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india not to buy 101 arms and military systems from foreign rajnath singh released 3rd negetive arms import list

हथियार उत्पादन में आत्मनिर्भरता की तरफ कदम, अब 101 तरह के सैन्य साजोसामान विदेश से नहीं खरीदेगा भारत

भारत अब से पहले 2020 और 2021 में भी दो नेगेटिव आर्म्स इंपोर्ट लिस्ट जारी कर चुका है. (सांकेतिक तस्वीर साभार सोशल मीडिया)

भारत अब से पहले 2020 और 2021 में भी दो नेगेटिव आर्म्स इंपोर्ट लिस्ट जारी कर चुका है. (सांकेतिक तस्वीर साभार सोशल मीडिया)

Negative arms import list: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी हुवावे पर अमेरिकी पाबंदी का हवाला दिया और कहा कि आजकल के अधिकतर हथियार इलेक्ट्रॉनिक होते हैं, सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से चलाए जाते हैं. ऐसे में इनके हैक होने का भी खतरा रहता है. इसी को देखते हुए भारत अब हल्के टैंक, कई आर्टिलरी गन, नेवी के यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, कुछ तरह के ड्रोन, कई एंटी शिप व एंटी रेडिएशन मिसाइलें विदेश से नहीं खरीदेगा.

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नई दिल्लीः हथियारों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की तरफ कदम बढ़ाते हुए भारत ने 101 ऐसे हथियारों की लिस्ट जारी की है, जिन्हें विदेश से आयात नहीं किया जाएगा. यह इस तरह की तीसरी लिस्ट है. इससे पहले 2020 और 2021 में दो नेगेटिव आर्म्स इंपोर्ट लिस्ट जारी करके 209 हथियारों का इंपोर्ट प्रतिबंधित किया जा चुका है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीसरी लिस्ट जारी करते हुए कहा कि इससे देश में ही सैन्य प्रणालियों, हथियारों, तकनीक और गोला-बारूद के उत्पादन और विकास को बढ़ावा मिलेगा. विदेशी हथियारों और सिस्टम पर निर्भरता घटेगी, जिनसे सुरक्षा में सेंध लगने का खतरा रहता है.

सरकार की ओर से जारी तीसरी लिस्ट में हल्के टैंक, फिट की जाने वाली आर्टिलरी गन, नेवी के यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, कुछ तरह के ड्रोन, मीडियम रेंज की एंटी शिप और एंटी रेडिएशन मिसाइलें शामिल हैं. इनके अलावा नेक्स्ट जेनरेशन के तटीय गश्ती वाहन, नेवी के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम, MF-STAR वॉरशिप रडार, एडवांस हल्के टॉरपीडो और कुछ रॉकेट्स आदि भी हैं. इनके आयात पर दिसंबर 2022 से दिसंबर 2027 तक के लिए प्रतिबंध लगाया गया है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी हुवावे पर अमेरिका द्वारा लगाई गई पाबंदियों का हवाला देते हुए कहा कि आजकल के अधिकतर हथियार इलेक्ट्रॉनिक होते हैं, सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से चलाए जाते हैं. ऐसे में इनके हैक किए जाने का भी खतरा रहता है. इन हथियार प्रणालियों के फूल प्रूफ होने का कितना भी दावा किया जाए, लेकिन सुरक्षा में सेंध लगने की आशंका बनी रहती है. पहले जमाने में टैंक, होवित्जर तोपें और हेलीकॉप्टर तक मैकेनिकल हुआ करते थे, जिनके सिस्टम में दूर बैठकर छेड़छाड़ करना संभव नहीं होता था. लेकिन अब तकनीक बदल गई है. आजकल के जमाने में हथियारों को कहीं दूर बैठकर भी कंट्रोल किया जा सकता है. ऐसे में हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा हथियार और हथियार प्रणालियां देश में ही बनाई जाएं ताकि इनकी सुरक्षा की गारंटी रहे.

TOI की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि तीसरी नेगेटिव इंपोर्ट लिस्ट में जो हथियार और सिस्टम हैं, उनसे से कइयों को देश में ही विकसित करने पर काम चल रहा है. अगले 5 साल में इनमें से कई तैनात करने लायक भी हो जाएंगे. डीआरडीओ सरकारी रक्षा कंपनियों, ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों और कुछ प्राइवेट कंपनियों के सहयोग से इन पर काम कर रहा है. 2020 में पहली नेगेटिव इंपोर्ट लिस्ट जारी होने के बाद से सरकार स्वदेशी हथियारों की खरीद के लिए 54 हजार करोड़ के सौदे कर चुकी है. अगले 5-7 साल में इसे बढ़ाकर 4.5 लाख करोड़ किए जाने की उम्मीद है.

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में विदेश से हथियार खरीदने भले ही कम कर दिए हों, लेकिन अब भी वह दुनिया का सबसे बड़ा आर्म्स इंपोर्टर है. दुनिया में बिकने वाले 11 फीसदी हथियार भारत खरीदता है. केंद्र सरकार ने भारत में ही बने हथियारों को खरीदने का बजट 2 करोड़ डॉलर से घटाकर वर्ष 2025 तक एक करोड़ डॉलर करने का लक्ष्य तय किया है. इसके अलावा 5 अरब डॉलर के रक्षा उपकरणों का निर्यात का लक्ष्य भी रखा है.

Tags: DRDO, Indian army, Rajnath Singh

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