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Indo-Pak War 1971: जब बांग्लादेश से भारत-पाक बॉर्डर तक दौड़ी थी व्हाइट हॉट ट्रेन

भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी. (फाइल फोटो)
भारतीय सेना ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी. (फाइल फोटो)

सिख रेजीमेंट (Sikh Regiment) के मेजर चांदपुरी मदद पहुंचने से पहले ही पाक सेना (Pak Army) को खदेड़ चुके थे. इस बारे में और ज़्यादा जानकारी न्यूज18 हिंदी के साथ साझा की 1971 युद्ध के हीरो रहे कर्नल शिव कुंजरू ने.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 20, 2020, 9:53 AM IST
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नई दिल्ली. धोखेबाजी का दूसरा नाम पाकिस्तान (Pakistan) है, यह लोग ही नहीं कहते बल्कि पाकिस्तान इसे खुद भी वक्त-वक्त पर साबित करता रहा है. 1971 की लड़ाई (1971 War) के दौरान भी पाकिस्तान ने कुछ ऐसा ही किया था. पाकिस्तान के इस धोखे का जवाब देने के लिए ही इंडियन आर्मी (Indian Army) बांग्लादेश से राजस्थान के एक बॉर्डर (Border) तक पहुंचने के लिए ट्रेन से ही चल पड़ी थी. हालांकि उनके पहुंचने से पहले ही सिख रेजीमेंट के मेजर चांदपुरी पाक सेना को खदेड़ चुके थे.

इस बारे में और ज़्यादा जानकारी न्यूज18 हिंदी के साथ साझा की, 1971 युद्ध के हीरो रहे कर्नल शिव कुंजरू ने. '16 दिसम्बर, 1971 की सुबह 10.45 बजे इंडियन आर्मी की 2 पैरा बटालियन ग्रुप ढाका के अंदर घुस चुकी थी. पाक सेना ने सरेंडर कर दिया था. कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी थी. इंडियन आर्मी ढाका में चारों ओर फैल गई थी.

इसी दौरान 21-22 दिसम्बर को खबर मिली कि पाक सेना की टैंक रेजीमेंट ने राजस्थान में लोंगेवाला पोस्ट पर मोर्चा खोल दिया है. वो वहां से अंदर घुसने की कोशिश करेगी. हमें जल्द से जल्द पहुंचने का आदेश था. इसके लिए ढाका में जो भी वाहन मिला हमने वहां से दौड़ लगा दी. जो भी वाहन मिला हम उसी में सवार होकर निकाल आए.'



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वह बताते हैं, 'ढाका से बाहर आने पर एक बार फिर हम सब उसी पोंगली पुल के पास जमा हुए. वहां से थोड़ी ही दूरी पर एक गांव में ट्रेन आई और हम उसमें सवार होकर राजस्थान की ओर रवाना हो गए. इस ट्रेन को व्हाइट हॉट नाम दिया गया. उस वक्त कोयले का इंजन हुआ करता था. बिना कहीं रुके ट्रेन दौड़ती रही.

ट्रेन का ड्राइवर भी जांबाज़ था, उसने इंजन में कोयला जलने की कमी नहीं होने दी. लेकिन अच्छी बात यह थी कि हमारे वहां पहुंचने से पहले ही हमे खबर मिली की पाक की टैंक रेजीमेंट को जवाब दिया जा चुका है. अब हमे दिल्ली पहुंचने का आदेश मिला, जहां 26 जनवरी पर होने वाली परेड की तैयारी करनी थी.”

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इस लड़ाई के बाद से राजस्थान की लोंगेवाला पोस्ट ऐसी फेमस हुई की इस पर बॉर्डर के नाम से मूवी भी बन गई और इसी साल दिवाली पर पीएम नरेन्द्र मोदी बीएसएफ के जवानों से मिलने के लिए भी इसी लोंगेवाला पोस्ट पर गए थे. 1971 में मेजर चांदपुरी ने इसी पोस्ट पर सिर्फ 120 जवानों की मदद से पाकिस्तान की पैटर्न टैंक रेजीमेंट को पीछे भागने पर मजबूर कर दिया था.

इतना ही नहीं भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना को 8 किलोमीटर अंदर तक खदेड़कर आई थी. खास बात यह है कि बॉर्डर मूवी में इस सीन को पूरे देश ने बड़े पर्दे पर देखते हुए फख्र महसूस किया था. बाद में साल 2018 में मेजर से बिग्रेडियर की रैंक तक पहुंचे मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी का निधन हो गया.
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