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जर्मनी को पछाड़कर 2026 में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत: रिपोर्ट

भाषा
Updated: December 29, 2019, 11:59 PM IST
जर्मनी को पछाड़कर 2026 में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत: रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत 2026 तक पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है.

ब्रिटेन स्थित सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (Center for Economics & Business Research) की रिपोर्ट के मुताबिक जापान, जर्मनी और भारत में अगले 15 साल तक तीसरे स्थान के लिये प्रतिस्पर्धा चलेगी.

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  • Last Updated: December 29, 2019, 11:59 PM IST
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नई दिल्ली. भारत (India) 2026 में जर्मनी (Germany) को पछाड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (Economy) और वर्ष 2034 में जापान को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. एक रिपोर्ट में यह कहा गया है. रिपोर्ट में कहा गया कि भारत 2026 तक पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है. हालांकि, सरकार ने देश को 2024 तक पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है.

ब्रिटेन स्थित सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (Center for Economics & Business Research) की रिपोर्ट ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक लीग टेबल 2020’ (World Economic League Table 2020) के अनुसार, ‘‘भारत 2019 में ब्रिटेन (Britain) और फ्रांस (France) दोनों को निर्णायक तौर पर पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया. अब भारत के 2026 में जर्मनी को पीछे छोड़कर चौथी तथा 2034 में जापान को पछाड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाने का अनुमान है.’’

15 साल तक तीसरी जगह के लिए ये तीन देश होंगे दावेदार
सीईबीआर ने कहा कि जापान, जर्मनी और भारत में अगले 15 साल तक तीसरे स्थान के लिये प्रतिस्पर्धा चलेगी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के भारतीय अर्थव्यवस्था को 2024 तक 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने के सवाल पर रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘‘भारत पांच हजार अरब डालर की जीडीपी 2026 में हासिल कर लेगा -- सरकार के तय लक्ष्य के मुकाबले दो साल बाद.’’

2020 में सुधरेगी भारत की अर्थव्यवस्था
वहीं उद्योग एवं वाणिज्य संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को कहा कि वैश्विक व्यापारिक तनावों में कमी आने के साथ ही सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा उठाये गये कदमों से 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है.

सीआईआई ने इसके साथ ही लचीली राजकोषीय नीति का भी सुझाव दिया जिसके तहत केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे के लिये लक्ष्य में 0.5 प्रतिशत से 0.75 प्रतिशत का दायरा तय किया जाना चाहिये. उसने कहा कि इसका अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर होगा.बेहतर स्थिति में पहुंच रही है इकोनॉमी
सीआईआई के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने कहा कि हम नये साल में प्रवेश करने वाले हैं और अब इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि अर्थव्यवस्था बीत रहे साल की तुलना में बेहतर स्थिति में पहुंच रही है. उन्होंने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक और सरकार द्वारा उठाये गये अनुकूल कदमों को देखते हुये उद्योग जगत का मानना है कि नरमी से निपट लिया जायेगा और जल्दी ही क्रमिक सुधार शुरू हो जाएगा.’’

उन्होंने कहा, ‘‘विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) के बेहतर होने, विमान यात्रियों की संख्या बढ़ने तथा यात्री कारों की बिक्री में जारी गिरावट में कमी की शुरुआत होने समेत सुधार के कई संकेत दिख रहे हैं.’’

जीडीपी में होगा सुधार
उन्होंने कहा कि तीसरी तिमाही में भी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की खराब वृद्धि दर देखने को मिल सकती है, लेकिन इसके बाद सुधार आने लगेगा.

सीआईआई के अनुसार, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) से जुड़ी शुरुआती दिक्कतें ठीक होने लगी हैं. उद्योग जगत को इससे अर्थव्यवस्था को ठीक-ठाक लाभ होने की उम्मीद है.

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First published: December 29, 2019, 11:14 PM IST
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