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वैक्सीन लगाने में तेज रफ्तार होना नहीं है काफी, भारत के सामने और भी हैं चुनौतियां

वैक्सीन स्टॉक और सप्लाई को लेकर सर्वाधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैक्सीन स्टॉक और सप्लाई को लेकर सर्वाधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Vaccination in India: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) के डेटा के अनुसार, मंगलवार की सुबह तक भारत में केवल 5.5 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन का सिंगल डोज दिया गया था. एक्सपर्ट्स ने सरकार को रफ्तार बढ़ाने की सलाह दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 8, 2021, 11:34 AM IST
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(राजीव कुमार)


नई दिल्ली. सबसे तेज कोरोना वायरस वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) लगाने वालों की सूची में भारत (India) दूसरे स्थान पर काबिज है. देश में बुधवार तक 8.8 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को वैक्सीन के डोज दिए जा चुके हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 7.7 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोविड-19 वैक्सीन का सिंगल डोज मिल गया है. वहीं, 1.1 करोड़ से ज्यादा लोगों को दोनों डोज मिल चुके हैं. हालांकि, टीकाकरण की तेज रफ्तार के बाद भी देश के सामने कई चुनौतियां हैं. जानकारों ने टीकाकरण की दर को तेज करने की सलाह दी है.

16 जनवरी को वैक्सीन प्रोग्राम देर से शुरू करने के बाद भी भारत कोविड वैक्सीन लगाने वाला दूसरा सबसे तेज देश है. करीब 116 दिनों पहले प्रोग्राम शुरू करने वाला अमेरिका इस सूची में टॉप पर बना हुआ है. एक अनुमान के अनुसार, भारत में औसतन 10.77 लाख वैक्सीन डोज रोज लगाए जा रहे हैं. वहीं, अमेरिका में 14.66 लाख डोज रोज लगाए जा रहे हैं. जबकि, ब्रिटेन में यह आंकड़ा 3.06 लाख पर है.
खास बात है कि भारत जितने ही या इससे कम प्रयासों के दम पर अमेरिका ने अपनी 30 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगा दी है. अमेरिका के मुकाबले भारत की आबादी करीब 4 गुना ज्यादा है. जबकि, 6.6 करोड़ लोगों के साथ ब्रिटेन, भारत के मुकाबले 20 गुना छोटा है. यहां करीब 46.6 प्रतिशत आबादी को कम से कम एक डोज दिया जा चुका है. फिलहाल सबसे ज्यादा वैक्सीन लगाए जाने के मामले में इजरायल शीर्ष पर है. यहां 61 फीसदी आबादी को कोविड-19 वैक्सीन का पहला डोज दिया जा चुका है.



ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के डेटा के अनुसार, मंगलवार की सुबह तक भारत में केवल 5.5 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन का सिंगल डोज दिया गया था. एक्सपर्ट्स ने सरकार को रफ्तार बढ़ाने की सलाह दी है. हालांकि, भारत की रफ्तार को दूसरे देशों से तुलना करना एकदम सही नहीं है. एक ओर जब कई अमीर पश्चिमी देश वैक्सीन की जमाखोरी में लगे हुए हैं. वहीं, दूसरी ओर भारत ने दुनिया के कई देशों को वैक्सीन पहुंचाई हैं. भारत ने 6.45 करोड़ मेड इन इंडिया वैक्सीन डोज दूसरे देशों को दिए हैं.

राजनीति और वेस्टेज भी बड़ी चुनौती
वैक्सीन स्टॉक और सप्लाई को लेकर सर्वाधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं. दिल्ली और महाराष्ट्र ने केंद्र सरकार से आयु सीमा में छूट देने की मांग की है. जबकि, केंद्र सरकार का कहना है कि वैक्सीन उन्हें दी जानी है, जिसे इसकी जरूरत है. उन्हें नहीं जो वैक्सीन चाहते हैं. इसके अलावा वैक्सीन वेस्टेज ने भी चिंता बढ़ाई है. यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर 6 प्रतिशत का है. बीते महीने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा वैक्सीन बर्बादी की बात कही है.

चुनौतियां और भी हैं
अगर मामले बढ़ते रहे, तो कभी न कभी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाएगी. इसके अलावा कर्फ्यू और लॉकडाउन की भी अपनी सीमाएं हैं. ऐसे में अगर इन उपायों को लंबे समय के लिए लगाया गया, तो यह अर्थ व्यवस्था को प्रभावित करेंगे.
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