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भारत को 2020 तक मिलेगा पहला S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम, रूस को अदा की रकम

News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 5:19 PM IST
भारत को 2020 तक मिलेगा पहला S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम, रूस को अदा की रकम
ये डील करीब 5 अरब डॉलर की हैै. अगले पांच साल में भारत को इस डिफेंस सिस्‍टम की पूरी डिलीवरी हो जाएगी. फाइल फोटो

पिछले साल अक्टूबर में भारत ने रूस (Russia) के साथ इससे संबंधित डील (S-400 missile defence system) की थी. ये डील 5.4 अरब डॉलर की है. इसके तहत रूस, भारत को पांच S-400 मिसाइल (S-400 Missile system) देगा. अमेरिका लगातार भारत को इस समझौते को तोड़ने के लिए कह रहा है.

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  • Last Updated: November 15, 2019, 5:19 PM IST
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नई दिल्ली. भारत और रूस के बीच पांच S-400 मिसाइल की खरीद को लेकर हुआ समझौता सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. भारत को पांच S-400 मिसाइल सही समय पर मिल जाएंगी. भारत ने इसके लिए रूस को 85 करोड़ डॉलर की राशि का भुगतान किया. ये पूरी डील करीब 5 अरब डॉलर की है. इसके लिए भारत ने सितंबर में रूस को इस डील की करीब 15 फीसदी रकम चुका दी है. हालांकि इस डील पर अमेरिका की भी नजर लगी हुई है, वह लगातार इसके लिए भारत और रूस के लिए धमकी भरे शब्‍दों का इस्‍तेमाल कर रहा है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया था कि वह इस डील को करने की दिशा में आगे बढ़ेगा.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस डील की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे सिस्‍टम के विवरण में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई. पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी चेतावनी को देखते हुए भारत और रूस ने इसका पैमेंट रुपए और रुबल में करने का तरीका विकसित किया है. कुछ पेमेंट यूरो में भी किया गया. इस डील से जुड़े सूत्र के अनुसार, इस पूरे डिफेंस सिस्टम के 2025 तक डिलीवर होने की संभावना है. लेकिन नए पैमेंट के बाद अब पहला S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम 16 से 18 महीने में भारत को मिल जाएगा. रूस के अधिकारियों के मुताबिक 2020 तक पहला सिस्टम मिल जाएगा. इसके बाद अगले पांच साल में इसकी डिलिवरी पूरी हो जाएगी.

भारत के लिए क्यों जरूरी है ये सिस्टम
S-400 मिसाइल सिस्टम से भारत को रक्षा कवच मिल जाएगा. ये किसी भी मिसाइल हमले को ध्वस्त कर सकता है. इस सिस्टम से भारत पर होने वाले परमाणु हमले का भी जवाब दिया जा सकेगा. अर्थात यह डिफेंस सिस्टम भारत के लिए चीन और पाकिस्तान की न्यूक्लियर सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों से कवच की तरह काम करेगा. यहां तक कि यह सिस्टम पाकिस्तान की सीमा में उड़ रहे विमानों को भी ट्रैक कर सकेगा.

अमेरिका बना रहा है लगातार दबाव
अमेरिका भारत पर इस डील को तोड़ने का लगातार दबाव बना रहा है. इतना ही नहीं वह लगातार भारत से कह रहा है कि वह रूस से किसी भी तरह के सैन्य हथियार न खरीदे. भारत अभी 60 फीसदी सैन्य उपकरण रूस से खरीदता है. अमेरिकी अधिकारियों ने ये भी चिंता व्यक्त की है कि एस-400 अमेरिकी मूल के सैन्य उपकरणों और भारत द्वारा उपयोग किए जाने वाले हवाई प्लेटफार्मों पर कब्जा कर सकता है.

अक्टूबर में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर बीच हुई मीटिंग में भी इसका मुद्दा उठा था. तब भारत ने अपनी संप्रभुता की बात कही थी. तब जयशंकर ने कहा कोई देश किसी को ये नहीं कह सकता कि आप रूस से हथियार नहीं खरीद सकते. भारतीय अधिकारियों ने यह भी कहा है कि देश एस-400 सौदे पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट के मापदंड को पूरा करता है. इसके अलावा भारत मॉस्को के साथ लंबे समय से कायम रक्षा संबंधों को ऐसे नहीं तोड़ सकता.
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तुर्की पर भी अमेरिका ने डाला दबाव
भारत के अलावा तुर्की भी रूस से एस-400 डिफेंस मिसाइल खरीद रहा है. ऐसे में अमेरिका उस पर भी दबाव डाल रहा है. बुधवार 13 नवंबर 2019 को डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से इस बारे में बात की. इस मीटिंग में ट्रंप ने कहा एस-400 जैसे हथियार अमेरिका के लिए बड़ी चिंता का विषय है. इससे पहले ट्रंप एर्दोगन को धमकी दे चुके हैं कि अगर उन्होंने एस-400 डिफेंस सिस्टम खरीदा तो अमेरिका तुर्की पर प्रतिबंध लगा देगा.

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First published: November 15, 2019, 5:06 PM IST
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