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आपराधिक मामलों का तेज निपटारा करना बांग्लादेश से सीखे भारतः सुप्रीम कोर्ट

News18.com
Updated: June 13, 2018, 12:53 PM IST
आपराधिक मामलों का तेज निपटारा करना बांग्लादेश से सीखे भारतः सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

बेंच ने सरकार से उसकी राय मांगी है और पूछा है कि क्या वह उस कानून में बदलाव करेगी जिसके तहत आरोपियों के भगौड़ा होने के नाते मामले की सुनवाई रुक जाती है.

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जब बात न्याय प्रक्रिया या तेजी से फैसले सुनाने की आती है तो बांग्लादेश हमसे तेज़ नज़र आता है. भारत में फैसले आते-आते काफी देर हो जाती है. लेकिन बांग्लादेश में स्थिति काफी अलग है. बांग्लादेश ने इसके लिए अलग से नियम बनाए हैं. अगर कोई अपराधी भागा हुआ होता है तो ऐसी स्थिति में बांग्लादेश न्यूज़ पेपर में कोर्ट में उसकी अनुपस्थिति का नोटिस छपवाकर ट्रायल आगे बढ़ा देता है. इसकी वजह से मामले का निपटारा जल्दी हो जाता है.

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जस्टिस आदर्श के गोयल की अध्यक्षता में एक बेंच ने सरकार से उसकी राय मांगी है और पूछा है कि क्या वह उस कानून में बदलाव करेगी, जिसके तहत आरोपियों के भगौड़ा होने के नाते मामले की सुनवाई रुक जाती है. मामले में कोर्ट ने अपने उस फैसले का भी ज़िक्र किया, जिसमें उसने बांग्लादेश की तर्ज पर क्रिमिनल प्रोसीजर कोड में बदलाव किए जाने की बात कही थी.

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बेंच ने मामले में केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी पूछा. कोर्ट ने अपने हाल के आदेश में कहा कि "हम कानून मंत्रालय के हवाले से 'यूनियन ऑफ से इंडिया' से पूछते हैं कि उसने इस मामले में क्या कदम उठाया है."

कोर्ट ने इस मामले में केंद्र से स्पष्टीकरण इसलिए मांगा है क्योंकि उसके सामने एक ऐसा मामला आ गया था जिसे निर्धारित समय में पूरा करना था लेकिन आरोपी भागा हुआ था और वह कोर्ट में हाज़िर नहीं हुआ.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डकैती और हत्या के एक मामले में आरोपी को ज़मानत पर रिहा कर दिया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील की गई जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और आदेश दिया कि मामले की सुनवाई को 6 महीने में पूरा कर लिया जाए. लेकिन सुनवाई पूरी नहीं हो सकी क्योंकि ज़मानत मिलने के बाद आरोपी भाग गया था और इसके बाद वो कभी भी ट्रायल के लिए हाज़िर नहीं हुआ.

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First published: June 13, 2018, 12:20 PM IST
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