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जॉनसन एंड जॉनसन के जुड़ने के बाद अब भारत के पास 5 कोविड-19 टीके, सभी के बारे में यहां जाने सब कुछ

जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत सरकार ने आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी (सांकेतिक तस्वीर)

जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत सरकार ने आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी (सांकेतिक तस्वीर)

कोवीशील्ड (Covishield), कोवैक्सीन (Covaxin), स्पुतनिक वी, और मॉडर्ना के बाद जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को मिलाकर अब भारत के पास कुल पांच कोरोना रोधी वैक्सीन हो गई हैं. डीजीसीआई ने करीब एक महीने पहले मुंबई स्थिति दवा कंपनी सिप्ला को अपातकालीन उपयोग के लिए माडर्ना की कोविड 19 वैक्सीन के आयात की अनुमति दी थी.

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    नई दिल्ली. देश को कोरोना से मुक्त करने के लिए तेजी से वैक्सीनेशन (Vaccination) का काम चल रहा है. सरकार वैक्सीनेशन में तेजी लाने के साथ-साथ वैक्सीन (Corona Vaccine) की उपलब्धता पर भी तेजी से काम कर रही है. जहां एक तरफ भारत में बनने वाली वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है. वहीं अब दूसरे देशों की वैक्सीन को भी धीरे-धीरे मंजूरी दी जा रही है. जॉनसन एंड जॉनसन (JOHNSON & JOHNSON) की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत सरकार ने आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है. इस वैक्सीन को अमेरिका (America) ने पहले ही अपने यहां मंजूरी दे दी थी और रिपोर्ट में यह कहा गया था कि यह अस्पताल में भर्ती होने और संक्रमण से होने वाली मौतों को रोकने में काफी प्रभावी है.

    कोवीशील्ड, कोवैक्सीन, स्पुतनिक वी और मॉडर्ना के बाद जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को मिलाकर अब भारत के पास कुल पांच कोरोना रोधी वैक्सीन हो गई हैं. जॉनसन एंड जॉनसन से पहले डीजीसीआई ने करीब एक महीने पहले मुंबई स्थिति दवा कंपनी सिप्ला को अपातकालीन उपयोग के लिए माडर्ना की कोविड 19 वैक्सीन के आयात की अनुमति दी थी. आइए आज जानते हैं भारत में अब तक कौन-कौन सी वैक्सीन को मंजूरी दी गई है और ये कैसे काम करती है.

    Covishield Vaccine 

    एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविशील्ड मुख्य रूप से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित है. जब कोई मरीज टीका लेता है तो यह वैक्सीन सीधे तौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली पर कार्य करती है और शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण करती है. इससे शरीर किसी भी तरह के कोरोना वायरस से लड़ने के लिए तैयार होता है.

    कोवीशील्ड का टीक दो डोज में दिया जाता है जिसमें दूसरी डोज चार से 12 सप्ताह के अंतराल में लगाई जाती है. इस वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जाता है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में यह सामने आया है कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की दूसरी और तीसरी डोज देर से लगाने पर इम्यूनिटी अधिक बूस्ट होती है. अध्ययन में पाया गया कि एस्ट्राजेनेका की पहली और दूसरी खराक के बीच 45 सप्ताह के अंतराल से इम्यूनिटी घटी नहीं बल्कि इम्यूनिटी और अधिक बढ़ी है.

    Covaxin Vaccine

    कोवैक्सीन पूरी तरह से स्वदेशी कंपनी है और कोविशील्ड के बाद यह दूसरी सबसे प्रभावी कोरोना वैक्सीन है. इसका निर्माण भारत बॉयोटेक द्वारा किया जाता है जो कि देश की 24 साल पुरानी कंपनी है. भारत बॉयोटेक कुल एक 123 देशों को अपनी दवाएं निर्यात करती है.

    कोवैक्सीन भी दो खुराक वाला टीका है. इसकी पहली और दूसरी खुराक के बीच में करीब 4 सप्ताह का अंतर रखा जाता है. इस टीके को भी 2 से लेकर 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर स्टोर किया जाता है.

    Sputnik V Vaccine

    यह रूस द्वारा निर्मित वैक्सीन है. स्पुतनिक वी पहली विदेशी वैक्सीन है जिसका प्रयोग भारत कर रहा है. इसे मास्को की गमलेया इंस्टीट्यूट द्वारा बनाया गया है. यह शरीर में एंटीबॉडी बनाने के लिए एक शीत प्रकार के वायरस का प्रयोग करता है जो कि शरीर के लिए पूरी तरह से सुरक्षित होता है.

    दूसरी वैक्सीन की तरह इसे भी 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है.स्पुतनिक वी वैक्सीन दूसरे सामान टीकाकरण के विपरीत पहली और दूसरी खुराक में दो अलग-अलग तरह की वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है. पहली और दूसरी खुराक के बीच 21 दिन का अंतराल दिया जाता है.

    Moderna Vaccine

    कोरोना वायरस से बचाव के लिए मॉडर्ना वैक्सीन एक मैसेंजर की भांति काम करती है ताकि वायरस के लिए प्रतिरक्षा यानि इम्यूनिटी बनाने के लिए कोशिकाओं को तैयार किया जा सके. मॉडर्ना वैक्सीन को फाइजर के साथ कई देशों में एक प्रमुख विकल्प के तौर पर माना है. विशेषज्ञों की मानें तो यह वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 90 प्रतिशत तक प्रभावी है.

    रिपोर्ट के मुताबिक अब तक लगभग 120 मिलियन अमेरिकावासियों ने फाइजर या मॉडर्ना की डोज ली है. इन लोगों में अब तक किसी भी तरह के बड़े हानिकारक प्रभाव सामने नहीं आए हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ एमआरएनए टीकों के और भी अधिक स्टॉक करने पर जोर दे रहे हैं. जापान भी जून के अंत तक फाइजर शॉट की 100 मिलियन खुराक सुरक्षित करने के लिए काम कर रहा है.

    JOHNSON & JOHNSON’S SINGLE-DOSE VACCINE

    शनिवार को देश में आपातकालीन उपयोग के लिए जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भी शामिल कर लिया गया. इस बात की जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने दी. उन्होंने कहा कि इससे नोवेल कोरोना वायरस के खिलाफ देश में जारी लड़ाई में मदद मिलेगी. भारत अब अपनी वैक्सीन की संख्या का विस्तार करने में लगा हुआ है. इसके बाद अब भारत के पास कुल पांच टीके हैं.

    जॉनसन और जॉनसन वैक्सीन के प्रभाव को जानन के लिए दो समूहों में कुल 600 लोगों पर टेस्ट किया गया था. इस टेस्टिंग में भाग लेने वालों की उम्र 18 वर्ष से 60 वर्ष के बीच थी. कुछ महीनों पहले कंपनी ने भारत में क्लीनिकल ट्रायल फेज कंडक्ट करने की इजाजत मांगी थी लेकिन बाद में कंपनी ने इस अनुमोदन को वापस ले लिया था.

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