दिल्ली को मिलेगा अमेरिका का 'रक्षा कवच', आसपास भी नहीं भटक पाएगा दुश्मनों का मिसाइल-ड्रोन

अमेरिकी मिसाइल NASAMS-II के लिए पुरानी सुरक्षा व्यवस्था को बदला जाएगा. इसके तहत वीआईपी नो फ्लाई जोन और दुश्मनों के विमानों को देखते ही मार गिराने वाले सिस्टम को भी दोबारा आकार दिया जाएगा.

News18Hindi
Updated: June 11, 2019, 1:09 PM IST
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Updated: June 11, 2019, 1:09 PM IST
वॉशिंगटन और मॉस्को की तरह केंद्र की मोदी सरकार देश की राजधानी दिल्ली को अभेद्य सुरक्षा देने की तैयारी कर रही है. इसके लिए भारत अमेरिका से नेशनल एडवांस्ड सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम- II (NASAMS-II) खरीदने की कोशिशों में जुटा है. ये मिसाइल होने पर दुश्मन चाहकर भी राजधानी पर मिसाइल, ड्रोन और विमान से हमला नहीं कर पाएंगे.

अंग्रेजी अखबार 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक खबर के मुताबिक, भारत सरकार दिल्ली को चारों तरफ से मिसाइलों के रक्षा कवच से ढंकने की तैयारी में है. NASAMS को हासिल करने का फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) अपनी दो स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) ढाल को विकसित करने के अंतिम चरण में है. BMD का डिजाइन पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर और बाहर (पूर्व) परमाणु मिसाइलों को ट्रैक करने और उन्हें तुरंत नष्ट करने के लिए किया गया है.



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किस तरह होगी दिल्ली की सुरक्षा?

दिल्ली की सुरक्षा की सबसे बड़ी परत NASAMS के माध्यम से होगी. ये स्टिंगर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, बंदूक प्रणालियों और AIM-120C-7 AMRAAMs (मध्यम दूरी के मिसाइल) जैसे विभिन्न हथियारों का एक संयोजन होगा, जो तीन-आयामी सेंटिनल रडार पर आधारित होगा. यह नेटवर्क प्रणाली, इमारतों के आसपास भी शूटिंग करने में सक्षम है. इससे 9/11 सहित बेहद करीबी हमलों से भी बेहद आसानी से बचा जा सकेगा.

NASAMS के लिए बदलेगी पुरानी सुरक्षा व्यवस्था
अमेरिकी मिसाइल NASAMS-II के लिए पुरानी सुरक्षा व्यवस्था को बदला जाएगा. इसके तहत वीआईपी नो फ्लाई जोन और दुश्मनों के विमानों को देखते ही मार गिराने वाले सिस्टम को भी दोबारा आकार दिया जाएगा. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पहले मोदी सरकार में रक्षा मंत्री रहीं निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने अमेरिका से 1 अरब डॉलर में 'नेशनल एडवांस्ड सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम-2' (NASAMS-II) को अधिग्रहण करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी.
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NASAMS में शामिल होंगी ये चीजें
NASAMS के तहत तीन दिशाओं में काम करने वाले सेंटिनल राडार, शॉर्ट और मीडियम रेंज की मिसाइलें, लांचर, फायर डिस्ट्रिव्यूशन सेंटर्स और 'कमांड एंड कंट्रोल यूनिट्स' शामिल होंगे. जिससे दुश्मन के हवाई हमलों को तेजी से पहचानने, उन्हें ट्रैक करने और हवा में ही मार गिराने में सफलता हासिल होगी.

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VIP-89 भी दायरे में आएंगे
समग्र दिल्ली एरिया एयर डिफेंस प्लान के तहत आने वाले VIP-89 क्षेत्र का भी पुनर्निर्माण करने की बात चल रही है. बता दें कि इस क्षेत्र के तहत राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक शामिल है. साथ ही विमानों को मार गिराने को लेकर फैसले लेने के वक्त को भी कम किया जाएगा, ताकि उन्हें समय रहते अपने कब्जे में भी लिया जा सके.

बता दें कि भारत ने अक्टूबर, 2018 में चार साल की कोशिशों के बाद अंतर-सरकारी समझौते के बावजूद CAATSA (अमेरिका के प्रतिबंध अधिनियम) नामक अमेरिकी कानून के तहत प्रतिबंधों के खतरे के बाद रूस के साथ एस-400 सौदा किया. भारत को अक्टूबर में ये मिसाइलें मिलेंगी.
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