्स (Los Angeles) में आकर इकठ्ठा हो रहे कचरे के लिए भारत नहीं बल्कि दूसरे देश जिम्मेदार हैं. चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश ग्रेट पैसेफिक गारबेज पैच (GPGP) के सबसे बड़े स्रोत हैं. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि भारत-चीन जैसे देश अपनी चिमनियों और औद्योगिक प्लांट्स से निकले धुएं के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं. उनका कचरा (Garbage) समुद्र में बहकर लॉस एजेंल्स तक पहुंच रहा है.

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  • Last Updated: November 15, 2019, 7:13 PM IST
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नई दिल्‍ली. अमेरिका के राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने न्यूयॉर्क में इकोनॉमिक क्लब में प्रदूषण (Pollution) को लेकर भारत और चीन पर सीधा निशाना साधा. ट्रंप ने कहा कि भारत-चीन जैसे देश अपने संयंत्रों, फैक्ट्रियों और गाड़‍ियों से निकलने वाले धुएं के लिए कुछ नहीं करते हैं. यहां तक कि समुद्र में फेंका उनका कचरा बहकर लॉस एजेंल्स तक पहुंच रहा है. दुनिया के बाकी देश अमेरिका को दुधारू गाय समझकर फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिका पर पेरिस जलवायु समझौते में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा था, जबकि ये देश खुद धरती को बचाने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि पेरिस समझौते (Paris Agreement) में बने रहने से अमेरिका को खरबों डॉलर का नुकसान होता.

विश्‍लेषकों के मुताबिक, भारत नहीं अन्‍य देश हैं समुद्री कचरे के जिम्‍मेदार
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास मौजूद जमीन की तुलना चीन, भारत और रूस से करें तो वे अपने धुएं की सफाई के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं. क्या ये हैरान करने वाला नहीं है कि उनका कचरा लॉस एजेंल्स (Los Angeles) में आकर इकठ्ठा हो रहा है. दरअसल, ट्रंप ग्रेट पैसेफिक गारबेज पैच (GPGP) की बात कर रहे थे. ये हवाई (Hawaii) से कैलिफोर्निया (California) के बीच समुद्री कचरे का बड़ा ढेर है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस कचरे के लिए भारत नहीं बल्कि दूसरे देश जिम्मेदार हैं. चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश जीपीजीपी के सबसे बड़े स्रोत हैं.

भारत और चीन से ज्यादा ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित करता है अमेरिका

पर्यावरणविदों के मुताबिक, अमेरिका खुद सबसे बड़ा प्रदूषक रहा है. अमेरिका भारत-चीन के मुकाबले कहीं ज्यादा ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित करता है. जीपीजीपी का ज्‍यादातर कचरा पैसेफिक रिम के देशों से आता है. कैलिफोर्निया और हवाई के बीच में टेक्सास से भी दोगुने आकार का तैरता टनों कचरा अमेरिका के लिए चिंता की वजह बन गया है. समुद्र सफाई परियोजना (OCP) के तहत इस कचरे को हटाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ये आसान नहीं है. जीपीजीपी में 18 खरब कचरे के टुकड़े हैं, जिसका वजन 88,000 टन है. इसमें लॉस एंजेल्स की पानी की बोतलें, मनीला के फूड कंटेनर और शंघाई से आए प्लास्टिक बैग हैं. कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि कोशिश सराहनीय है. वहीं, कुछ इसके मूल स्रोत पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं.

कैलिफोर्निया और हवाई के बीच टेक्सास से भी दोगुने आकार का तैरता टनों कचरा अमेरिका के लिए चिंता की वजह बन गया है. इसे ग्रेट पैसेफिक गारबेज पैच कहा जाता है.


अमेरिका हर साल समुद्र में फेंकता है 24.2 करोड़ पाउंड प्लास्टिक कचरा
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लॉरेन्ट लेबरेटन ऑफ द ओशियन क्लीनअप फाउंडेशन के मुताबिक, समुद्र में कचरे के ढेर के बारे में पहली बार 1990 में पता चला था. एशिया के तमाम देशों समेत उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका से कचरा बहकर यहां इकठ्ठा हो रहा है. एक साइंस जर्नल के 2015 के अध्‍ययन के मुताबिक, समुद्र में सबसे ज्यादा कचरा फैलाने के मामले में चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, श्रीलंका और थाईलैंड शीर्ष पर हैं. अमेरिका खुद हर साल 24.2 करोड़ पाउंड प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंकता है. साइंस एडवांसेज में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपने समुद्री किनारे पर बढ़ते कचरे पर लगाम लगाने के लिए अधिकतर प्लास्टिक कचरे के आयात पर बैन लगा दिया है.

अमेरिका समेत सभी देशों को कचरा निस्‍तारण के तलाशने होंगे विकल्‍प
चीन ने 1992 से लेकर अब तक रिसाइकलिंग के लिए दुनिया का 45 फीसदी प्लास्टिक कचरा आयात किया है. यहां तक कि अमेरिका से ही प्रतिदिन प्लास्टिक भरे 4,000 शिपिंग कंटेनर चीन के रिसाइकलिंग प्लांट्स में भेजे गए. सवाल यह है कि चीन के हाथ खींचने के बाद ये कचरा कहां जाएगा. कुछ कचरा दूसरे देशों को भेजा जा सकता है, लेकिन अधिकतर देशों के पास अपने ही कचरे के निस्तारण के लिए ढांचा मौजूद नहीं है. चीन के पीछे हटने पर अमेरिका और अन्य देशों को अपने कचरे की रिसाइकलिंग के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे. स्टडी में शामिल रहीं जॉर्जिया यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर जेमबैक कहती हैं कि समुद्र में कचरा लंबे वक्त तक रह सकता है.

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First published: November 15, 2019, 6:49 PM IST
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